देहरादून में मुर्दों को दफनाने की मारामारी पर लोहियानगर में पूरे शहर के लिए खोला कब्रिस्तान
राजधानी के मोरोवाला और सुभाषनगर कब्रिस्तानों में शव दफनाने को लेकर विवाद उठ रहा है। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने लोहियानगर कब्रिस्तान का निरीक्षण किया और इसे अब सभी क्षेत्रों के लिए खोलने की घोषणा की। टर्नर रोड के लोग इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं, जबकि अन्य ने इसे स्वीकार किया है।
राजधानी के मोरोवाला और सुभाषनगर कब्रिस्तानों में शव दफनाने को लेकर बनी दिक्कतों के बीच वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने रविवार को लोहियानगर स्थित कबाड़ी बाजार कब्रिस्तान का निरीक्षण किया। कहा कि यह कब्रिस्तान अब आजाद कॉलोनी, लोहियानगर, माजरा, टर्नर रोड, रीठामंडी और कारगी समेत सभी क्षेत्रों के लिए खोल दिया गया है। सख्ती से कहा कि कब्रिस्तानों को लेकर राजनीति कतई बर्दाश्त नहीं होगी और अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उधर, टर्नर रोड के लोगों ने बैठक कर कई सवाल खड़े किए और लोहियानगर में मुर्दे दफनाने को भेजना उनके साथ नाइंसाफी है। रविवार को पौधारोपण के बाद शम्स ने कहा कि लोहियानगर कब्रिस्तान 2014 में तत्कालीन मेयर विनोद चमोली के समय नगर निगम द्वारा दिया गया था।
आधे से ज्यादा हिस्से में भराव किया जा चुका है और बाकी का जारी है। दो कर्मचारी तैनात किए गए हैं और बाउंड्रीवॉल भी कराई गई है। सुभाषनगर कब्रिस्तान में जल्द भरान का काम शुरू होगा। इस दौरान वक्फ विकास निगम जीएम शाहिद शमी सिद्दीकी, मुफ्ती वासिल, एडवोकेट नदीम जैदी, कमेटी अध्यक्ष इसरार अहमद, उपाध्यक्ष हाजी अहसान, सचिव अब्दुल वहाब, साजिद मलिक, मास्टर आबिद, गुलफाम शेख, मास्टर मुस्तकीम, जाकिर हुसैन, तौसीफ खान आदि मौजूद रहे।आजाद कॉलोनी वालों को मंजूर, टर्नर रोड वालों ने बताया नाइंसाफीमोरोवाला एवं सुभाषनगर कब्रिस्तानों में बाहरी परिवारों के मृतकों के शवों को दफनाने से मना करने पर छिड़े विवाद के बाद आजाद कॉलोनी के लोगों ने लोहियानगर कब्रिस्तान को मंजूर कर लिया है। हालांकि टर्नर रोड के लोग अभी भी नजदीकी कब्रिस्तान में ही शव दफनाने को लेकर अड़े हैं। आजाद कॉलोनी में अबुल कलाम पब्लिक स्कूल में बैठक हुई। इसमें कहा गया कि लोहियानगर कब्रिस्तान पूरे शहर के लिए खुला है। यहां पर आधे से ज्यादा भरान हो गया हैं, जो रह रहा है, उसे कराया जाएगा और बाकी बाउंड्री, पौधारोपण भी कराएंगे। छोटे रास्ते के लिए पुल भी बनेगा। इस दौरान कब्रिस्तान कमेटी के अध्यक्ष इसरार अहमद, उपाध्यक्ष अहसान मलिक, सहसचिव मास्टर आबिद, कोषाध्यक्ष मोहम्मद साजिद, अब्दुल वहाब, तौसीफ खान, आस मोहम्मद, हाफिज शाहनजर आदि मौजूद रहे। टर्नर रोड पर रविवार को मोरोवाला और सुभाषनगर कब्रिस्तान में बाहर के लोगों के शवों को ना दफनाने देने को लेकर बैठक की गई। सैय्यद फरीद ने कहा कि उनका परिवार डेढ़ सौ सालों से यहां रहता है, लेकिन जनवरी में उनके वालिद के इंतकाल के बाद मोरोवाला में बाहरी बता दफनाने से मना कर दिया। बाहरी और स्थानीय की परिभाषा समझ नहीं आई। वक्ताओं ने कहा कि उन्हें शवों को लोहियानगर कब्रिस्तान में दफनाने को कहा जा रहा है, जबकि मोरोवाला ओर सुभाषनगर के कब्रिस्तान उनके नजदीक है, यह उनके साथ नाइंसाफी है। जो लोग बाहर से आए है, उन्हें अपने कब्रिस्तान खरीदे जाने की बात कही जा रही है। लेकिन यह संभव नहीं है कि हर परिवार का अपना कब्रिस्तान हो। इस्लाम कहता है कि मुर्दे को जितना जल्दी हो सके नजदीक के क़ब्रिस्तान में दफ्न करना चाहिए। इस दौरान मोहम्मद सादिक, हातिम, मास्टर वाजिद, आसिफ बेग, अब्दुल कुद्दूस, जमाल आदि मौजूद रहे।बाहरी के नाम पर पाबंदी गैर-शरई : सिद्दीकीदून के कब्रिस्तानों में बाहरी निवासियों को दफनाने पर रोक पर वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता खुर्शीद अहमद सिद्दीकी ने कड़ा ऐतराज जताया है। कहा कि मस्जिद, मदरसा और कब्रिस्तान अल्लाह की राह में वक्फ होते हैं, जहां किसी भी मुसलमान को दफन करने से मना करना शरीयत के खिलाफ है। अंदर-बाहर के भेदभाव को इस्लाम के उलट बताया। कमेटियों को इस्लामी जाब्तों पर अमल करना चाहिए और दीनी मरकजों से रहनुमाई लेनी चाहिए।पूर्व पार्षद अब्दुल अजीज के संघर्ष को सराहालोहियानगर कब्रिस्तान के लिए नगर निगम से जमीन आवंटित कराने वाले रीठा मंडी के पूर्व पार्षद अब्दुल अजीज के संघर्ष को मुस्लिम समुदाय ने सराहा है। सोमवार को मुस्लिम कॉलोनी में बैठक की गई। कहा कि अब्दुल अजीज नगर निगम में प्रस्ताव लाए थे, तभी यह कब्रिस्तान एवं दस लाख रुपये मिले। तत्कालीन मेयर विनोद चमोली के सहयोग को भी सराह शुक्रिया अदा किया। इस दौरान हाजी नईम, जावेद कुरैशी, शाहिद, वसीम अहमद, राशिद, मोहम्मद फारूक, शमीम, अयूब अंसारी, परवेज, आजम और जमील अहमद आदि शामिल रहे।उलमा बोले, मिल बैठकर निकालें हलइमाम संगठन अध्यक्ष मुफ्ती रईस कासमी, जमीयत जिलाध्यक्ष मौलाना अब्दुल मन्नान ने कहा कि किसी भी कब्रिस्तान में मुर्दे को दफनाने से मना नहीं करना चाहिए। आबादी बढ़ने से कब्रिस्तान छोटे पड़ रहे हैं, संबंधित कमेटियां भरान कराए और लोगों को प्यार से समझाए। विवाद की स्थिति ना बने, सोशल मीडिया पर लड़ाई ना करें, उलमा, सामाजिक एवं सियासी जिम्मेदारों के बीच बैठकर हल निकालना चाहिए।
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