ग्रीष्मकालीन अवकाश में अधिवेशन कराए जाने के विरोध में मुखर हुए शिक्षक
विकासनगर में शिक्षकों ने राजकीय शिक्षक संघ के संविधान में हुए संशोधनों का विरोध किया है। उनका कहना है कि सरकार उनके साथ भेदभाव कर रही है। शिक्षकों का आरोप है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश में अधिवेशन आयोजित करना व्यावहारिक नहीं है। यदि सरकार शिक्षकों के अधिकारों की अनदेखी करती है, तो वे आंदोलन करेंगे।

विकासनगर। राजकीय शिक्षक संघ के संविधान में हुए संसोधन के कुछ बिंदुओं को लेकर शिक्षकों ने विरोध के स्वर मुखर कर दिए हैं। शिक्षकों का आरोप है कि सरकार और शासन साजिश के तहत उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रहे हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राजकीय शिक्षक संघ के कालसी ब्लॉक अध्यक्ष अनिल राणा ने शुक्रवार शाम को मीडिया से बात करते हुए संघ के संविधान संसोधन को शिक्षकों के साथ खुला भेदभाव करार दिया। उन्होंने कहा कि जब उत्तराखंड के अन्य कर्मचारी संगठनों को अधिवेशन के लिए यात्रा अवकाश समेत विशेष अवकाश दिया जाता है, तो प्रदेश के सबसे बड़े संगठन राजकीय शिक्षक संघ को इससे वंचित रखना सरकार की पक्षपातपूर्ण नीति को दर्शाता है।
कहा कि सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है, जिसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। सरकार यदि शिक्षकों के हितों और अधिकारों की अनदेखी करती है तो इसका व्यापक स्तर पर विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी सदस्यों को मताधिकार देना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन अधिवेशन को ग्रीष्मकालीन अवकाश में आयोजित करने का निर्णय पूरी तरह अव्यावहारिक है और अस्वीकार्य है, इससे शिक्षकों की भागीदारी प्रभावित होगी, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर पड़ेगी।राजकीय शिक्षक संघ के चकराता ब्लॉक मंत्री सोहन लाल ने कहा कि सरकार अक्सर शिक्षकों के साथ भेदभाव करती है। शिक्षण के इतर कई प्रशासनिक कार्य करने के बावजूद शिक्षकों के मौलिक अधिकारों का हनन किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षकों का शोषण कर रही है। ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान ही शिक्षकों को अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का समय मिलता है। ऐसे समय में अधिवेशन किया जाना व्यावहारिक नहीं है। अवकाश के दौरान शिक्षक खुद के पारिवारिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं, जिससे सभी शिक्षको का अधिवेशन में शामिल होना संभव नहीं होगा। संघ के कालसी ब्लॉक मंत्री आशीष डबराल ने भी इस संसोधन को अव्यावहारिक बताते हुए शासन से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि इस संबंध में जल्द ही उचित निर्णय नहीं लिया गया तो सभी शिक्षक आंदोलन का रास्ता अख्तियार करेंगे।
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