Shani Jayanti 2023 Rare Astrological Conjunction on May 16 शनि जयंती पर 500 साल बाद दुर्लभ ज्योतिषिय संयोग, Dehradun Hindi News - Hindustan
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शनि जयंती पर 500 साल बाद दुर्लभ ज्योतिषिय संयोग

16 मई को मनाई जाएगी शनि जयंती आर्थिक समृद्धि, मानसिक शांति लेकर आ रहे शनिदेव 500 साल बाद शश महापुरूष, केदार, बुद्धदित्य, सौभाग्य योग शनि अपनी ही कुंभ

Fri, 15 May 2026 04:59 PMNewswrap हिन्दुस्तान, देहरादून
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शनि जयंती पर 500 साल बाद दुर्लभ ज्योतिषिय संयोग

शनि जयंती इस साल 16 मई को मनाई जाएगी। शनि जयंती पर इस वर्ष एक बहुत ही दुर्लभ और अद्भुत ज्योतिषीय संयोग बन रहा है। यह योग 500 साल बाद बन रहा है। जिसे ज्योतिषी गोल्डन योग भी बता रहे हैं। 16 मई को शनि जयंती शनिवार के दिन पड़ रही है। जिससे शनेश्चरी अमावस्या का विशेष योग बन रहा है। शनि जयंती पर ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई की सुबह 5:11 बजे शुरू होकर 17 मई की देर रात 1:30 बजे समाप्त होगी। शनि देव की पूजा के लिए सबसे उत्तम समय 16 मई शाम 7:05 बजे से रात 8:23 बजे तक माना गया है। ज्योतिषाचार्य डॉ.सुशांतराज ने बताया कि शनि जयंती पर इस साल शश महापुरूष योग, केदार, बुद्धदित्य और सौभाग्य योग का एक साथ निर्माण हो रहा है। शनि अपनी ही कुंभ राशि में मार्गी अवस्था में विराजमान होकर ‘शश राजयोग’ बना रहे हैं। यह संयोग 500 साल बाद पहली बार इतनी प्रबल स्थिति में आ रहा है। जो आर्थिक समृद्धि, कॅरियर में तरक्की और मानसिक शांति लेकर आएगा। कुंभ राशि शनि की अपनी राशि होने के कारण इस राशि वालों पर विशेष कृपा रहेगी। डॉ.सुशांत राज के अनुसार शनि जयंती पर ‘ऊं शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करें, पीपल के पेड़ पर दीपक जलाकर जल चढ़ाएं और विधि पूर्वक पूजा करें。

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मलमास का आरंभ

17 मई से शुरू हो रहा मलमास

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मांगलिक कार्यों पर रोक

15 जून तक मुंडन, विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य पर रहेगी बंदिश

मलमास यानि अधिकमास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा। मलमास जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है हिंदू कैलेंडर में हर 3 साल में आने वाला एक अतिरिक्त महीना है, जो सौर और चंद्र वर्ष के बीच के अंतर को संतुलित करता है। चंद्र वर्ष 354 दिनों का और सौर वर्ष 365 दिनों का होता है। इस 11 दिनों के अंतर को पाटने के लिए हर 32 महीने, 16 दिन और 4 घड़ी के बाद एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है। यह अशुद्ध समय इसलिए भी माना जाता है क्योंकि इस दौरान सूर्य संक्रांति नहीं होती। इस दौरान शादी, विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कामों पर पूरी तरह से रोक लग रहती है। ज्योतिषाचार्य आचार्य डॉ.सुशांतराज ने बताया कि इस पूरे महीने भगवान विष्णु की पूजा, दान और श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करना लाभकारी माना जाता है।

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