Dehradun Municipal Corporation Issues in Waste Management and Community Participation बोले देहरादून- नगर निगम बनने के बाद भी नहीं बदली शहर की सूरत, Dehradun Hindi News - Hindustan
More

बोले देहरादून- नगर निगम बनने के बाद भी नहीं बदली शहर की सूरत

कॉमन इंट्रो देहरादून। देहरादून नगर पालिका की स्थापना 1867 में हुई। जिसके बाद नगर पालिका से नौ दिसंबर 1998 में अधिकारिक

Wed, 29 April 2026 11:49 AMNewswrap हिन्दुस्तान, देहरादून
share
बोले देहरादून- नगर निगम बनने के बाद भी नहीं बदली शहर की सूरत

कॉमन इंट्रोदेहरादून। देहरादून नगर पालिका की स्थापना 1867 में हुई। जिसके बाद नगर पालिका से नौ दिसंबर 1998 में अधिकारिक तौर पर नगर निगम के रूप में अपग्रेड किया गया। नगर निगम बनने के बाद भी शहर की सूरत नहीं बदल पाई है। वर्तमान में शहर में 287 कूड़ा वाहन घरों से कूड़ा उठाने का काम तो कर रहें हैं। लेकिन रोज घरों में नहीं पहुंच पा रही है। जो उत्तराखंड का सबसे बड़ा और पुराना नगर निगम बना। नगर पालिका से नगर निगम में बदला गया। साल 2018-2019 के आसपास नगर निगम के सीमा विस्तार के तहत शहर के बाहरी क्षेत्रों को जोड़कर नए 40 वार्ड बनाएं गए।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:मदनपुर मुख्य बाजार में कचरे का अंबार, आवागमन मुश्किल

जिनकी वर्तमान में संख्या 100 है। लेकिन सभी 100 वार्डों में सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। जगह जगह कचरे के ढेर बन गए हैं।मेन बॉडीआपके अपने हिन्दुस्तान अखबार के बोले देहरादून अभियान के तहत शहर की जनता से देहरादून नगर निगम की सुविधाओं के बारे में बातचीत की गई, तो आमजन ने बताया कि जब दून शहर नगर पालिका के अधीन था तो बेहतर सुख सुविधाएं उन्हें मिल रही थी। पहले ज्यादा आबादी नहीं थी, जैसे जैसे आबादी बढ़ रही है तो संसाधनों की कमी खल रही है। लोगों का कहना है कि दून को नगर निगम में शामिल करके 100 वार्ड तो बनाएं गए। लेकिन उन वार्डो में स्वच्छता प्रबंधन कार्यप्रणाली धीमी है। वहीं उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि इंदौर, भोपाल, चंड़ीगढ, नोएडा, चंदोसी आदि जगहों पर खुले में थूकने से भी लोग कतराते हैं। वहीं देहरादून में अब तक गीला और सूखा कचरा उठाने को लेकर कोई नियमावली नहीं हैं। कचरा गाड़ी सारे कूड़े को एक साथ करके गाड़ियों में डालने का काम करती है। नगर निगम के कर्मचारियों को अलग अलग कचरा उठाने के लिए ट्रेनिंग दी जाएं। इससे वह लोगों को इस नियम के बारे में बताने के साथ सहयोग भी प्राप्त करेंगे।मन की बातकूड़ादान हटाने का निर्णय गलतशहर के लोगों ने बताया कि नगर पालिका और नगर निगम बनने के समय से लेकर 2023 तक शहर में कूड़ादान हुआ करते थे। लेकिन 2023 से 2024 के बीच में शहर के चौक चौराहों से सौंदर्य की दृष्टि से कूड़ादान हटाया गया। कूड़ादान हटाने का मकसद स्वच्छता को बनाए रखना था। लेकिन जब कूड़ादान हटे तो वहां पर कचरा प्वाइंट बन गए हैं। लोग घरों से कचरा लाकर वहां पर डाल तो देते हैं। लेकिन उस कचरे की नियमित सफाई नहीं होती है। लोगों की मांग है कि शहर में पहले जैसे कूड़ादान की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे स्वच्छता भी बनी रहेगी।इंदौर की तर्ज पर हो दून का विकासदूनवासियों ने सुझाव देते हुए बताया कि शहर में भी इंदौर की तरह सफाई व्यवस्था को लेकर नियम कानून बनने चाहिए। दून में लोग कहीं भी कचरा डाल देते है या थूक देते हैं। जिस पर कोई चालान नहीं किया जाता है। शहर में एक या दो बार ही केवल नदियों की सफाई होती है। फिर भी नदियों में कचरा ही नजर आता है। शहर के ऐसे प्वाइंट जहां सबसे ज्यादा कचरा डंप किया जाता है। वहां पर कैमरे और निगम के सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए। जो लोगों को कचरा डालने से रोककर उनका चालान काटे। इससे लोगों में जागरूकता आएगी।नगर निगम और जनता करे भागीदारीशहर के लोगों की शिकायत है कि कूड़ा उठान गाड़ी रोज क्षेत्र में नहीं आती है। तो घरों में कचरा ज्यादा दिन तक संभाल के रखना संभव नहीं हो पाता है। ज्यादा समस्या तो उन्हें होती है, जिनका बड़ा परिवार होता है और अधिक मात्रा में कचरा जमा होता है। निगम की ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि सभी से शुल्क वसूले, जिसके बाद लोगों में जागरूकता आएगी तो वह खुले में कचरा न डालते हुए गाड़ी में कूड़ा डालेंगे। तो सफाई व्यवस्था भी प्रभावित नहीं होगी और कचरा प्वाइंट की संख्या में भी रोक लगेगी।सुझावों पर हो काम, कूड़े से मिलेगा निजातलोगों का कहना है कि शहर को स्वच्छ बनाने के लिए अभी भी कई पहलुओं पर काम करने की जरूरत है। शहर के लोग कूड़ा गाड़ी में कचरा डालते हैं। लेकिन वह कूड़ा अलग-अलग करने में अभी भी असमर्थ हैं। लोगों को जागरूक करने की बहुत जरूरत है। निगम को लोगों को सूखा और गीला कूड़ा निस्तारण के लिए प्रशिक्षण देना चाहिए। लोगों के मन में शहर की स्वच्छता के प्रति जागरूकता की और जिम्मेदारी भावना जगानी चाहिए। निगम को कूड़ा खुले में डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। लोगों का कहना है कि निगम प्रशासन को अपनी टीम का विस्तारिकरण और मजबूत करने के बारे में सोचना चाहिए।शिकायतें1 वार्ड बढ़ा लेकिन उस हिसाब से सफाई व्यवस्था नहीं बढ़ी है।2 वार्डो का परिसीमन अव्यवस्थित तरीके से किया गया है।3 समय के साथ कूड़ा निस्तारण की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ।4 कूड़ादान हटाने के बाद से सड़को और खाली प्लॉटों में कचरे का ढेर लग रहा है।5 कूड़ा उठान व्यवस्था इतनी खराब है कि लोगो ने नदी-नालियों को कचरे से भर दिया है।सुझाव1 वार्ड बढ़ाने के साथ ही सफाई व्यवस्था को भी बढ़ाया जाना चाहिए।2 नगर निगम को महिला डिप्टी मेयर की नियुक्ति करनी चाहिए।3 शहर में पहले की तरह कूड़ादान लगाया जाना चाहिए।4 हर घर से कूड़े का एक निश्चित शुल्क लिया जाना चाहिए।5 शहर की सफाई के लिए सूखा और गीला कचरा घरों से ही अलग किया जाना चाहिए।लोगों के बयाननगर पालिका परिषद से नगर निगम देहरादून बनने पर सुविधाओं पर काम किया गया। लोगों को सक्त निर्देशित किया गया है कि कूड़ा को गाड़ी में ही डाले। कूड़ा उठान के लिए शहर में गाड़ियां बढ़ा दी गई है। कूड़ा प्वाइंट को हटाया जा रहा है। शिकायत आती है कि कूड़ा का निस्तारण नहीं होता है निगम के अधिकारियों को भी निर्देश दिए है कि इस तरह की शिकायत न आए। खाली प्लॉट में लोगों को कचरा नहीं डालना चाहिए।खजान दास, कैबिनेट मंत्रीनगर निगम का काम सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाना है। मेरे मेयर बनने के समय देहरादून 384 रैंक पर था। 50 मीटर की मानव श्रृंखला बनाई गई। जिसमें एक लाख 20 हजार लोगों संकल्प के साथ खड़े हुए। लोगों ने जागरूकता निभाई। जिसके बाद देहरादून नगर निगम 68 रैंक पर आया। शहर वासियों को समझना चाहिए कि सड़क व नालियों में कूड़ा न डालें व स्वच्छता में भागीदारी निभाएं।सुनील उनियाल गामा, पूर्व मेयर नगर निगम देहरादूनमैं 12 साल इंदौर में रहा हूं। वहां ऐसी व्यवस्था है कि लोग गीला और सूखा कचरा अलग अलग कर के देते हैं। देहरादून में यह व्यवस्था नहीं है। यहां का नगर निगम मजबूती के साथ काम नहीं कर रहा है। इस वजह से यहां की जनता की भी सफाई व्यवस्था में कोई भागीदारी नहीं है। नगर निगम अगर मजबूती से काम करे तो भी देहरादून को स्वच्छता रैंकिंग में 15 से 20 नंबर पर आने में अभी दो से तीन साल का समय और लगेगा।डॉ राकेश सी डंगवाल, पूर्व ब्रांड अम्बेस्डर, स्वच्छ भारत मिशननगर पालिका से नगर निगम में शामिल होने के बाद से क्षेत्रफल बढ़ा है। लेकिन उस हिसाब से सफाई व्यवस्था नहीं बढ़ाई गई है। इस वजह से लोग खुले में कचरा डाल रहे हैं। मैं चंडीगढ़ गई थी वहां की सफाई व्यवस्था देहरादून से काफी अच्छी है। देहरादून को भी चंडीगढ़ की तरह सफाई व्यवस्था अपनाने की जरूरत है।इंदू नौडियाल, प्रान्तीय उपाध्यक्ष, जनवादी महिला समितिनगर निगम बनने के साथ ही देहरादून शहर का क्षेत्रफल तो बढ़ा लेकिन व्यवस्था नहीं बढ़ सकी है। नगर निगम को नागरिकों की भी भागीदारी लेनी चाहिए। नगर निगम को एक डिप्टी महिला मेयर की नियुक्ति करनी चाहिए। इससे मेयर को सहयोग मिलेगा और काम मजबूती से किया जाएगा।- अनूप नौटियाल, पर्यावरण विद्साल 1975 के मध्य देहरादून जब सिटी बोर्ड के अधीन था, उस समय देहरादून आज से ज्यादा स्वच्छ और सुंदर था। नगर निगम में आने के बाद देहरादून में कोई खास बदलाव देखने को नही मिला। साल 1939 में अंग्रेजो ने चंदोसी, उत्तर प्रदेश को स्वच्छता के लिए अवार्ड दिया था। ऐसी स्वच्छता देहरादून में भी हो तो बात बनेगी।जगदीश बाबला, पर्यावरणविद्हम लोग काफी समय से शहर की स्वच्छता के लिए अभियान चला रहे हैं। कई बार निगम के अधिकारियों से संवाद भी किया है। लेकिन कोई भी परिणाम नहीं निकला। देहरादून को भी अन्य शहरों से सीख लेनी चाहिए कि वह कैसे स्वच्छता रैंकिग में आगे है।जगमोहन मेहंदीरत्ता, पर्यावरणविद्हमारा क्षेत्र जब निगम में नहीं था तो पहले मैं अपने घर का कूड़ा शास्त्रीनगर के कूड़ेदान में डालता है। अब निगम में वार्ड आया तो कूड़ा गाड़ी भी महीने में आठ से दस दिन ही आती हे लेकिन पैसे पूरे लेती है। सुविधा देती नहीं है।राजीव खन्साली, सेवानिवृत्त, सहायक निदेशक बीएसएनएलसाल 2025 में हुआ परिसीमन गलत ढंग से हुआ है। किसी वार्ड की सीमा से लगते हुए क्षेत्र को दूर के किसी वार्ड में डाल दिया है। क्षेत्र के लोगों को पार्षद से काम करवाने के लिए दूर जाना पड़ता है। नगर पालिका से नगर निगम बनने पर सुविधाएं बढ़नी चाहिए थी मगर बढ़ी नहीं। हमारे क्षेत्र में न कूड़ा गाड़ी है न ही सफाई कर्मचारी आते हैं।दिनेश गुसाई, सेवानिवृत्त राज्य निगम कर्मचारी

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।