Police While Closing Case say No Magic Wand Mother Traces Son Killer Herself after one and Half Year 'जादू की छड़ी नहीं है’ कहकर पुलिस ने बंद किया केस, मां ने खुद ढूंढ निकाला बेटे का कातिल, Dehradun Hindi News - Hindustan
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'जादू की छड़ी नहीं है’ कहकर पुलिस ने बंद किया केस, मां ने खुद ढूंढ निकाला बेटे का कातिल

देहरादून में पुलिस ने रोती-बिलखती मां को यह कहकर केस बंद कर दिया कि उनके पास जादू की छड़ी नहीं है… उस मां ने खुद बेटे के कातिल को ढूंढ निकाला। एसएसपी ने मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं।

Mon, 6 April 2026 09:38 AMGaurav Kala देहरादून
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'जादू की छड़ी नहीं है’ कहकर पुलिस ने बंद किया केस, मां ने खुद ढूंढ निकाला बेटे का कातिल

मेरे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है, जो मैं इतनी जल्दी कार्रवाई करूं...यह शब्द उस पुलिसवाले के थे, जिस पर एक 18 वर्षीय युवक की सड़क हादसे में हुई मौत के मामले की जांच का जिम्मा था। बिना गहन जांच के पुलिस केस को बंद कर दिया गया। लेकिन, युवक की मां पेशे से ब्यूटीशियन ललिता चौधरी ने हार नहीं मानी और कातिल को ढूंढ़ निकाला।

मामला देहरादून में तकरीबन डेढ़ साल पहले का है। जिस केस में पुलिस ने हाथ खड़े कर एफआर लगा दी थी, उस केस में इस मां ने खुद सड़कों की खाक छानी, सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और बेटे को कुचलने वाले डंपर चालक को खोज निकाला। इस मां के इस अदम्य साहस को देखते हुए अब एसएसपी ने मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं।

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डंपर ने कुचलकर ले ली थी जान

सहस्रधारा रोड, विश्वनाथ एन्क्लेव निवासी ललिता चौधरी का 18 वर्षीय पुत्र क्षितिज चौधरी 16 फरवरी 2024 को प्रेमनगर क्षेत्र में सुविधा स्टोर के सामने पैदल जा रहा था। तभी एक अज्ञात डंपर ने उसे कुचल दिया और चालक फरार हो गया। उपचार के दौरान अगले दिन क्षितिज ने दम तोड़ दिया। बेटे की मौत के बाद पुलिस का रवैया और भी अमानवीय रहा। इधर, मामला सामने आने पर एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल का कहना है कि आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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पुलिस बोली-मेरे पास कोई जादू की छड़ी नहीं...

21 फरवरी को जब महिला ने संबंधित विवेचक से बात की तो जवाब मिला कि बिना नंबर के वाहन खोजना उनके बस की बात नहीं है और उनके पास कोई जादू की छड़ी नहीं है। अंतत पुलिस ने बिना डंपर चालक को खोजे मामले में एफआर दाखिल कर दी। अब दोबारा जांच से न्याय की उम्मीद जगी है।

डेढ़ साल तक संघर्ष के बाद खोजा आरोपी चालक

बेटे को खोने के गम और पुलिस की कार्यप्रणाली ने ललिता को अंदर तक झकझोर दिया। महीनों तक वह सड़कों पर भटकती रहीं और खुद सीसीटीवी फुटेज खंगाले। उन्होंने 10 संदिग्ध वाहनों के नंबर भी पुलिस को दिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। डेढ़ साल के संघर्ष के बाद आखिरकार मां की तपस्या रंग लाई और उसने खुद उस अज्ञात वाहन और उसके मालिक अंकित चौहान का पता लगा लिया। ललिता ने शनिवार को एसएसपी कार्यालय में साक्ष्यों के साथ प्रार्थना पत्र सौंपा। एसएसपी ने एफआर दरकिनार कर पुनः जांच के आदेश दिए।

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रोती-बिलखती मां थाने पहुंची तब हुआ मुकदमा

क्षितिज की मौत के बाद पुलिस ने परिजनों के बिना रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया गया। मजबूरी में मां ललिता फूल चुगने के दिन रोते-बिलखते थाने पहुंचीं। तब जाकर एफआईआर दर्ज की गई।

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