ग्रीन हर्बल की आड़ में बना रहे थे 'जिहादी' ड्रग, फैक्ट्री का एक दिन का किराया 50000; नए खुलासे
जिहादी ड्रग को लेकर नया खुलासा हुआ है। एनसीबी ने शनिवार रात देहरादून में ग्रीन हर्बल नामक फैक्ट्री में छापेमारी की और वहां से अत्याधुनिक मशीनें, रसायन, कैप्सूल और पैकेजिंग सामग्री जब्त की। मामले में नए खुलासे हुए हैं।

प्रतिबंधित ‘कैप्टागन’ यानी ‘जिहादी’ ड्रग को लेकर नया और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। देहरादून के सहसपुर स्थित ग्रीन हर्बल फैक्ट्री में यह ड्रग बन रही थी। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की जांच में सामने आया कि फैक्ट्री मालिक को इस खतरनाक ड्रग के उत्पादन के लिए रोजाना 50 हजार रुपये किराया मिलता था। शनिवार देर रात छापेमारी के दौरान फैक्ट्री से अत्याधुनिक मशीनें, रसायन, कैप्सूल और पैकेजिंग सामग्री बरामद हुई है।
कैप्टागन ड्रग तस्करी से जुड़े अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की जांच के तहत एनसीबी ने उत्तराखंड से एक भारतीय नागरिक को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई इस अत्यधिक उत्तेजक मादक पदार्थ की देश में पहली बार बरामदगी के बाद जारी जांच का हिस्सा है। एजेंसी ने इस ऑपरेशन को ‘रेजपिल’ नाम दिया है। इसे ‘जिहादी’ ड्रग के नाम से भी जाना जाता है।
227 किलोग्राम कैप्टागन जब्त
एनसीबी ने 'रेजपिल' नामक एक अभियान के तहत लगभग 227 किलोग्राम कैप्टागन (गोलियों और पाउडर के रूप में) जब्त करने के बाद अलब्रास अहमद नामक एक सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया था। एजेंसी अफसरों के अनुसार, आरोपी ने पूछताछ में बताया कि यह ड्रग देहरादून में सहसपुर स्थित स्थित ‘ग्रीन हर्बल’ नामक फैक्ट्री में बनाया गया था और इस काम में एक अन्य सीरियाई नागरिक भी उसके साथ शामिल था। इसके बाद एजेंसी ने शनिवार रात देहरादून स्थित फैक्ट्री पर छापेमारी की। इस दौरान यहां से अत्याधुनिक मशीनें, रसायन, कैप्सूल और पैकेजिंग सामग्री बरामद की गई।
फैक्ट्री का एक दिन का किराया 50 हजार
अधिकारियों ने बताया कि फैक्ट्री मालिक कैप्टागन बनाने के लिए अपने परिसर का उपयोग करने के एवज में 50 हजार रुपये प्रतिदिन किराया लेता था। जांच में यह भी सामने आया है कि वह पहले से ही दो अन्य ड्रग मामलों में जांच के दायरे में रहा है। एनसीबी अब इस पूरे नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और भारत में इसकी सप्लाई चेन की गहन जांच कर रही है।
नकली दवा से ड्रग लैब तक, ग्रीन हर्बल का ‘काला’ सच
सहसपुर स्थित ग्रीन हर्बल फैक्ट्री का नाम एक बार फिर बड़े आपराधिक खुलासे के केंद्र में है। नकली दवाओं के निर्माण से शुरू हुआ इस परिसर का काला कारोबार अब अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ नेटवर्क तक पहुंच चुका है। एनसीबी की हालिया कार्रवाई में सामने आया है कि इस फैक्ट्री को हाई-टेक ड्रग लैब में तब्दील कर कैप्टागन जैसे प्रतिबंधित नशीले पदार्थों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा था।
इसी फैक्ट्री पर बन चुकी नकली दवा
जांच में फैक्ट्री परिसर में मशीनरी, खतरनाक रसायन, कैप्सूल व पैकेजिंग का पूरा सेटअप मिलना, संगठित और बड़े पैमाने के ड्रग ऑपरेशन की ओर इशारा करता है। फैक्ट्री संचालन महज दो कमरों और टीन शेड से ढके हिस्से में किया जा रहा था,ताकि संदेह से बचा जा सके। दरअसल, इस फैक्ट्री का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। 6 दिसंबर 2024 को उत्तराखंड पुलिस ने यहां नकली दवाओं के निर्माण का भंडाफोड़ किया था। कार्रवाई के बाद फैक्ट्री सील कर दी गई थी, लेकिन बाद में कोर्ट के आदेश पर इसे दोबारा खोल दिया गया।
‘ऑपरेशन रेजपिल’
‘ऑपरेशन रेजपिल’ ने यह चौंकाने वाला सच उजागर किया कि फैक्ट्री मालिक ने पुराने अवैध नेटवर्क को खत्म करने के बजाय उसे और विस्तार दे दिया। अब ये परिसर साधारण नकली दवाओं के बजाय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित व अत्यधिक खतरनाक ड्रग्स के उत्पादन का अड्डा बन गया था। मामले का खुलासा होने के बाद एनसीबी ने फिर परिसर को सील कर दिया है और पूरे नेटवर्क की गहन जांच शुरू कर दी है।
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