Dehradun Urban Cooperative Bank big Scam RBI Freezes bank for 6 Months Forensic Audit Ordered दून अर्बन कोऑपरेटिव बैंक को RBI ने 6 महीने के लिए सीज किया, फॉरेंसिक ऑडिट से सामने आएगा घपला, Dehradun Hindi News - Hindustan
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दून अर्बन कोऑपरेटिव बैंक को RBI ने 6 महीने के लिए सीज किया, फॉरेंसिक ऑडिट से सामने आएगा घपला

दून अर्बन को ऑपरेटिव बैंक में वित्तीय अनिमितताएं सामने आने के बाद आरबीआई ने बैंक को 6 महीने के लिए सीज कर दिया है। साथ ही फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश दिए हैं।

Thu, 19 Feb 2026 09:03 AMGaurav Kala देहरादून
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दून अर्बन कोऑपरेटिव बैंक को RBI ने 6 महीने के लिए सीज किया, फॉरेंसिक ऑडिट से सामने आएगा घपला

देहरादून अर्बन कोऑपरेटिव बैंक (डीयूसीबी) में करोड़ों के कथित घपले के खुलासे को फॉरेंसिक ऑडिट होगा। भारतीय रिजर्व बैंक और अर्बन कोऑपरेटिव बैंक ने बुधवार को यह फैसला लिया। दून अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के लेन-देन पर आरबीआई ने रोक लगा दी है। इससे करीब नौ हजार ग्राहकों के 124 करोड़ रुपये फंसने के दावे किए गए। इसे लेकर खाताधारकों के हंगामा करने के बाद बैंक का फॉरेंसिक ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया। यूसीबी के सचिव बलबीर सिंह ने बताया कि यह जांच साधारण ऑडिट से अलग होगी।

फॉरेंसिक ऑडिट में आरबीआई से चयनित सीए या अन्य सक्षम अधिकारी जांच करेंगे। ऑडिट करने वाली टीम बैंक के 2014 से 2025 तक के लेनदेन समेत कई बिंदुओं पर जांच करेगी। इसमें घोटाला या हेराफेरी (मनी ट्रेल) की आशंका शामिल है। इसमें जांच की जाएगी कि बैंक में पैसा कहां से आया और कहां गया। लोन लेने वाले लोगों ने कौन से दस्तावेज जमा कराए थे। वे दस्तावेज असली थे या नकली। बैंक में पब्लिक फंड का कस्टोडियन, बैंक मैनेजर होता है। बैंक मैनेजर से विस्तृत जानकारी और दस्तावेज लिए जाएंगे। जांच की जाएगी कि बैंक मैनेजर ने किन लोगों को लोन दिया और गड़बड़ी रोकने के लिए क्या जिम्मेदारी निभाई।

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शादी-इलाज को भी अपना पैसा नहीं निकल रहा

दून अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक में नौ हजार उपभोक्ताओं के साथ ही शहर के नामी स्कूल, नगर निगम के ए ग्रेड के ठेकेदारों, बिल्डरों की रकम फंस गई है। सिस्टम की चूक से नौ हजार खाताधारकों को आर्थिक चोट लगी है। शासन-प्रशासन, सहकारिकता विभाग और अफसरों ने संजीदगी नहीं दिखाई। नतीजा यह है कि शेयर होल्डर को भतीजे की शादी के लिए बैंक से दो लाख रुपये निकालने थे लेकिन वह नहीं निकाल पा रहे हैं। ठेकेदारों की पेमेंट फंसने से शहर के विकास कार्यों पर असर पड़ सकता है। नगर निगम के ठेकेदार 30 करोड़ रुपये बैंक में फंसने से सरकारी काम को समय से पूरा करने को लेकर टेंशन में है। दून अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक में 2014 से घपलेबाजी उजागर हुई थी।

शासन-प्रशासन से शिकायतें

इस संबंध में शासन-प्रशासन को शिकायतें की गईं लेकिन जांच एजेंसियों ने संज्ञान नहीं लिया। शेयर होल्डर व अन्य लोगों ने इसे लेकर आरबीआई व शासन-प्रशासन तक में शिकायत की लेकिन पिछले 10 सालों में लगातार टालमटोल की गई। समय से मामले की जांच नहीं होने से खाताधारकों को समस्या उठानी पड़ रही है। शादी ब्याह, इलाज आदि के लिए लोगों को रुपयों की जरूरत है लेकिन बैंक पर ताला है।

आरोप : चेहेतों में नौकरियों की बंदरबाट

शेयर होल्डर संजीव वर्मा ने बताया कि रिश्तेदारों व चेहेतों को नौकरी पर रखकर बैंक में बंदरबाट की गई। आरोप है कि बोर्ड ने पदाधिकारी व नौकरी रखने में मनमानी की। उन्होंने कहा कि बैंक मैनेजर, जूनियर मैनेजर आदि पदों पर रिश्तेदारों की भर्ती की गई। इस वजह से बैंक में मनमुताबिक कार्य किए गए और अपने रिश्तेदारों और चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए खाताधारकों का आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। सहकारिकता एक्ट के तहत बैंक का पंजीकरण हुआ था। इसके तहत सेवायोजना विभाग से प्रक्रिया के तहत नौकरी दी जानी थी, लेकिन इसमें मनमानी की गई। शेयर होल्डर ने कहा कि कहा कि दून अर्बन को-कोऑपरेटिव बैंक को किसी अन्य बैंक में मर्ज किया जाए।

आरबीआई के ऑडिट में क्यों नहीं पकड़ा गया घपला

इस मामले में आरबीआई के कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरबीआई की ओर से बैंकों में ऑडिट कराने का प्रावधान है, ऐसे में यह घपला पकड़ में नहीं आया। शेयर होल्डर आरबीआई से जानकारी मांग रहे थे लेकिन वह नहीं मिली। शासन में भी शिकायतें की गईं लेकिन मामले में कुछ नहीं हुआ।

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