देहरादून के धौलास में 20 एकड़ कृषि भूमि की बिक्री की जांच शुरू, CM बोले- गड़बड़ी मिली तो कर लेंगे जब्त
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि इस जमीन को साल 2004 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल में आवंटित किया गया था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि इस आवंटन के पीछे 'मुस्लिम यूनिवर्सिटी' बनाने का इरादा था।

उत्तराखंड सरकार ने देहरादून के धौलास गांव में 'शेखुल हिंद एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट' को आवंटित की गई 20 एकड़ जमीन की बिक्री में कथित अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान किसी भी तरह के नियम उल्लंघन का होना पाया गया, तो राज्य सरकार इस जमीन को वापस अपने कब्जे में ले लेगी। अधिकारियों ने बताया कि यह जमीन दो दशक पहले शिक्षा के मकसद से ट्रस्ट को आवंटित की गई थी।
देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस मामले की जांच के लिए एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) केके मिश्रा के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम का गठन किया है, जिसमें राजस्व, वन विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल हैं। उधर जिम्मेदारी मिलते ही इस टीम ने धौलास गांव के विकास नगर इलाके में कृषि भूमि की पैमाइश और निरीक्षण भी शुरू कर दिया है।
हमेशा खेती का स्टेटस रखने की शर्त पर दी थी जमीन
मामले की जानकारी देते हुए टीम के प्रमुख मिश्रा ने कहा, 'यह जमीन शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए दी गई थी और हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि बिक्री के दौरान आवंटन की शर्तों का पालन किया गया था या नहीं और अभी इस जमीन की स्थिति क्या है।' ADM ने बताया कि ट्रस्ट को जमीन बेचने की अनुमति केवल इस शर्त पर दी गई थी कि इसका स्टेटस हमेशा खेती वाला रहेगा और इसे खेती के अलावा किसी और काम के लिए नहीं बेचा जाएगा।
15 लोगों को बेच दी थी 20 एकड़ जमीन
आगे उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि ट्रस्ट ने लगभग 20 एकड़ खेती की जमीन 15 लोगों को बड़े भूखंडों के रूप में बेची थी। इन खरीदारों ने बाद में जमीन को छोटे-छोटे प्लॉट में बांटकर 70-80 अन्य लोगों को बेच दिया। अब इस मामले में जिला प्रशासन ने विस्तृत माप रिपोर्ट मिलने के बाद जमींदारी उन्मूलन कानून के तहत कानूनी कार्रवाई करने की योजना बनाई है।
MDDA ने तोड़ी बाउंड्री वॉल और सड़कें
उधर मसूरी-देहरादून डेवलपमेंट अथॉरिटी (MDDA) ने इस जमीन पर बनाई गई बाउंड्री वॉल और अंदर की सड़कों को यह कहते हुए पहले ही तोड़ दिया है, कि यहां नक्शे को पास कराए बिना प्लॉटिंग की जा रही थी। साथ ही MDDA ने इलाके में नोटिस बोर्ड भी लगाए हैं, जिनमें लोगों को गैर-कानूनी प्लॉट में निवेश ना करने की चेतावनी दी गई है और उन्हें कोई भी खरीदारी करने से पहले अथॉरिटी से विवरण को सत्यापित कराने की सलाह दी गई है।
धामी बोले- मुस्लिम विवि बनाना था उद्देश्य
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि इस जमीन को साल 2004 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल में आवंटित किया गया था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि इस आवंटन के पीछे 'मुस्लिम यूनिवर्सिटी' बनाने का इरादा था।
सीएम बोले- सबूत मांगने वाले सहसपुर में देखें
इस बारे में सोशल मीडिया पर शेयर की एक पोस्ट में धामी ने कहा, 'धौलास की जमीन ऐसे व्यक्ति को दी गई, जो लगातार ऐसे संस्थान बनाता है, जिनके कारण राष्ट्र के अंदर विघटनकारी ताकतें पैदा होती हैं। ऐसे लोगों को प्रशिक्षण मिलता है, जो अव्यवस्थाओं को आगे बढ़ाते हैं। देवभूमि की एक इंच जमीन भी किसी को नहीं दी जाएगी, इसकी जांच के आदेश कर दिए गए हैं।' आगे उन्होंने कहा, 'सबूत मांगने वाले सहसपुर में ही सबूत देख लें। इन्होंने सहसपुर में ही 2022 में मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने की बात कही थी। देवभूमि के लोग ऐसे लोगों को एक बार बाहर का रास्ता दिखा चुके हैं, ये लोग फिर से उसी रास्ते पर हैं।'
उधर भाजपा विधायक विनोद चमोली ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की और इस आवंटन को रद्द करने की मांग की। उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) की सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा कि प्रस्तावित संस्थान की IMA से दूरी महज 10 किलोमीटर है, जो सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील हो सकता है।
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