Ban on summer Paddy crop in udham singh nagar Uttarakhand Government Take Strict Decision फरवरी से अप्रैल धान की खेती नहीं कर पाएंगे? उत्तराखंड सरकार क्यों ले रही यह सख्त फैसला, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
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फरवरी से अप्रैल धान की खेती नहीं कर पाएंगे? उत्तराखंड सरकार क्यों ले रही यह सख्त फैसला

उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में 1 फरवरी से 30 अप्रैल तक गर्मियों से थोड़ा पहले की जाने वाली धान की खेती पर रोक लगाने का फैसला लिया है। इस तरह के कदम आगामी वर्षों में हरिद्वार और नैनीताल जैसे जिलों में भी लिए जा सकते हैं।

Tue, 13 Jan 2026 11:15 AMGaurav Kala लाइव हिन्दुस्तान
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फरवरी से अप्रैल धान की खेती नहीं कर पाएंगे? उत्तराखंड सरकार क्यों ले रही यह सख्त फैसला

उत्तराखंड के ‘फूड बाउल’ कहे जाने वाले ऊधमसिंह नगर जिले में इस बार गर्मियों से थोड़ा पहले की जाने वाली धान की खेती पर रोक लगाई गई है। जिला प्रशासन ने 1 फरवरी से 30 अप्रैल तक धान की बुआई, नर्सरी तैयार करने और रोपाई पर रोक लगाने के आदेश जारी किए। यह जिले में पहली बार भूजल से सीधे जुड़ा सख्त प्रतिबंध माना जा रहा है।

जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने बताया कि यह प्रतिबंध करीब 15 हजार किसानों को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है और लगभग 150 करोड़ रुपये की उपज दांव पर लगने की आशंका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वर्ष किसी भी तरह की छूट नहीं दी जाएगी। साथ ही, आने वाले समय में यह पाबंदी तराई क्षेत्र के अन्य हिस्सों नैनीताल और हरिद्वार के कुछ क्षेत्रों में भी लागू की जा सकती है।

बता दें कि यह धान की खेती फरवरी से अप्रैल/मई के बीच शुरू होती है। इसमें पहले नर्सरी तैयार की जाती है, फिर रोपाई की जाती है। इस दौरान बारिश नहीं होती, इसलिए खेती पूरी तरह भूजल और सिंचाई पर निर्भर रहती है।

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हरियाणा और पंजाब में भी इस तरह की रोक

गौरतलब है कि वर्ष 2024 में भी इस तरह की अस्थायी रोक लगाई गई थी, लेकिन किसानों से बातचीत के बाद उसे आंशिक रूप से हटा लिया गया था। हालांकि, इस बार प्रशासन ने साफ कर दिया है कि निर्णय अंतिम है। फिलहाल राज्य के किसी अन्य जिले में धान पर इस तरह की स्पष्ट और पूर्ण पाबंदी लागू नहीं है। तुलना करें तो हरियाणा में भूजल संरक्षण कानून के तहत समय से पहले धान की बुआई पर कानूनी रोक है, जबकि पंजाब में कैलेंडर आधारित प्रतिबंध लागू किए जाते हैं।

15 हजार से अधिक किसान प्रभावित

प्रशासन के अनुसार, ऊधमसिंह नगर जिले में आमतौर पर लगभग 22 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गर्मी के धान की खेती होती है। यहां अधिकांश किसान एक से दो हेक्टेयर की छोटी जोत पर खेती करते हैं। इस फैसले से ऊधमसिंह नगर जिले के 15 हजार से ज्यादा किसान प्रभावित होंगे।

एक्सपर्ट्स से जानिए फैसले के पीछे की वजह

अधिकारियों और विशेषज्ञों ने इस कदम को जरूरी बताया है। बीते एक दशक में जिले में भूजल स्तर करीब 70 फीट तक गिर चुका है। जसपुर और काशीपुर जैसे विकासखंडों को पहले ही ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि तराई क्षेत्र में भूजल के अंधाधुंध दोहन के लिए धान की खेती को सबसे बड़ा कारण माना जाता है।

जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने कहा, “यह फैसला कृषि वैज्ञानिकों और किसान संगठनों से विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। हमारी प्राथमिकता दीर्घकालिक जल सुरक्षा है। हम किसानों से सहयोग की अपील करते हैं।”

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