खुद को मरीज बताकर दूसरे के दिल की सर्जरी करवा दी, दून अस्पताल में 'आयुष्मान' फर्जीवाड़ा
उत्तराखंड के दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयुष्मान कार्ड से इलाज में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। आयुष्मान कार्ड धारक ने खुद को मरीज बताकर अपने परिचित के दिल की सर्जरी करवा दी। यह मामला तब खुला जब मरीज के डिस्चार्ज के दौरान दस्तावेजों की जांच की गई।

उत्तराखंड के दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयुष्मान कार्ड से इलाज में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। आयुष्मान कार्ड धारक ने खुद को मरीज बताकर अपने परिचित के दिल की सर्जरी करवा दी। यह मामला तब खुला जब मरीज के डिस्चार्ज के दौरान दस्तावेजों की जांच की गई। मरीज के बेड का फोटो मांगने पर इस फर्जीवाड़े की पोल खुली।
इस पूरे मामले में दून अस्पताल प्रबंधन भी बेहद लापरवाह रहा और ऑपरेशन कर स्टेंट तक डाल दिए गए। मामला सामने आने पर आरोपी ने मरीज को अस्पताल से भगा दिया। शनिवार दोपहर को दून अस्पताल में आयुष्मान सेवा का लाभ पात्र के बजाय दूसरे को मिलने का मामला पकड़ा गया। आरोप है कि देहरादून निवासी मंजीत ने परिचित विक्की पुत्र रवि कुमार निवासी ओल्ड हस्तिनापुर मवाना मेरठ का नियम के खिलाफ हृदय रोग विभाग में ऑपरेशन करा दिया और तीन स्टेंट डलवा दिए। आयुष्मान अनुभाग ने एक दिन पहले गत शुक्रवार को जब मरीज के बेड का फोटो मांगा तो वह वहां से भाग गया।
आरोप है कि ऑपरेशन वाले मरीज विक्की को भी भगा दिया गया। मरीज 26 मई को दून अस्पताल में भर्ती हुआ था। 28 मई को उसकी सर्जरी हुई और 30 तारीख को डिस्चार्ज होना था। आयुष्मान सोसायटी में क्लेम निदेशक डॉक्टर सरोज नैथानी ने इस मामले को संदिग्ध बताया और तत्काल उसका कार्ड ब्लॉक कर दिया। इस मामले में मुकदमा दर्ज कराए जाने की प्रक्रिया चल रही थी।
आसानी से मरीज बदल गया, आपॅरेशन भी हो गया
दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयुष्मान इलाज में गड़बड़ी व दूसरे का ऑपरेशन होने ने सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि मरीज भर्ती होने और दस्तावेजों की प्रथम चरण में ही जांच क्यों नहीं की गई। आसानी से मरीज बदल दिया गया और आपॅरेशन तक हो गया लेकिन किसी जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। इसकी पोल तब खुली जब बेड साइड फोटो मंगवाने के लिए कहा गया। आरोप है कि फोटो से पोल खोलने की डर से मरीज को भगवा दिया गया।
कभी साला बताया तो कभी जानने वाला
अस्पताल में चले हंगामा के बीच मनजीत ने विक्की को कभी अपना साला बता रहा था, तो कभी जानने वाला बताया। लेकिन बताया जा रहा है कि लंबी साठगांठ के चलते यह फर्जीवाड़ा किया गया। कुछ अस्पताल में कर्मचारियों की मिलीभगत के आरोप भी लग रहे हैं।
देर शाम डिप्टी एमएस ने भिजवाई तहरीर
करीब चार घंटे चले हंगामे के बाद डिप्टी एमएस डॉक्टर एनएस बिष्ट की ओर से आरोपी मनजीत के खिलाफ कोतवाली पुलिस को तहरीर दी गई है। मंजीत को डॉक्टरों ने गफलत में घर भेज दिया। आरोपी को सीने में दर्द की शिकायत पर इमरजेंसी में दाखिल किया था।
मामला रफा-दफा करने की हुई कोशिश
तीन स्टेंट का करीब डेढ़ लाख का इलाज विक्की का मनजीत ने अपने कार्ड पर कराया है। उन्होंने डेढ़ लाख देने की पेशकश भी की। अस्पताल प्रबंधन भी शुरुआत में यही चाहता था, लेकिन आयुष्मान कमेटी द्वारा सख्ती दिखाने और मीडिया तक यह बात पहुंचाने के बाद मुकदमा दर्ज कराए जाने की प्रक्रिया चल रही थी। प्रभारी एमएस डॉक्टर नितिन शर्मा ने बताया कि इस मामले में तमाम पहलुओं को देखा जा रहा है।
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