सियासत नहीं धामी ने जनभावनाओं को देखकर लिया फैसला, अंकिता केस में CBI जांच को मंजूरी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है। इस फैसले से जहाँ विपक्ष का बड़ा मुद्दा छिन गया है, वहीं भाजपा संगठन ने भी राहत की सांस ली है।

अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच का फैसला कर मुख्यमंत्री ने जहां जनभावनाओं को प्राथमिकता देने की अपनी नीति-रीति को एक बार फिर से साबित किया। वहीं दूसरी तरफ, अपने इस सधे हुए फैसले से धामी राजनीतिक मोर्चे पर विपक्ष के हाथ एक बड़ा मुद्दा छीनने में भी कामयाब रहे। हालिया कुछ महीनों के भीतर धामी का यह तीसरा फैसला है जब उन्होंने जनभावनाओं को ऊपर रखते हुए सीबीआई जांच की सिफारिशें की है।
इससे पहले एलयूसीसी घेाटाले की जांच की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। उसके बाद यूकेएसएसएसपी पेपर लीक मामले में युवाओं की भावनाओं के अनुसार धामी ने सीबीआई जांच को मंजूरी दे दी थी। युवाओं के मामले में तो धामी खुद ही परेड ग्राउंड स्थित धरना स्थल पहुंच गए थे। उनसे पहले केवल एनडी तिवारी और हरीश रावत ही ऐसे मुख्यमंत्री रहे, जो किसी आंदोलन में खुद धरना स्थल पर पहुंचे। अंकिता हत्याकांड में हालांकि सरकार पहले दिन से काफी गंभीरता से आगे बढ़ रही थी। और 30 मई 2025 को तीनों आरोपियों केा उम्र की सजा भी हो गई। लेकिन, आरोपियों के रिसार्ट पर बुलडोजर चलाए जाने, कथित वीआईपी का नाम बार बार आना सरकार और भाजपा संगठन के लिए गले की फांस बना ही रहा। हाल में इस मामले के दोबारा तूल पकड़ने पर भी शुरूआती दौर में सरकार और भाजपा एसआईटी की जांच पर ही अडिग थी।
मुख्यमंत्री पहले भी ले चुके हैं कई महत्वपूर्ण फैसले
जुलाई 2021 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से अब तक धामी ने जनभावनाओं से जुड़े मुद्दों पर कड़ा फैसला करने गुरेज नहीं किया। वर्ष 2022 में सरकारी भर्तियों में नकल माफिया की सक्रियता बड़ा मुद्दा बनने जा रहा था। युवा सड़कों पर आते इससे पहले धामी ने कदम उठाते हुए विशेष कार्य बल (एसटीएफ) को कार्रवाई सौंपी। इसके तुरंत बाद नकल विरोधी कानून लागू किया गया। इसके बाद भू-कानून आंदोलन का रूप लेने लगा था। इसे काबू करने के लिए पहले बाहर से यहां आकर जमीन खरीदने वालों पर शिकंजा कसा गया। सरकारी सेवाओं में राज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण, हरिद्वार नगर निगम जमीन घोटाला, मनसा देवी मंदिर भगदड़ और केदारनाथ में हेलीकॉप्टर क्रैश मामले में इससे पहले विपक्ष मुद्दा बनाता, धामी ने पहले ही एक्शन मोड में आ गए।
प्रदेश में उपजे हालात से असहज थी भाजपा
बता दें कि विधिक पहलुओं का अध्ययन के बाद जैसे ही आज शाम अफसरों ने उन्हें रिपोर्ट दी, धामी ने क्षण भर की देर किए बिना ही इसकी सिफारिश कर दी। भाजपा संगठन ने भी धामी के इस फैसले से राहत की सांस ली है। दरअसल, पार्टी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला के कॉल रिकार्ड वायरल होने के बाद उपजे हालात से भाजपा संगठन काफी असहज था। प्रदेश एक बड़े नेता का नाम हत्याकांड में वीआईपी के रूप में प्रचारित होने से भाजपा की मुश्किलों में और इजाफा हो गया।
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