एंजेल चकमा को चाकू घोंपने के बाद जश्न! हत्यारों ने शराब खरीदी, घर भी नहीं लौटे
Angel chakma Killing: पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि एंजेल चकमा को चाकू घोंपने के बाद हत्यारों ने जश्न मनाया। शराब खरीदी और पार्टी की। कुछ कई दिनों तक घर भी नहीं लौटे।

Angel chakma Killing: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में त्रिपुरा के युवक एंजेल चकमा की चाकू मारकर हत्या के मामले में सनसनीखेज खुलासे सामने आए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से भागे नहीं, बल्कि शराब खरीदी और चाय की दुकान पर जश्न मनाया। इनमें से कुछ आरोपी कई दिनों तक अपने घर नहीं लौटे। उधर, मामले में पुलिस का यह भी दावा है कि यह नस्लीय हमला नहीं था, बल्कि दो गुटों में आपसी विवाद था, जिसने हिंसक रूप ले लिया। पुलिस की कहानी के अनुसार, आरोपियों में नेपाली, मणिपुरी और बोक्सा जनजाति के युवक शामिल थे।
पुलिस के अनुसार, 9 दिसंबर को सेलाकुई बाजार में छह युवकों का एक समूह शराब की दुकान के पास खड़ा था। इसी दौरान उनकी मुलाकात त्रिपुरा के युवक एंजेल चकमा और उसके भाई माइकल चकमा से हुई। किसी बात को लेकर हुई मामूली कहासुनी देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई।
ठेली से उठाया चाकू, एंजेल पर हमला
जांच में सामने आया है कि आरोपियों में शामिल यज्ञराज अवस्थी ने पास की फल-ठेली से चाकू उठाकर एंजेल चकमा पर वार कर दिया। हमले में एंजेल गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि उसका भाई माइकल भी बुरी तरह जख्मी हुआ।

हमले के बाद शराब और पार्टी
पुलिस का कहना है कि हमले के बाद आरोपी सीधे शराब की दुकान पर लौटे, शराब खरीदी और अविनाश नेगी की चाय की दुकान पर जाकर पार्टी की। इस दौरान गंभीर रूप से घायल एंजेल को उसका भाई अस्पताल पहुंचाने के लिए संघर्ष करता रहा। एंजल चकमा को सिर और रीढ़ की गंभीर चोटें आई थीं। कई दिनों तक अस्पताल में इलाज चलने के बाद 26 दिसंबर को उसकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने मामले में हत्या की धाराएं जोड़ दीं।
नस्लीय टिप्पणी के आरोप, पुलिस ने किया इनकार
मृतक के भाई माइकल ने आरोप लगाया कि हमले से पहले आरोपियों ने नस्लीय गालियां दीं। माइकल ने कहा कि उन्हें चीनी, चिंकी और अन्य नस्लीय गालियां दी गई। हालांकि, देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने कहा कि प्रथम दृष्टया नस्लीय हिंसा के ठोस सबूत नहीं मिले हैं और यह मामला अचानक हुई कहासुनी का परिणाम प्रतीत होता है।
घर नहीं लौटे आरोपी, परिजन अनजान
पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद कुछ आरोपी कई दिनों तक घर नहीं लौटे, जिससे उनके परिजनों को भी घटना की जानकारी नहीं थी। पुलिस दबिश के बाद ही परिजनों को पूरे मामले का पता चला। घटना को लेकर उत्तराखंड समेत पूर्वोत्तर राज्यों में आक्रोश है। छात्र संगठनों ने इसे हेट क्राइम बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है।
गिरफ्तारी, नाबालिग सुधार गृह भेजे गए
पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि 15 और 17 साल के दो नाबालिगों को सुधार गृह भेजा गया है। मुख्य आरोपी यज्ञराज अवस्थी फरार है, जिसे दबोचने पुलिस नेपाल पहुंच चुकी है।उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस और एसटीएफ की टीमें दबिश दे रही हैं।
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