जनगणना में आप खुद भी भर सकते हैं अपनी और परिवार की डिटेल, 7 से 21 मई तक मिलेगा मौका
जनगणना-2027 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि वे इस महत्वपूर्ण काम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम करें। 07 मई, 2026 से 21 मई, 2026 के बीच उत्तर प्रदेश में लोग स्व-गणना का फार्म भर सकेंगे।

Census 2027 : उत्तर प्रदेश में जनगणना की तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं। इस बीच प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी मण्डलायुक्तों और जिलाधिकारियों के साथ साप्ताहिक समीक्षा बैठक में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। जनगणना-2027 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि वे इस महत्वपूर्ण काम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम करें। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण, जिसमें हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेन्सस शामिल है, 22 मई से 20 जून 2026 के मध्य होगा, इससे पहले एनुमरेटर्स और सुपरवाइजर्स का प्रशिक्षण हर हाल में पूरा कराया जाए। प्रशिक्षण में अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। हाउस लिस्टिंग ब्लॉक क्रिएशन का शेष काम अगले दो दिनों में पूरा किया जाए। जनगणना संचालन की प्रभावी निगरानी के लिए सीएमएमएस पोर्टल का उपयोग किया जाए। मुख्य सचिव ने बताया कि स्व-गणना प्रक्रिया के तहत नागरिक स्वयं अपने परिवार का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगों को ऑनलाइन स्व-गणना प्रपत्र भरने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि डेटा की शुद्धता भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि नोडल संस्था उपाम के नेतृत्व में तैयार विस्तृत आउटरीच प्लान को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। इसके तहत छोटे वीडियो और पिक्चर कोलाज तैयार कर सोशल मीडिया पर नियमित रूप से साझा किए जाएं, ताकि जन-जागरूकता बढ़े, फील्ड गतिविधियों को प्रमुखता मिले और पूरे प्रदेश में बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। उन्होंने जिला और मंडल स्तर पर व्हाट्सएप समूह बनाकर समस्याओं के त्वरित समाधान और संसाधनों के कुशल प्रबंधन पर भी जोर दिया। साथ ही प्रशिक्षण, फील्ड विजिट और बैठकों जैसी गतिविधियों को भी सार्वजनिक रूप से साझा करने के साथ-साथ #censusup, #census2027 और जिला-विशेष हैशटैग का उपयोग किया जाए।
उन्होंने जिला जनगणना सेल को डीआईओ-एनआईसी और डीईएसटीओ के साथ मिलकर जिला कंट्रोल रूम के रूप में सक्रिय करने के निर्देश दिए। शहरी क्षेत्रों में सेल्फ एनुमरेशन को बढ़ावा देने पर विशेष बल देते हुए उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में जनभागीदारी कम है, वहां जिला स्तर पर हेल्पलाइन स्थापित कर लोगों को जोड़ा जाए। सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे डीसीओ प्रतिनिधि के साथ समन्वय कर अपने क्षेत्र में चार्जेस की संख्या और उनसे जुड़ी समस्याओं की समीक्षा करें तथा उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित करें।
बैठक में निदेशक, जनगणना संचालन, शीतल वर्मा ने बताया कि 07 मई, 2026 से 21 मई, 2026 के बीच उत्तर प्रदेश में लोग स्व-गणना (Self Enumeration) का फार्म भर सकेंगे। एचएलबीसी पोर्टल के अनुसार 31 जिलों में मैपिंग कार्य शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है, जबकि 33 जिलों में यह काम 98 से 99.99 प्रतिशत तक पूरा हो गया है। 7 जिलों में प्रगति 90 से 98 प्रतिशत के बीच है, जबकि 2 जिलों में यह 80 से 90 प्रतिशत के बीच और 2 जिलों में 80 प्रतिशत से कम दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि नेशनल ट्रेनर्स, मास्टर ट्रेनर्स और फील्ड ट्रेनर्स का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। वर्तमान में लगभग 5.27 लाख एनुमरेटर्स और सुपरवाइजर्स का प्रशिक्षण 15 अप्रैल से 5 मई तक संचालित किया जा रहा है, जिसे समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए गए। फेज-1 के अंतर्गत एनुमरेटर्स और सुपरवाइजर्स की नियुक्ति, उनका प्रशिक्षण तथा प्रशिक्षण स्थलों, बैचों और लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी एसडीएम को दी गई है। इसके साथ ही मानचित्र पर एनुमरेशन ब्लॉक्स, जिन्हें हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स कहा जाता है, का सृजन भी किया जा रहा है। सेल्फ एनुमरेशन के लिए रणनीति तैयार करने का कार्य सीडीओ और जॉइंट मजिस्ट्रेट्स के समन्वय से किया जा रहा है।
बैठक में मुख्य सचिव ने ये निर्देश भी दिए
बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि गो-आश्रय स्थलों के सुदृढ़ संचालन और वहां भूसा उपलब्धता सुनिश्चित करने को लेकर भी आदेश दिए। इसके साथ ही कहा कि क्रय केंद्रों पर गेहूं विक्रय के लिए आने वाले किसानों को फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण कराने के लिए किसी भी प्रकार का दबाव न बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण न कराने वाले किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, खाद-बीज सब्सिडी, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) तथा फसल बीमा जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है। इसलिए प्रदेश के शत-प्रतिशत किसानों का फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए तथा किसानों को स्वेच्छा से पंजीकरण कराने के लिए प्रेरित किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने जिलाधिकारियों से शीघ्र ही जिला स्तर पर हीट एक्शन प्लान तैयार करने को कहा। मुख्य सचिव ने कहा कि गर्मी के मौसम को देखते हुए सार्वजनिक स्थानों पर आवश्यकतानुसार प्याऊ स्थापित किए जाएं। साथ ही, हीटवेव के जोखिम और बचाव के उपायों के संबंध में विभिन्न प्रचार माध्यमों के जरिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। मुख्य सचिव ने यह निर्देश भी दिए कि प्रदेश में ओलावृष्टि, अतिवृष्टि और अग्निकांड से प्रभावित फसलों के लिए लंबित क्षतिपूर्ति धनराशि का जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में शीघ्र वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर राहत मिल सके।




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