यूपी में शिक्षकों के हित में योगी सरकार का बड़ा फैसला, अधिकारियों ने ऐसा किया तो महंगा पड़ेगा
यूपी में शिक्षकों के हित में योगी सरकार का बड़ा फैसला लिया है। निलम्बन के नाम अध्यापकों का उत्पीड़न करना माध्यमिक शिक्षा विभाग के जिले, मंडल व निदेशालय तक के अधिकारियों के लिए महंगा पड़ेगा।

UP News: यूपी में शिक्षकों के हित में योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। शिक्षकों के निलंबन कर उसे 60 दिनों में अनुमोदित नहीं करना तथा निलम्बन के नाम अध्यापकों का उत्पीड़न करना माध्यमिक शिक्षा विभाग के जिले, मंडल व निदेशालय तक के अधिकारियों के लिए महंगा पड़ेगा। शासन ऐसे अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी।
निलंबन के मामलों को तय समय सीमा से अधिक लटकाने की बढ़ती प्रवृत्ति के विरुद्ध शासन ने चेतावनी जारी की है। जिसमें कहा गया है कि निलंबन के मामले को 60 दिनों बाद भी लटकाए रखकर शिक्षकों के उत्पीड़न की शिकायतें बढ़ती जा रही है जो सिटिजन चार्टर के प्रतिकूल है। प्रदेश के 39 ऐसे जिले चिन्हित किए गए हैं, जहां इस तरह के मामलों को लंबे समय तक लटकाए जाने की दर्जनों गंभीर शिकायतें हैं। नियमानुसार निलम्बन के 60 दिनों के भीतर उसका अनुमोदन या अनानुमोदन का निर्णय नहीं होने पर कृत कार्यवाही को विधि शून्य माने जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद प्रदेश में दर्जनों ऐसी शिकायतें हैं जिनमें पांच से छह माह बाद भी शिक्षकों के निलम्बन का अनुमोदन या अनानुमोदन नहीं किया गया है।
गौर करने वाली बात यह है कि इस प्रकरण को विधान परिषद में शिक्षक नेताओं की ओर से भी कई बार उठाया जा चुका है, जिसके जवाब में सरकार की ओर से कहा गया था कि इस तरह के मामलों की विशेष निगरानी की जा रही है। इसी कवायद में शासन स्तर पर 39 जिलों को चिन्हित किया गया है। वरिष्ठ शिक्षक नेता ओम प्रकाश त्रिपाठी की माने तो समय से निर्णय न कर मामले को लटकाया जाना नियमावली का खुला उल्लंघन है। यही हाल प्रबंधतंत्रों का भी है जो बिना लिखित अनुमति के की गई सेवा समाप्ति के मामले को मनमाने तरीके से सीधे वापस न करके उसे लटका कर शिक्षक-शिक्षिकाओ का उत्पीड़न करता है।
बकौल श्री त्रिपाठी, सेवा सुरक्षा के लिए पहले से ही कानूनी रूप से यह व्यवस्था है कि बिना जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) की पूर्व लिखित अनुमति कोई दंडात्मक कार्यवाही विधि शून्य होती है। बावजूद इसके सुनवाई के नाम पर महीनों तक लटकाये रख कर असंवैधनिक कार्यों को बढ़ावा दिया जाता है जो शिक्षकों के साथ घोर अन्याय है। इस पर प्रभावी अंकुश लगाने की जरूरत है।
शिक्षक़ों का हर कदम पर उत्पीड़न
शिक्षक नेताओ का कहना है कि शिक्षा विभाग के बेलगाम अधिकारी चाहे विभाग के आदेश हों अथवा कोर्ट के, उसे लागू करने में जानबुझकर तय समय सीमा के भीतर निराकारण न कर उत्पीड़न किया जाता है। माध्यमिक शिक्षक संघ (पाण्डेय गुट) के अध्यक्ष डॉ जितेंद्र सिंह पटेल का कहना है कि इन सबका खामियाजा अंतत: शिक्षक/ शिक्षिकाओं को ही भुगतना पड़ता है। उन्होंने इस अतिसंवेदनशील मामले में शासन द्वारा विशेष ध्यान केन्द्रित किए जाने के प्रति आभार व्यक्त किया है।




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