yogi government gives big relief to small industries in up self certification of compliance with laws is enough यूपी में छोटे उद्योगों को योगी सरकार ने दी बड़ी राहत, कानूनों के पालन का खुद प्रमाण पत्र देना पर्याप्त, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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यूपी में छोटे उद्योगों को योगी सरकार ने दी बड़ी राहत, कानूनों के पालन का खुद प्रमाण पत्र देना पर्याप्त

उत्तर प्रदेश में उद्योग-धंधों को बढ़ावा देने के साथ ही निवेश को बढ़ावा देने के लिए चौतरफा प्रयास किए जा रहे हैं। श्रम कानूनों में बदलाव के साथ ही औद्योगिक प्रतिष्ठानों की निरीक्षण प्रक्रिया का भी सरलीकरण किया गया है। सरकार ने निजी फर्मों (थर्ड पार्टी) ऑडिट की सुविधा शुरू की है।

Sun, 29 March 2026 07:35 AMAjay Singh संवाददाता, लखनऊ
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यूपी में छोटे उद्योगों को योगी सरकार ने दी बड़ी राहत, कानूनों के पालन का खुद प्रमाण पत्र देना पर्याप्त

UP News: उत्तर प्रदेश में सुगम व्यापारिक माहौल बनाने के लिए योगी सरकार ने उद्योगों को बड़ी राहत दी है। खासतौर से छोटे प्रतिष्ठानों को सरकारी सिस्टम के पीछे भागने से मुक्ति देने की पहल की गई है। प्रदेश में कम जोखिम श्रेणी में शामिल हजारों उद्योगों को सरकारी निरीक्षणों से निजात मिल गई है। उनके लिए स्वप्रमाणन व्यवस्था लागू की गई है। उन्हें अपने प्रतिष्ठान में श्रम कानूनों के पालन का प्रमाणपत्र खुद देना होगा। विभाग इसका परीक्षण करेगा। सब ठीक मिला तो पांच साल में सिर्फ एक बार ही सैंपल सर्वे किया जाएगा।

प्रदेश में उद्योग-धंधों को बढ़ावा देने के साथ ही निवेश को बढ़ावा देने के लिए चौतरफा प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए श्रम कानूनों में बदलाव के साथ ही औद्योगिक प्रतिष्ठानों की निरीक्षण प्रक्रिया का भी सरलीकरण किया गया है। मध्यम जोखिम श्रेणी में शामिल उद्योगों के लिए सरकार ने निजी फर्मों (थर्ड पार्टी) ऑडिट की सुविधा शुरू की है। वहीं कम जोखिम श्रेणी के प्रतिष्ठानों को अब जांचों-निरीक्षणों से मुक्ति दिलाने को स्वप्रमाणन की सुविधा प्रदान की गई है। यह सुविधा 10 से लेकर 50 तक कामगार वाली इकाइयों के लिए है।

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जानकारी विभागीय पोर्टल पर अपलोड करनी होगी

प्रतिष्ठानों को विभागीय पोर्टल (uplabour.gov.in) पर अपना आवेदन अपलोड करना होगा। इसमें श्रम कानूनों के पालन की घोषणा करनी होगी। विभाग को 60 दिन के भीतर इसका परीक्षण कर संबंधित उद्यमी को या तो आवेदन में कमी बतानी होगी या फिर उसे स्वीकृत करना होगा। इस 60 दिन की अवधि में यदि आवेदक को कोई सूचना नहीं दी जाती है, तो उसे स्वत: स्वीकृत माना जाएगा।

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नियोजक को सूचना 31 जनवरी तक देनी होगी

नियोजक द्वारा वार्षिक विवरणी कलैंडर वर्ष की समाप्ति पर अगले वर्ष 31 जनवरी तक पोर्टल पर देनी होगी। केवल शिकायत की स्थिति में श्रमायुक्त की अनुमति से अतिरिक्त निरीक्षण किया जाएगा। खास बात यह है कि सबकुछ सही रहने पर पांच साल में केवल 20 फीसदी प्रतिष्ठानों का रैंडम निरीक्षण किया जाएगा। इसकी जानकारी भी संबंधित प्रतिष्ठानों को 48 घंटे पहले दी जाएगी।

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