पंचायत चुनाव से पहले गांव-गांव योगी सरकार का अभियान, ग्राम सचिवालयों में लगेगा कैंप
यूपी पंचायत चुनाव की आहट के बीच योगी सरकार गांवों में खास अभियान चलाने जा रहा है। इस अभियान से किसानों की कई दिक्कतें दूर हो सकेंगी। उन्हें विभिन्न योजनाओं का फायदा आसानी से मिल सकेगा। इसके लिए ग्राम सचिवालयों में कैंप लगाए जाएंगे।

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर सोमवार को ही यूपी भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि पार्टी पूरी तरह तैयार है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी समय पर चुनाव की बात कही। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। राज्य सरकार ने प्रदेश के करोड़ों किसानों को सरकारी योजनाओं का पारदर्शी और सुगम लाभ दिलाने के उद्देश्य से 'फार्मर रजिस्ट्री' तैयार करने के लिए एक विशेष महाभियान की घोषणा की है। यह अभियान 15 अप्रैल 2026 तक पूरे प्रदेश के प्रत्येक ग्राम सचिवालय में 'मिशन मोड' पर संचालित किया जाएगा।
ग्राम सचिवालयों में लगेंगे विशेष शिविर
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य तकनीक के माध्यम से भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना और बिचौलियों को खत्म करना है। अभियान के तहत प्रदेश की हर ग्राम पंचायत के सचिवालय में विशेष कैंप लगाए जाएंगे। इन कैंपों में किसानों का डिजिटल पंजीकरण (Registration) किया जाएगा, जिससे उन्हें भविष्य में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) सहित अन्य कृषि सब्सिडी और सरकारी सुविधाओं का लाभ बिना किसी देरी के सीधे उनके बैंक खातों में मिल सके।
लेखपाल और सचिवों की तय की गई जवाबदेही
अभियान को सफल बनाने के लिए शासन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। प्रत्येक शिविर में ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और लेखपालों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य कर दी गई है। लेखपालों को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्र की हर ग्राम पंचायत के कम से कम एक शिविर में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहकर किसानों की समस्याओं और नाम संबंधी त्रुटियों का मौके पर ही निस्तारण करें। इससे किसानों को तहसील के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी।
अब तक 1.72 करोड़ से अधिक किसान पंजीकृत
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अब तक 1,72,06,355 किसानों को फार्मर रजिस्ट्री से जोड़ा जा चुका है। हालांकि, सरकार का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक पात्र किसान को इस डिजिटल डेटाबेस का हिस्सा बनाना है। इसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए 15 अप्रैल तक की समयसीमा तय की गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कैंप के दौरान किसानों को आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दें और मौके पर ही रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी कराएं।
पंचायत चुनाव और सुशासन का तालमेल
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनावों से ठीक पहले गांव-गांव कैंप लगाने का यह फैसला ग्रामीण मतदाताओं के बीच सरकार की पैठ को और मजबूत करेगा। फार्मर रजिस्ट्री न केवल एक सटीक डेटाबेस तैयार करेगी, बल्कि भविष्य में खाद, बीज और कीटनाशकों के वितरण में भी पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। योगी सरकार का यह कदम 'डिजिटल विलेज' की संकल्पना को साकार करने की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।




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