कार में हार्टअटैक से तड़पती रही पत्नी, जाम में बेबस हुआ पति; अस्पताल पहुंची लाश
सोनू गुप्ता ने बताया कि 14 अगस्त की रात उनकी 32 वर्षीया पत्नी बरखा गुप्ता को हार्ट अटैक पड़ा था। पत्नी को लेकर वह कार से कॉर्डियोलॉजी के लिए निकले। शास्त्री चौक से विजयनगर तक मेट्रो के निर्माण कार्यों के चलते जाम लगा था। उन्होंने दूसरा रूट लिया लेकिन वहां भी ट्रैफिक जाम में काफी देर फंसे रहे।

कानपुर में जाम ने एक और महिला की जान ले ली। पत्नी को हार्टअटैक आने के बाद कार से कॉर्डियोलॉजी लेकर जा रहा पति जाम में ऐसा फंसा कि पहुंचने में 45 मिनट लग गए। पत्नी कार में तड़पती रही। पति जाम के आगे बेबस हो गया। जब वह कॉर्डियोलॉजी पहुंचा, तब तक पत्नी के प्राण पखेरू उड़ चुके थे। ट्रैफिक व्यवस्था में भारी लापरवाही के कारण परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
गोविंदनगर के दबौली निवासी सोनू गुप्ता प्रॉपर्टी डीलर हैं। उन्होंने बताया कि 14 अगस्त की रात उनकी 32 वर्षीया पत्नी बरखा गुप्ता को हार्ट अटैक पड़ा था। हालत बिगड़ते ही वह कार से पत्नी को लेकर कॉर्डियोलॉजी के लिए निकले। शास्त्री चौक से विजयनगर तक मेट्रो के निर्माण कार्यों की वजह से जाम लगा था। किसी तरह वह दादानगर पुल उतर कर फजलगंज फायर ब्रिगेड से गड़रियन पुरवा की ओर जाने वाली सड़क से आगे बढ़े। वहां पर ट्रकों की कतार लगी हुई थी। वहां भी वह ट्रैफिक जाम में काफी देर फंसे रहे।
कार रेंगते हुए फजलगंज से मरियमपुर चौराहा तक पहुंची। वहां से नजीराबाद फिर कोकाकोला क्रॉसिंग होते हुए कॉर्डियोलॉजी हॉस्पिटल पहुंचे। उन्हें घर से अस्पताल तक पहुंचने में 45 मिनट से ज्यादा का समय लग गया। डॉक्टरों ने बरखा गुप्ता को मृत घोषित कर दिया। सोनू गुप्ता ने कहा-बच्चों के सिर से मां का साया उठने की जिम्मेदार सरकारी मशीनरी की अव्यवस्था है।
पत्नी की मौत का जिम्मेदार कौन..जवाब देना होगा
बरखा की मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। सोनू गुप्ता बदहवास हो गए। सोनू ने बताया कि उनकी डेढ़ साल की बेटी शुभी, 11 साल का बेटा अंश और 14 साल का बेटा शौर्य है। परिवार बिखर गया। अब बच्चे बिना मां के कैसे जिएंगे। मां की मौत के बाद बच्चे भी बिलखते रहे।
सदमे से बाहर निकलने पर पूछूंगा, जिम्मेदार कौन
सोनू ने कहा कि पत्नी की इस तरह से हुई मौत पर परिवार बेहाल है। बच्चों के सिर से मां का साया उठा है। पत्नी बरखा की मौत का जिम्मेदार कौन है, इस सवाल का जवाब किसी न किसी को देना होगा। सदमे से बाहर निकलने पर यह सवाल पूछेंगे।
पिता की भी जाम में फंस कर जा चुकी है जान
पत्नी को इलाज के लिए कार्डियोलॉजी ले जाने को निकलने के बाद जाम में फंसे सोनू के पिता की भी इसी तरह जान जा चुकी है। सोनू ने बताया कि वर्ष 2016 में उनके पिता के सीने में तेज दर्द उठा। जब लगा कि उन्हें हार्ट अटैक पड़ा है, तो वह पिता को लेकर कार्डियोलॉजी भागे, हालांकि तब भी वह जाम में फंस गए थे। देर तक जाम में फंसे रहने के बाद किसी तरह अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने पिता को मृत घोषित कर दिया था। अब पत्नी के साथ वही वाक्या दोहराने पर सोनू स्तब्ध हैं। सोनू ने कहा कि ये दुर्भाग्य है कि उन्हें फिर वहीं मंजर देखना पड़ा।
क्या बोले अधिकारी
यूपी मेट्रो के डीजीएम जनसंपर्क पंचानन मिश्र ने कहा कि ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है। वहां डायवर्जन भी नहीं था। यातायात व्यवस्था की जिम्मेदारी ट्रैफिक पुलिस संग मिलकर निभाते हैं। वहीं डीसीपी ट्रैफिक रविंद्र कुमार ने कहा कि अगर ऐसी घटना है तो दुखद है। टीम भेजकर पता कराएंगे, इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।




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