पत्नी ने तेंदुआ थ्योरी नकारी, बोली-हत्या हुई; किसान की मौत की गुत्थी उलझी
किसान कैलाश का शव 15 जनवरी को जंगल में लहूलुहान मिला था। शुरुआती छानबीन और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस और वन विभाग इसे तेंदुए या किसी जंगली जानवर का हमला मान रहे थे। वन विभाग ने क्षेत्र में पिंजरा भी लगा दिया था। लेकिन बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंची योगमाया ने पुलिसिया थ्योरी को खारिज कर दिया।

उत्तर प्रदेश के अमरोहा में छह दिन पहले हुई किसान कैलाश की मौत की गुत्थी अब उलझ गई है। मृतक की पत्नी ने जिलाधिकारी निधि गुप्ता से मिलकर पति की हत्या किए जाने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। योगमाया का दावा है कि कैलाश की मौत जंगली जानवर के हमले में नहीं, बल्कि जमीन हड़पने के इरादे से की गई हत्या है। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराने की मांग उठाई है।
नौगावां सादात थाना क्षेत्र के गांव अलीपुर कलां निवासी किसान कैलाश का शव 15 जनवरी को जंगल में लहूलुहान हालत में मिला था। शुरुआती छानबीन और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस और वन विभाग इसे तेंदुए या किसी जंगली जानवर का हमला मान रहे थे। एहतियात के तौर पर वन विभाग ने क्षेत्र में पिंजरा भी लगा दिया था। लेकिन बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंची मृतक की पत्नी योगमाया ने पुलिसिया थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया। योगमाया का कहना है कि कैलाश के सिर पर जिस तरह के गहरे घाव थे, वे जानवर के नहीं बल्कि हथियारों के हमले के निशान हैं।
पीड़िता ने डीएम को सौंपे शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि कुछ लोग उनकी कीमती जमीन पर नजर गड़ाए हुए थे और इसी के चलते साजिश के तहत कैलाश को मौत के घाट उतारा गया है। उन्होंने इस बाबत मुख्यमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, डीजीपी और जिला जज सहित तमाम उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। फिलहाल इस शिकायत के बाद प्रशासन और पुलिस मामले की नए सिरे से पड़ताल में जुट गए हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पत्नी के दावे में टकराव
एक ओर जहां पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जंगली जानवर के हमले की पुष्टि की गई है, वहीं पत्नी ने इसे सोची-समझी हत्या करार दिया है। अब पुलिस के सामने चुनौती है कि वह वैज्ञानिक साक्ष्यों और जमीन विवाद के पहलुओं को जोड़कर मौत की असली वजह साफ करे।




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