Whoever sings tell me my opinion Akhilesh yadav wary RJD-related songs in Bihar elections कोई गाए, मेरा मत बता देना; बिहार चुनाव में RJD पर बने गानों से अखिलेश सावधान, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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कोई गाए, मेरा मत बता देना; बिहार चुनाव में RJD पर बने गानों से अखिलेश सावधान

अखिलेश यादव ने आरोप लगाते हुए कहा, ये (एसआईआर) सोची समझी साजिश है, रणनीति है। बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के दिये हुए संविधान के तहत हमें जो वोट डालने का अधिकार है, उस अधिकार को छीनने की तैयारी है।

Sat, 29 Nov 2025 05:19 PMDinesh Rathour लाइव हिन्दुस्तान, लखनऊ
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कोई गाए, मेरा मत बता देना; बिहार चुनाव में RJD पर बने गानों से अखिलेश सावधान

यूपी में एसआईआर को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग और भाजपा पर हमलावर है। शनिवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एसआईआर को लेकर भाजपा और निर्वाचन आयेाग पर गंभीर आरोप लगाए। अखिलेश ने दावा किया कि सरकार मतदाता सूची के एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के बहाने वोट डालने का अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है। सपा मुख्यालय पर प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान अखिलेश ने बिहार चुनाव में बजे गानों का जिक्र करते हुए खुद को सावधान भी किया। उन्होंने कहा, मैं कलाकार साथियों से कहूंगा- बिहार में RJD के लिए जैसे गाने बने, वैसे गाने मत बना देना। साथ ही पत्रकारों से भी अखिलेश ने अपील की। उन्होंने कहा, प्रेस के साथियों से कहूंगा-कोई कैसा भी गाना बनाए, उसे हमारा मत बता देना। बतादें कि बिहार में RJD को लेकर बहुत रंगबाजी वाले गाने बने थे। आरजेडी ने बिहार में मिली हार का कारण भी इन्हीं गानों को बताया था। इसको लेकर आरजेडी ने गाना गाने वाले 32 गायकों को पार्टी की ओर से नोटिस भी भेजा।

गायकों पर राजद को बदनाम करने का लगाया था आरोप

गायकों को नोटिस भेजकर पार्टी ने कहा था कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर पार्टी इन गायकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने से भी परहेज नहीं करेगी। पार्टी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि चुनाव के पहले राजद को बदनाम करने के लिए कई गीत बाजार में जान-बूझकर लॉन्च किए गए। पार्टी या दल के नेताओं का नाम लेकर गाना बनाए गए। इनमें से अधिकतर ऐसे गायक हैं, जिनका भाजपा से सीधा संबंध है। इससे न केवल राजद बल्कि नेता तेजस्वी प्रसाद यादव की भी बदनामी हुई। इन गायकों ने सामाजिक न्याय को बदनाम करने की साजिश रची। पार्टी का मानना है कि बिना अनुमति राजद, लालू प्रसाद या तेजस्वी यादव का नाम लेकर गाना गाया गया है तो वह मानहानि के दायरे में आएगा। पार्टी की पहचान माने जाने वाले झंडे, चिह्न या नारों का प्रयोग मनोरंजन सामग्री, रील्स या गानों में किया जाना अवैध माना जाएगा। पार्टी ने चेतावनी दी है कि जो भी कलाकार इसका उल्लंघन करेगा उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी और मानहानि का मुकदमा भी किया जाएगा।

एसआईआर सोची समझी साजिश

अखिलेश यादव ने आरोप लगाते हुए कहा, ये (एसआईआर) सोची समझी साजिश है, रणनीति है। बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के दिये हुए संविधान के तहत हमें जो वोट डालने का अधिकार है, उस अधिकार को छीनने की तैयारी है।'' उन्‍होंने कहा, ''ये (केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग) एसआईआर के बहाने वोट डालने का अधिकार छीन रहे हैं। आरक्षण, आपकी पहचान छीनेंगे और आपके ऊपर उल्टे सीधे दबाव बनाएंगे।'' सपा प्रमुख ने 14 नवंबर को मस्तिष्काघात से मृत बीएलओ विजय कुमार वर्मा का जिक्र करते हुए ये गंभीर आरोप लगाए। यादव ने कहा कि सरकार के लोग इस बात का दबाव बना रहे हैं कि वह (बीएलओ) ड्यूटी में ही नहीं थे और पहले से ही बीमार थे। बीएलओ वर्मा के परिजनों ने मीडिया के सामने कहा कि वे (वर्मा) शिक्षा मित्र थे, उनकी ड्यूटी बीएलओ में लगाई गई थी। उन्हें मस्तिष्काघात हुआ 14 तारीख को और उस दिन वह काम पर गये थे। रात में 11 बजे बैठकर अपना काम कर रहे थे, तभी कुर्सी से गिरे और हम लोग उन्हें अस्पताल ले गये, जहां चिकित्सकों ने बताया कि मस्तिष्काघात हुआ है। मृतक की पत्‍नी ने आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि ''एक अधिकारी ने कहा कि वह पहले से कार्यमुक्त थे, जब 14 तारीख को कार्य किया तो कार्यमुक्त कैसे हो गये। प्रशासन की तरफ से कोई मदद भी नहीं मिली और झूठा आरोप लगा रहे हैं।

भाजपा को इतनी जल्दबाजी क्यों?

पूर्व मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि यह एसआईआर है, आखिर भाजपा इतनी जल्दबाजी में क्यों है। चुनाव आयोग और भाजपा मिले हुए हैं और दोनों जल्दबाजी कर रहे हैं। सपा प्रमुख ने सवाल करते हुए कहा, पहले भी मैं यह बात कह चुका हूं कि उत्तर प्रदेश में लगातार शादियां हो रही हैं और शादियों के समय में लोगों को एक-दूसरे के यहां आना जाना, तैयारी करना होता और सब व्यस्त हैं। इतने कम समय में पूरे प्रदेश का एसआईआर कराने की क्‍या आवश्‍यकता है। उन्‍होंने व्यवस्था पर भी व्यंग्य कसते हुए कहा कि यहां तक कि जिम्मेदारी नगर पालिका के सफाईकर्मियों को भी दी गई है। फॉर्म में इतनी तकनीकी बातें हैं और बीएलओ का सहायक सफाई कर्मचारी को बनाया गया है। और इस फॉर्म को बंटवाने में की जाने वाली जल्दबाजी, बंटा नहीं बंटा लेकिन जो सरकार के आंकड़े बता रहे हैं कि सभी फॉर्म बांटे जा चुके हैं, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है।

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