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कानपुर में वकील अखिलेश दुबे की क्यों हो रही इतनी चर्चा? शहर में चल रहा था कौन सा खेल

दरबार में आईपीएस से सिपाही तक हाजिरी देते थे। यह बात सार्वजनिक थी।लोगों को फंसाने-बचाने का खेल धड़ल्ले से और पुलिस की मदद से चलता था। पहली बार भाजपा सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के संयोजक रवि सतीजा की एफआईआर पर कार्रवाई शुरू हुई तो एक-एक कर ‘दरबारियों’ के नाम खुलने लगे।

Sun, 10 Aug 2025 06:59 AMAjay Singh प्रमुख संवाददाता, कानपुर
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कानपुर में वकील अखिलेश दुबे की क्यों हो रही इतनी चर्चा? शहर में चल रहा था कौन सा खेल

अखिलेश दुबे कानपुर के चर्चित वकील हैं। पुलिस ने ‘ऑपरेशन महाकाल’ के तहत बुधवार को उन्हें गिरफ्तार किया था। भाजपा नेता रवि सतीजा ने बुधवार दोपहर 3:02 बजे अखिलेश दुबे पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें आरोप है कि अखिलेश ने रवि पर पॉक्सो की झूठी एफआईआर दर्ज कराई। धमकी देकर 50 लाख रुपये रंगदारी मांगी। इसके बाद पुलिस ने साकेत नगर निवासी अखिलेश दुबे को पकड़ कर पूछताछ की और रात में गिरफ्तार कर लिया। अखिलेश के साथी लवी मिश्रा को भी गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से अखिलेश दुबे को लेकर कानपुर में रोज नए-नए मामले सामने आने आ रहे हैं। कानून के जाल में फंसाकर बड़े पैमाने पर वसूली का खेल खुल रहा है। पुलिस इस खेल की तह तक पहुंचने की कोशिशों में जुटी है। अखिलेश दुबे और उसके साथियों पर शनिवार को दो और मुकदमे दर्ज किए गए। दोनों रंगदारी और धमकी से जुड़े हैं। पहली रिपोर्ट कोतवाली तो दूसरी किदवई नगर थाने में दर्ज की गई है। दर्ज मामलों की संख्या अब चार पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक एक-दो दिन में और केस दर्ज हो सकते हैं।

किदवई नगर थाने में आवास विकास हंसपुरम निवासी शैलेंद्र कुमार ने अखिलेश दुबे, वकील पंकज दीक्षित, अनुज मिश्रा और पत्रकार विपिन गुप्ता के खिलाफ 20 लाख की रंगदारी मांगने, मुंह में पिस्टल डालकर धमकी देने समेत अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया है। दूसरा केस कोतवाली थाने में वकील की ओर से दर्ज कराया गया है। इसमें अखिलेश दुबे, साथी हिस्ट्रीशीटर पप्पू स्मार्ट, उसका भाई मोहम्मद शुएब, जैन कालिया, फराज, आमिर बिच्छू, हर्षित यादव, रामेंद्र उर्फ गुड्डू, अमिता यादव और मिनेश यादव को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि 2016 में अमिता और मिनेश ने उनके खिलाफ रेप का केस कराया था। 50-50 हजार रुपये देने के बाद दोनों केस में अंतिम रिपोर्ट लगी थी। अखिलेश दुबे ने कार्यालय बुलाकर 10 लाख रुपये और मांगे थे। इसके पहले किदवई नगर में ही अखिलेश और लवी के खिलाफ ढाई करोड़ की रंगदारी वसूलने, मारपीट और धमकी देने में भी मुकदमा दर्ज किया गया था। किदवई नगर के एक बड़े होटल व्यवसायी ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें आरोप है कि होटल व्यवसायी से ढाई करोड़ की वसूली छह माह में किस्तों में की गई थी। एडीसीपी क्राइम अंजली विश्वकर्मा के मुताबिक होटल व्यवसायी पर भी रेप का फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया था। एसआईटी की जांच में यह सत्य सामने आने के बाद मुकदमा लिखा गया।

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पांच सीओ और दो ‘बाबा’ भी रडार पर

चर्चित वकील अखिलेश दुबे के सहयोगी के रूप में पांच सीओ, सात इंस्पेक्टर, दो बाबाओं के नाम सामने आए हैं। सूत्रों का कहना है कि इन सभी की संलिप्तता के प्राथमिक सबूत एसआईटी के हाथ लगे हैं। इनकी गहन छानबीन की जा रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि अखिलेश के दरबार में कई आईपीएस से सिपाही तक हाजिरी देते थे। यह बात सार्वजनिक थी और धड़ल्ले से लोगों को फंसाने-बचाने का खेल पुलिस की मदद से चलता था। पहली बार भाजपा सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के संयोजक रवि सतीजा की एफआईआर पर कार्रवाई शुरू हुई तो एक-एक कर ‘दरबारियों’ के नाम खुलने लगे। एसआईटी सूत्रों के मुताबिक इनमें ऐसे सीओ भी शामिल हैं, जो शहर में ही इंस्पेक्टर रहे और यहीं सीओ बन कर कई साल नौकरी करते रहे। इनकी भूमिका इशारा मिलते ही ‘शिकार’ फंसाना और फिर उगाही शुरू हो जाती थी।

कल्याणपुर में करीबी फंसे

कानपुर के कल्याणपुर थाने में महिला की तहरीर पर एक मुकदमा हुआ है। महिला का आरोप है कि अखिलेश दुबे के करीबी विनय कटियार और शोमिल शाह ने एक लड़की के जरिए उनके भाई पर केस कराया था। उसके बाद समझौते के लिए पांच लाख रुपये देने का दबाव बनाया। एसीपी चकेरी अभिषेक पांडेय ने बताया कि महिला ने अखिलेश दुबे के शामिल होने की बात बताई है।

अखिलेश दुबे, पत्रकार और वकील समेत सात नामजद

कानून के जाल में फंसाकर उगाही करने के आरोप में जेल गए चर्चित वकील अखिलेश दुबे के कारनामों का एक और चिट्ठा सामने आया है। उसका यह कारनामा 10 साल पुराना है। किदवई नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए पीड़ित ने आरोप लगाया कि साकेत नगर स्थित पार्क में अवैध रूप से गेस्ट हाउस खड़ा करने की शिकायत करने पर अखिलेश व उसके साथियों ने बंधक बनाकर मारपीट की और 20 लाख रुपये मांगे। न देने पर झूठे मुकदमे दर्ज करा दिए। इसमें कथित पत्रकार सहित अन्य लोग शामिल रहे।

नौबस्ता के आवास विकास हंसपुरम निवासी शैलेन्द्र कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया है कि वह सच का आइना नाम की संस्था में महामंत्री हैं। संस्था पीड़ितों की आवाज शासन प्रशासन तक पहुंचाती है। उन्होंने 20 अप्रैल 2015 को भूमाफिया के सरकारी अधिकारियों से साठगांठ करके डब्ल्यू ब्लाक साकेत नगर के पार्क में अवैध निर्माण कराकर किशोरी वाटिका गेस्ट हाउस चलाए जाने की शिकायत तत्कालीन नगर आयुक्त से करने के साथ उच्चाधिकारियों को शिकायती पत्र भेजा था। ये जानकारी अखिलेश को हुई तो वह रंजिश मानने लगा। आरोप है कि 12 मई 2015 को सुबह 10:30 बजे कथित पत्रकार विपिन गुप्ता ने फोन किया। साक्षात्कार लेने के बहाने बुलाकर साकेतनगर दीप सिनेमा के सामने स्थित अखिलेश के कार्यालय में ले गया। वहां पहले से ही चार-पांच लोग बैठे थे। इनमें अखिलेश दुबे और बर्रा के मलिकपुरम निवासी अधिवक्ता पंकज दीक्षित, स्वरूप नगर के नागेश्वर इन्क्लेव आपर्टमेंट में रहने वाले अनुज मिश्रा समेत दो-तीन अन्य लोगों ने मारपीट कर जमीन पर गिरा दिया। इसके बाद अखिलेश दुबे ने मुंह में रिवाल्वर डाल दी और गाली-गलौज करते हुए कहा कि तू बहुत शिकायत करता था। तुम्हारी शिकायतों के कारण 20 लाख रुपये बर्बाद हो गए हैं। अब 20 लाख रुपये तू देगा वरना जान से मार दिया जाएगा। मारपीट के दौरान ही अधिवक्ता पंकज दीक्षित और अखिलेश दुबे ने जेब में रखे 10 हजार रुपये छीन लिए। उनकी धमकियों से काफी डर गया था। जिसके चलते माफी मांगकर किसी तरह वहां से निकल गया। इसके बाद भी अखिलेश दुबे ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। जून 2015 से अखिलेश दुबे और पंकज दीक्षित ने 20 लाख रुपये की मांग शुरू कर दी।

एसआईटी बनी तो न्याय की उम्मीद जगी

शैलेंन्द्र के मुताबिक, अखिलेश की दहशत ऐसी थी कि वह कहीं शिकायत करने जाते लेकिन सुनवाई न होती। इधर आरोपितों के खिलाफ एसआइटी के गठन होने जानकारी पर न्याय के लिए गुहार लगाई थी।

रंगदारी की रकम न मिलने पर करा दिए चार मुकदमे

शैलेंद्र के मुताबिक अखिलेश दुबे को रुपये देने में असमर्थता जताई तो साजिश के तहत एक सितंबर 2025 को कल्याणपुर थाने में मारपीट कर धमकाने, एससी-एसटी की धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया। इसके बाद आठ अक्टूबर 2015 को चकेरी में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, सेवन सीएलए समेत गंभीर धाराओं में दर्ज मुकदमे में नामजद न करके उन्हें अपराधी के रूप में नाम शामिल किया गया। इसके बाद तीसरा मुकदमा फजलगंज में एक राय होकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की धारा में दर्ज करवा दिया जबकि उसका कोई लेनादेना नहीं था। चौथा मुकदमा बाबूपुरवा में डर दिखाकर जबरन वसूली और धोखाधड़ी की धाराओं में दर्ज कराया गया।

एक ही दिन दो जगहों से जारी हुए लाइसेंस

वकील अखिलेश दुबे के परिवार के सदस्यों के नाम अब तक 12 शस्त्र लाइसेंस जारी होने की जानकारी मिली है। खास बात यह है कि अखिलेश के भाई निखिलेश दुबे के नाम एक ही दिन पंजाब के लुधियाना और पटियाला दोनों जगह से लाइसेंस जारी होने की स्वीकृति मिली। निखिलेश दुबे के नाम पटियाला से 04 अगस्त 1990 रिवाल्वर का लाइसेंस जारी हुआ जिसका नंबर 137 है। वहीं असलहा नंबर 526 भी 04 अगस्त 1990 को ही रायफल के लाइसेंस के रूप में लुधियाना से निर्गत हुआ। अब सवाल यह है कि एक साथ दो जिलों के पते का सत्यापन कैसे हुआ। दो जिलों में एक ही शख्स एक साथ कैसे हो सकता है?

अखिलेश और पप्पू स्मार्ट गैंग पर केस

राजा ययाति के ऐतिहासिक किले की लड़ाई लड़ने वाले अधिवक्ता ने अखिलेश दुबे और उसके साथियों पर अवैध वसूली का आरोप लगाया। आरोप है कि सरकारी जमीन पर कब्जे में बाधक बनने पर पहले उनके खिलाफ दुष्कर्म के फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए। दोनों मुकदमों में फाइनल रिपोर्ट लगने के बाद भी उनसे सामाजिक छवि बर्बाद करने के नाम पर एक लाख रुपये की वसूली की गई। रकम देने के बाद भी आरोपी नहीं थमे और 10 लाख और मांगे। कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।

चकेरी निवासी अधिवक्ता ने वर्ष 2015 और वर्ष 2017 में हिस्ट्रीशीटर आसिफ उर्फ पप्पू स्मार्ट समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। चार्जशीट लगने के बाद पप्पू स्मार्ट और उसके साथी आमिर बिच्छू, शोएब उर्फ पप्पी, जैन कालिया, फराज, रामेंद्र उर्फ गुड्डू, हर्षित यादव ने उन्हें गिरोह के मुख्य सरगना अखिलेश दुबे के ऑफिस बुलाया। कार्यालय न पहुंचने पर अखिलेश दुबे ने उन्हें व्हाट्एप कॉल कर जान से मारने और अंजाम भुगतने की धमकी दी। विरोध जताने पर इस गिरोह ने शामिल अर्चना और अमिता नाम की दो महिलाओं की ओर से वर्ष 2016 में उन पर न्यायालय से नौबस्ता और कल्याणपुर थाने में दो झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए। विवेचना के दौरान दोनों मुकदमे की पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने उनसे 10 लाख रुपये की मांग की। पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं ने हिस्ट्रीशीटर पप्पू स्मार्ट और अधिवक्ता अखिलेश दुबे से मिलकर बात करने को कहा। जांच हुई तो दोनों मुकदमे झूठे निकलने पर उनमें एफआर लग गई। इसके बाद भी आरोपित प्रोटेस्ट (कोर्ट में विरोध करने) के नाम पर 10 लाख रुपये की मांग करते रहे। आरोप है कि इसके बाद महेश गुप्ता और ओसामा आमिर ने अपने चैंबर में बुलाकर दोनों महिलाओं को 50-50 हजार रुपये देने के लिए कहा। अधिवक्ता ने सामाजिक छवि बचाने के लिए उन्हें एक लाख दे दिए। रुपये देने के बाद भी गिरोह उनसे लगातार वसूली की मांग कर रहा है।

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100 से ज्यादा फोन आए

रवि सतीजा ने बताया कि अखिलेश पर केस के बाद उनके पास 100 से ज्यादा व्यापारियों, उद्यमियों और कारोबारियों के फोन आ चुके हैं। इसमें कई बिल्डर भी शामिल हैं। सभी ने अपना-अपना दुखड़ा रोते हुए वसूली की कहानियां बताई हैं। इन सभी से एसआईटी को तहरीर देने के लिए कहा है। रवि ने बताया कि क्राइम ब्रांच में अखिलेश को पूछताछ के लिए बुलाया गया तो सामना कराया। झूठा मुकदमा दर्ज कराने, कॉल करने की बात पूछी तो अखिलेश चुप हो गया।

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