अखिलेश ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से फोन पर क्या कहा? पुलिस ने कल गंगा स्नान से रोका था
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोमवार शाम शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से फोन पर बात की। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मौनी अमावस्या के दिन हुई घटना का जिक्र करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से कहा कि आप के साथ जो हुआ उसका दु:ख है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार शाम शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से फोन पर बात की। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मौनी अमावस्या के दिन हुई घटना का जिक्र करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से कहा कि आप के साथ जो हुआ उसका दु:ख है, जो आप के साथ व्यवहार हुआ, होना नहीं चाहिए था क्योंकि सदियों पुरानी परंपरा रही है। आप संत लोग ही मेले की शोभा हैं। अपने शिविर के सामने बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब में कहा कि अपनी लड़ाई अभिमन्यु की तरह चक्रव्यूह में लड़ रहे हैं। प्रशासन ने संगम में स्नान करने से रोका जबकि ये किसी को गंगा-यमुना में स्नान करने से नहीं रोक सकते।
जब हिंदू परिवार में कोई बच्चा पैदा होता है तो जन्म से गंगा-यमुना में स्नान करता है, मुझे इन्होंने वंचित कर दिया। अखिलेश ने वाराणसी में मंदिर गिराए जाने के वायरल हो रहे वीडियो पर बातचीत शुरू की तो अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वहां 150 मंदिर तुड़वा दिए गए। अब भी मंदिर तोड़े जा रहे हैं। अखिलेश ने कहा कि खबरों में तो सब सुरक्षित होने की बात सामने आ रही है। बातचीत के दौरान मौके पर मौजूद संदीप यादव ने बताया कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मिलने के लिए भेजने की बात कही है।
आपको बता दें कि संगम नगरी प्रयागराज में मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के काफिले को पुलिस ने संगम तट पर जाने से रोक दिया, जिसके बाद मेला क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण हो गई । पुलिस प्रशासन के मुताबिक मौनी अमावस्या के मद्देनजर मेला क्षेत्र को 'नो-व्हीकल जोन' घोषित किया गया था, जिसके कारण किसी भी बड़े काफिले या वाहन को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही। वहीं, शंकराचार्य को संगम तट जाने से रोक दिया गया। वहीं, जब पुलिस ने काफिले को रोका तो समर्थकों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस और शंकराचार्य के शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की होने लगी थी।




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