Shankaracharya Avimukteshwarananda continues his fast Accused of conspiracy to murder by causing stampede माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अनशन जारी, बोले- भगदड़ कराकर मारने की थी साजिश, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अनशन जारी, बोले- भगदड़ कराकर मारने की थी साजिश

संगम स्नान करने जा रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को प्रशासन ने रोका तो हंगामा हो गया। शंकराचार्य के समर्थकों ने इसका विरोध किया तो पुलिस के आला अफसरों से धक्कामुक्की शुरू हो गई। इससे नाराज होकर वह अनशन पर बैठ गए। आरोप लगाया कि पुलिस ने भगदड़ कराकर उन्हे मारने की साजिश की थी। 

Mon, 19 Jan 2026 10:56 AMPawan Kumar Sharma वरिष्ठ संवाददाता, प्रयागराज
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माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अनशन जारी, बोले- भगदड़ कराकर मारने की थी साजिश

मौनी अमावस्या पर पालकी पर बैठकर संगम स्नान करने जा रहे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को प्रशासन ने रोका तो हंगामा हो गया। शंकराचार्य के समर्थकों ने इसका विरोध किया तो पुलिस के आला अफसरों से धक्का-मुक्की शुरू हो गई। लगभग तीन घंटे तक संगम तट पर चली खींचतान और हो-हल्ला के बाद भी पुलिस व प्रशासन नहीं माना तो शंकराचार्य बिना स्नान के लौट गए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने भगदड़ कराकर उन्हें मारने की साजिश की थी। उधर, नाराज शंकराचार्य ने समर्थकों सहित त्रिवेणी मार्ग स्थित शंकराचार्य शिविर के बाहर धरना शुरू कर दिया, जो देर रात तक जारी रहा। सूर्यास्त के बाद शंकराचार्य ने मौन व्रत धारण कर लिया। साथ ही अनशन से शुरू किया जो अब तक जारी है।

शंकराचार्य शिविर के मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने भगदड़ कराकर उन्हें मारने की साजिश की थी। बिना वर्दी के पुलिस वाले उन्हें वहां से ले गए। कहा कि वह तभी स्नान करेंगे जब बदसलूकी करने वाले अफसर उन्हें ससम्मान ले जाएंगे। पिछले कुम्भ में उन्होंने भगदड़ के लिए सरकार को जिम्मेदार बता दिया था, इसीलिए उन्हें अपमानित किया गया। उन्होंने मेला छोड़ देने की चेतावनी भी दी।

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पुलिस ने पालकी से संगम जोन जाने पर रोका

रविवार सुबह करीब 9:47 बजे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अनुयायियों के साथ संगम नोज पर पहुंचे। शंकराचार्य पालकी पर सवार थे और अनुयायी पैदल चल रहे थे। संगम तट पर बैरिकेडिंग लगाई गई थी। वहां शंकराचार्य को यह कहकर रोका गया कि वह पालकी पर बैठकर स्नान के लिए नहीं जा सकते, उनसे पैदल स्नान के लिए जाने का आग्रह किया जा रहा था। यहां से संगम घाट की दूरी महज 50 मीटर रही होगी। अनुयायियों ने इसका विरोध किया और धक्का-मुक्की करते हुए संगम वाच टावर तक पहुंच गए।

रोके जाने के बाद भी शंकराचार्य की पालकी वाच टावर से आगे बढ़ी तो मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार को संगम पर आम श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पालकी को रोकने के लिए कहा। पुलिस आयुक्त ने पुलिस बल के साथ शंकराचार्य और उनके अनुयायियों को समझाने की कोशिश की तो बहस होने लगी। इसे लेकर काफी देर तक हो-हल्ला और धक्का-मुक्की होती रही, इस बीच कुछ अनुयायियों को पुलिस संगम चौकी के अंदर खींच ले गई।

संतों को पीटने का आरोप

शंकराचार्य की सवारी वहां से लौट रही थी लेकिन हंगामे को देखकर फिर रुक गई। मामला बढ़ता देख डीएम मनीष कुमार वर्मा और मेलाधिकारी ऋषिराज भी वहां पहुंचे। दोनों अफसरों ने शंकराचार्य से पैदल स्नान के लिए जाने का आग्रह किया लेकिन बात नहीं बनी। कई बार पुलिस बल और अनुयायियों के बीच धक्कामुक्की हुई। काफी देर तक चले विवाद और धक्कामुक्की के बाद एक-एक कर सभी अनुयायियों को पुलिस घसीटकर चौकी में ले गई। आरोप है कि इस बीच पुलिस ने शंकराचार्य के शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरि सहित कई संतों को जमकर पीटा। कुछ संतों को बाल पकड़कर खींचा भी गया। दोपहर लगभग 12:15 बजे स्थिति यह हो गई कि शंकराचार्य पालकी पर अकेले रह गए। जिसके बाद कुछ लोग पालकी को खींचकर ले गए।

परंपरा के विपरित पालकी पर सवार होकर आए थे: मंडलायुक्त

मंडलायुक्त का कहना था कि अमावस्या की भीड़ को देखते हुए संगम क्षेत्र को नो व्हीकल जोन घोषित किया गया था। परंपरा के विपरीत बगैर किसी अनुमति के अपने रथ या पालकी पर सवार होकर अपने करीब 200 अनुयायियों के साथ यहां आए थे। संगम पर करोड़ों की भीड़ थी। बैरियर तोड़कर आए और करीब तीन घंटे तक हमारा वापसी मार्ग अवरुद्ध किया, जिससे जन सामान्य को बहुत असुविधा हुई और कोई भी घटना घट सकती थी।

टूट गया छत्र, आधा घंटा अकेले खड़े रहे

शंकराचार्य की पालकी को अक्षयवट मार्ग पर छोड़ दिया गया। आरोप है कि इस दौरान छत्र भी टूट गया। इस पर लोगों में भी आक्रोश दिखा। क्योंकि शंकराचार्य के लिए छत्र सबसे महत्वपूर्ण होता है। आधे घंटे तक शंकराचार्य अकेले खड़े रहे। बाद में उनके समर्थक वहां आए तो उन्हें शिविर तक ले गए।

तोड़ दिया बैरियर

हंगामे के बीच पुलिस आयुक्त ने लाउड हेलर पर बताया कि शंकराचार्य के समर्थकों ने पांटून पुल दो का बैरियर तोड़ दिया है। जबकि शंकराचार्य के समर्थक इससे इनकार करते रहे। पुलिस इसकी तस्दीक के लिए सुबह 9:30 बजे की फुटेज निकाल रही है।

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