Challenges Faced by Varanasi Table Tennis Players Lack of Facilities and Financial Burden बोले काशी - कोच और संसाधनों का अभाव तोड़ रहा ‘मनोभाव’, Varanasi Hindi News - Hindustan
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बोले काशी - कोच और संसाधनों का अभाव तोड़ रहा ‘मनोभाव’

Varanasi News - वाराणसी के टेबल टेनिस खिलाड़ियों को महंगे उपकरणों और कोच की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा नहीं दिखा पा रहे हैं। आर्थिक तंगी से मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए इस खेल को जारी रखना मुश्किल हो गया है।

Fri, 1 May 2026 01:30 AMNewswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
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बोले काशी - कोच और संसाधनों का अभाव तोड़ रहा ‘मनोभाव’

वाराणसी। लकड़ी की मेज पर सेल्युलाइड बॉल की टिक-टिक के बीच काशी के टेबल टेनिस खिलाड़ी अपनी प्रतिभा निखार रहे हैं, लेकिन सुविधाओं के मोर्चे पर वे आज भी बैकहैंड पर हैं। राष्ट्रीय पटल पर अंक बटोरने वाले खिलाड़ियों के सामने महंगे उपकरणों का खर्च और कोच विहीन स्टेडियम जैसी चुनौतियां हैं। मध्यमवर्गीय परिवारों के खिलाड़ियों के लिए यह खेल आर्थिक बोझ महसूस होने लगा है, जहां हर टूटती बॉल के साथ एक सपना भी टूटता महसूस होता है। संसाधनों की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के बावजूद, काशी की ये खेल प्रतिभाएं अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा फहराने का जज्बा लेकर खेल मेज पर डटी हैं। अपनी फुर्ती और एकाग्रता के लिए पहचाना जाने वाला टेबल टेनिस का खेल काशी की गलियों से निकलकर अब राष्ट्रीय पटल पर चमक रहा है। वाराणसी डिस्ट्रिक्ट टेबल टेनिस एसोसिएशन के बैनर तले सिगरा में जुटे खिलाड़ियों ने 'हिन्दुस्तान' से बातचीत में अपनी समस्याएं साझा कीं। कोच गौरव प्रभाकर ने कहा कि लकड़ी की मेज पर छोटी सी सेल्युलाइड बॉल और रैकेट के बीच का मुकाबला महज खेल नहीं, बल्कि नसों को झकझोर देने वाली गति और तकनीक का संगम है। खिलाड़ी अपनी सर्विस से प्रतिद्वंद्वी को छकाते हैं, स्लैम और टॉप स्पिन के सटीक मिश्रण से अंक बटोरने का प्रयास करते हैं। हालांकि संसाधनों की कमी खिलाड़ियों के फुटवर्क की गति को धीमा कर रही है। इन्हें सही दिशा देने के लिए अब काशी में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और कोच की सख्त दरकार है। सीनियर खिलाड़ी सुजीत सिंह बोले, काशी के टेबल टेनिस खिलाड़ी अपनी मेहनत और लगन से राष्ट्रीय पटल पर चमक बिखेर रहे हैं। विडंबना यह कि अपने ही जिले में ये खिलाड़ी बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक प्रोत्साहन के लिए तरस रहे हैं। राष्ट्रीय खिलाड़ी सौम्या सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर शहर का मान बढ़ाने के बावजूद खिलाड़ियों को प्रशासन की ओर से अभ्यास के लिए उचित संसाधन नहीं है। वर्तमान में खिलाड़ी किसी तरह निजी संस्थानों और व्यक्तिगत प्रयासों से अपने खेल को जीवित रखे हैं। तृषा ने कहा कि सुविधाओं के अभाव और प्रशासनिक उदासीनता के कारण कई उभरती प्रतिभाएं बीच में ही दम तोड़ दे रही हैं。

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मल्टीपर्पज हॉल बना शोपीस

राष्ट्रीय खिलाड़ी हर्षित सिंह ने कहा कि सिगरा स्थित डॉ. सम्पूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम में मल्टीपर्पज हॉल का निर्माण होने के बावजूद टेबल टेनिस खिलाड़ी इसके उपयोग से वंचित हैं। करोड़ों की लागत से तैयार इस हॉल में खिलाड़ियों को आज तक प्रशिक्षण के लिए प्रवेश नसीब नहीं हो सका है। यह आधुनिक संरचना महज एक शोभा की जगह बनकर रह गई है। राज्यस्तरीय खिलाड़ी कार्तिक प्रसाद ने कहा कि यहां टेबल टेनिस कोच का न होना बड़ी समस्या है। इसके चलते न तो अभ्यास सत्र शुरू हो पा रहे हैं और न ही नई प्रतिभाओं को तराशने का काम हो पा रहा है। खिलाड़ी अंशिका जायसवाल ने कहा कि स्टेडियम प्रशासन और विभाग की उदासीनता से खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं और प्रशिक्षण पद्धतियों से कोसों दूर हैं। बिना कोच और उचित मार्गदर्शन के राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी करना मुश्किल हो रहा है। खिलाड़ियों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

खेल का जुनून इन परिवारों पर भारी

राज्यस्तरीय खिलाड़ी विराज सिंह ने कहा कि काशी में टेबल टेनिस की प्रतिभाओं के सामने अब आर्थिक तंगी बड़ी दीवार बनकर खड़ी हो गई है। इसके चलते मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए इस खेल को जारी रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। राष्ट्रीय खिलाड़ी सत्यम राय और हर्षित ने कहा कि टेबल टेनिस के उपकरण और रखरखाव का खर्च इतना अधिक है कि शुरुआत में खिलाड़ी को हर महीने औसतन 5 से 6 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जबकि एडवांस लेवल पर पहुंचते ही यह बजट 20 से 25 हजार रुपये प्रति माह तक जा पहुंचता है। सौम्या सिंह, कायरा बोलीं, उच्च गुणवत्ता के रैकेट और गेंदें न केवल महंगी हैं, बल्कि अत्यधिक अभ्यास के कारण एक ही दिन में कई गेंदें टूट जाती हैं। इनका बोझ उठाना खिलाड़ियों के लिए भारी पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से खेल सामग्री या आर्थिक अनुदान के रूप में कोई सहयोग नहीं मिलता है।

खिलाड़ियों के हौसले पस्त

राष्ट्रीय खिलाड़ी विराट सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर काशी का परचम लहराने वाले टेबल टेनिस खिलाड़ियों के लिए अब टूर्नामेंटों में शामिल होना आर्थिक रूप से बड़ी बाधा बन गया है। जिले और राज्य स्तर को मिलाकर एक खिलाड़ी वर्ष में औसतन 10 से 15 प्रतियोगिताओं में शिरकत करता है, लेकिन एक शहर से दूसरे शहर की यात्रा के लिए प्रशासन या रेलवे की ओर से कोई विशेष रियायत खिलाड़ियों को नहीं दी जाती है। राज्य स्तरीय खिलाड़ी देव त्रिपाठी बोले, खिलाड़ी देश और प्रदेश के गौरव के लिए खेलते हैं, इसके बावजूद उन्हें सामान्य यात्रियों की तरह भारी खर्च उठाकर सफर करना पड़ता है। मध्यम वर्गीय परिवारों से आने वाले कई होनहार खिलाड़ी तो बजट की कमी के कारण अक्सर महत्वपूर्ण टूर्नामेंट छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। लक्ष्य रुपाली ने बताया कि आने-जाने का किराया, ठहरने और खाने का खर्च वहन करना सामान्य खिलाड़ी के लिए मुश्किल होता जा रहा है।

बुनियादी ढांचे के विस्तार की उठी मांग

सुजीत सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं आज भी टेबल टेनिस की मुख्यधारा से कटी हैं। ग्रामीण परिवेश के युवाओं के पास न तो इस महंगे खेल के लिए जरूरी आधुनिक उपकरण हैं और न ही उनके पास उचित प्रशिक्षण का कोई माध्यम। खिलाड़ियों का तर्क है कि जब तक प्रशासन ग्रामीण स्तर पर छोटे-छोटे खेल हॉल विकसित नहीं करता और वहां बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराता, तब तक गांव के प्रतिभावान बच्चे इस खेल से नहीं जुड़ पाएंगे। राज्यस्तरीय खिलाड़ी आरव महेश्वरी बोले, वर्तमान में इस खेल का केंद्र केवल शहरी इलाकों के कुछ चुनिंदा संस्थानों तक सीमित होकर रह गया है। तहसील और ब्लॉक स्तर पर टेबल टेनिस के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए। ग्रामीण युवाओं को मुफ्त या रियायती प्रशिक्षण की सुविधा दी जाए, ताकि संसाधनों की कमी किसी होनहार खिलाड़ी के सपने में बाधा न बने। इसकी मदद से ग्रामीण अंचल से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल सकें।

खिलाड़ियों की सेहत भगवान भरोसे

राष्ट्रीय खिलाड़ी सौम्या सिंह ने बताया कि टेबल टेनिस जैसे तीव्र गति वाले खेल में मांसपेशियों में खिंचाव का जोखिम हमेशा बना रहता है। खेल के दौरान होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के लिए खिलाड़ियों के पास कोई सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना नहीं है। इसके अलावा न ही जिले के अस्पतालों में उन्हें उपचार के दौरान कोई विशेष छूट या प्राथमिकता मिलती है। राज्यस्तरीय खिलाड़ी विराट और रियांस बोले, आर्थिक रूप से मध्यम वर्गीय खिलाड़ियों के लिए महंगी चिकित्सा सेवाओं का खर्च वहन करना खेल छोड़ने के समान है। खिलाड़ी कायरा और तृषा ने कहा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से खिलाड़ियों के लिए विशेष हेल्थ कार्ड जारी किए जाने चाहिए, जिससे उन्हें निजी अस्पतालों में मुफ्त या रियायती इलाज की सुविधा मिल सके। इसके अतिरिक्त अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा की सुविधा भी प्रदान की जाए।

प्राइवेट स्कूलों तक सिमटा खेल

राष्ट्रीय खिलाड़ी हर्षित सिंह, विराट सिंह और सत्यम राय ने कहा कि बड़े निजी स्कूलों में टेबल टेनिस को खेल गतिविधियों का हिस्सा बनाया गया है, वहीं सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम और खेल कैलेंडर में इसे कोई स्थान नहीं मिला है। इसके कारण आम जनमानस में इस खेल को लेकर जागरूकता का भारी अभाव है। अनमोल, अयान बोले, क्रिकेट और फुटबॉल जैसे खेलों की तुलना में टेबल टेनिस को महत्व न मिलने से नई प्रतिभाएं इस क्षेत्र में करियर बनाने से हिचकिचाती हैं। कार्तिक, कृषा रुपाली ने कहा कि यदि सरकार प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के सरकारी स्कूलों में टेबल टेनिस को अनिवार्य रूप से शामिल करे तो बच्चों में इस खेल के प्रति रुचि जगेगी। समाज के अन्य वर्गों और संस्थाओं का सहयोग भी बढ़ेगा।

हमारी व्यथा सुनें

1. प्रशासन को टेबल टेनिस को बढ़ावा देने के लिए आगे आना चाहिए। सुविधाओं के अभाव में काशी के होनहार खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

- गौरव प्रभाकर

2. सिगरा स्टेडियम में मल्टीपर्पज हॉल बनकर तैयार है, लेकिन कोच न होने से खिलाड़ी वहां अभ्यास नहीं कर पा रहे। यह संसाधनों की बड़ी बर्बादी है।

- सुजीत सिंह

3. टेबल टेनिस महंगा खेल है। मध्यवर्गीय परिवारों के लिए महीने का हजारों रुपये खर्च कर पाना मुमकिन नहीं है। प्रशासन के ओर से सहयोग नहीं मिलता है।

- हर्षित सिंह

4. एक दिन में अभ्यास के दौरान कई बॉल टूट जाती हैं। प्रशासन को कम से कम खेल उपकरण और किट उपलब्ध कराने में सहयोग करना चाहिए।

- सौम्या सिंह

5. खिलाड़ियों के लिए कोई स्वास्थ्य बीमा या सरकारी चिकित्सा सुविधा नहीं है। चोट लगने पर सारा इलाज अपनी जेब से कराना पड़ता है, जो बहुत भारी है।

- सत्यम राय

6. काशी के खिलाड़ी निजी संस्थानों के भरोसे राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं। अगर सरकारी प्रोत्साहन और सम्मान मिले तो हम भी विदेशों में तिरंगा फहरा सकते हैं।

- विराट सिंह

7. सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में टेबल टेनिस को शामिल किया जाना चाहिए। जागरूकता के बिना इस खेल को लोकप्रियता नहीं मिल पाएगी।

- कृषा रुपाली

8. राष्ट्रीय स्तर पर खेलने जाने वाले खिलाड़ियों को यात्रा में कोई रियायत नहीं मिलती। किराए के बोझ के कारण कई बार खिलाड़ी अच्छे टूर्नामेंट छोड़ देते हैं।

- कार्तिक प्रसाद

9. ग्रामीण क्षेत्रों में टेबल टेनिस का नामोनिशान नहीं है। तहसील स्तर पर खेल हॉल और कोच उपलब्ध कराए जाएं तो गांव से भी चैंपियन निकल सकेंगे।

- विराज सिंह

10. खिलाड़ियों की मांसपेशियों में खिंचाव आम है, लेकिन सरकारी फिजियोथेरेपिस्ट की कोई व्यवस्था नहीं है। स्वास्थ्य कार्ड योजना लागू करना अनिवार्य है।

- देव त्रिपाठी

11. प्राइवेट स्कूलों में तो टेबल टेनिस की मेजें सजी हैं, लेकिन गरीब तबके का बच्चा इस खेल को सिर्फ देख पाता है, खेल नहीं पाता। खेल को सस्ता बनाना होगा।

- आरव महेश्वरी

12. वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय स्तर की टेबल टेनिस अकादमी की सख्त जरूरत है। बिना आधुनिक कोच और प्रशिक्षण के पदक जीतना बहुत मुश्किल है।

- दीपायन

सुझाव और शिकायतें

सुझाव

1. सिगरा स्पोर्टर्स स्टेडियम के हॉल में तत्काल प्रभाव से स्थायी कोच की नियुक्ति की जाए। इसकी मदद से खिलाड़ियों का प्रशिक्षण सुचारू हो सकेगा।

2. प्रशासन को टेबल टेनिस के उपकरणों पर सब्सिडी देनी चाहिए या खेलसंघों के माध्यम से खिलाड़ियों को रियायती दरों पर किट उपलब्ध कराई जाए।

3. खिलाड़ियों के लिए विशेष यात्रा पास और इसके अलावा रेलवे यात्रा भत्ता सुनिश्चित किया जाए ताकि वे आर्थिक तंगी के कारण टूर्नामेंट न छोड़ें।

4. जिला स्वास्थ्य अधिकारी खिलाड़ियों के लिए स्वास्थ्य कार्ड जारी करें, जिससे उन्हें निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिले। स्वास्थ्य बीमा भी बनें।

5. ग्रामीण स्तर पर खेल के हॉल बनाए जाएं, सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में भी टेबल टेनिस को शामिल कर जागरूकता बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

शिकायत

1. कोच न होने के कारण सिगरा स्टेडियम का मल्टीपर्पज हॉल खिलाड़ियों के लिए बंद पड़ा है, जिससे अभ्यास बाधित है। खिलाड़ियों को दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।

2. टेबल टेनिस के उपकरण जैसे रैकेट और बॉल अत्यधिक महंगे होते हैं। इनका खर्च उठाना किसी भी मध्यम वर्गीय परिवार के खिलाड़ी के लिए कठिन है।

3. खिलाड़ियों को राज्य और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जाने के लिए यात्रा और रेल किराये में कोई प्रशासनिक रियायत नहीं मिलती है। टूर्नामेंट छूट जाते हैं।

4. चोट लगने पर और मांसपेशियों में खिंचाव होने पर खिलाड़ियों के पास कोई स्वास्थ्य बीमा या मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं है। परेशान होते हैं।

5. ग्रामीण अंचलों और सरकारी स्कूलों में टेबल टेनिस के बुनियादी ढांचे और जागरूकता का अभाव है। इसके कारण खिलाड़ी आगे नहीं आ पा रहे हैं।

एक नजर में

- डिस्ट्रिक्ट टेबल टेनिस एसोसिएशन की स्थापना 2010 में हुई थी

- 15- सदस्यों की संख्या

- 55 खिलाड़ी एसोसिएशन के अंतर्गत प्रशिक्षित हो रहे हैं

- 150 से अधिक टेबल टेनिस खिलाड़ी वाराणसी में हैं

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