यूपी विधानसभा में आरक्षण पर घमासान, माता प्रसाद पांडेय के आपत्तिजनक शब्द पर भड़के संजय निषाद
यूपी विधानसभा में उस समय माहौल गरमा गया, जब नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद के बीच आरक्षण के मुद्दे पर तीखी नोकझोंक हो गई। बहस के दौरान माता प्रसाद पांडेय द्वारा एक जातिगत शब्द के इस्तेमाल पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को उस समय माहौल गरमा गया, जब नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद के बीच आरक्षण के मुद्दे पर तीखी नोकझोंक हो गई। बहस के दौरान माता प्रसाद पांडेय द्वारा एक जातिगत शब्द के इस्तेमाल पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को दखल देना पड़ा। हस्तक्षेप करते हुए संबंधित आपत्तिजनक शब्द को कार्यवाही से हटाने के निर्देश दिए और सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। अध्यक्ष के आश्वासन के बाद स्थिति शांत हुई।
सदन में अपने भाषण के दौरान माता प्रसाद पांडेय ने कहा, 'हमने एक केवट से पूछा कि तुम *** बनोगे? इस पर वह मुझ पर गुस्सा हो गया। कहा- मुझे क्यों? इस पर हमने कहा कि यही आपको बनाना चाह रहे हैं।' संजय निषाद पर तंज कसते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा, 'निषाद समाज को आरक्षण क्यों नहीं दिला रहे हैं। मुख्यमंत्री जी अब तो संजय निषाद आप के साथ हैं अब इनके आरक्षण का मुद्दा समाप्त कर दीजिए। आरक्षण में मुझसे ज्यादा संघर्ष किसी ने नहीं किया है। यहां जो संजय निषाद बैठे हैं, उन्होंने भी नहीं, लेकिन हमेशा बोलते रहते हैं। समितियों की नीलामी कराने आप गए थे। वहां मारपीट हो गई थी। ये भाग खड़े हुए। मार हुई और बाद मुकदमा लिखा गया।'
स्पीकर को करना पड़ा बीच-बचाव
इस पर संजय निषाद भड़क गए। उन्होंने कहा, 'आपने बहुत गलत शब्द का इस्तेमाल किया। इसके बाद हंगाम हो गया। विधानसभा अध्यक्ष ने संजय निषाद को बीच बचाव करना पड़ा। उन्होंने दोनों लोगों को समझाते हुए सीट पर बैठने को कहा। साथ ही स्पीकर ने विधानसभा की कार्यवाही से आपत्तिजनक शब्द को हटाने का निर्देश दिया।
भ्रष्टाचार, कानून समेत कई मुद्दों पर योगी सरकार को घेरा
विधानसभा सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने राज्य सरकार को कई अहम मुद्दों पर घेरते हुए भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, एनकाउंटर नीति और रोजगार जैसे विषयों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सदन में भ्रष्टाचार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर कोई ठोस चर्चा नहीं हुई, जबकि आम जनता सबसे अधिक भ्रष्टाचार से ही परेशान है।
उन्होंने कहा कि आईएएस अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच के मामले लोकायुक्त के पास लंबित हैं और कई अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ शिकायतें भी दर्ज हैं, लेकिन उनकी स्थिति की कोई स्पष्ट जानकारी सदन को नहीं दी गई। उनका कहना था कि यदि लोकायुक्त की सिफारिशें सदन के पटल पर लाई जातीं, तो सदस्य भी उनकी समीक्षा कर सकते थे।
लोकायुक्त के कार्यकाल पर भी उठाए सवाल
उन्होंने लोकायुक्त के कार्यकाल पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि उनका कार्यकाल कब तक है। लोकायुक्त आठ वर्षों से पद पर हैं, इस विषय पर सरकार को स्पष्टता लानी चाहिए। कानून-व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हाल के मामलों में पुलिसकर्मियों का नाम आपराधिक घटनाओं में सामने आना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि डीजीपी कार्यालय प्रभावी ढंग से काम करता नहीं दिख रहा है और राज्य में कार्यवाहक व्यवस्था से काम चलाया जा रहा है।




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