UP Weather: लखनऊ का पारा जा सकता 43 डिग्री के पार, हीटवेव से इन जिलों में 50 डिग्री तक महसूस हुई गर्मी
राजस्थान के रेतीले इलाकों से हो कर आ रही गर्म दक्षिण पश्चिमी हवा और चिलचिलाती धूप ने शहर के मौसम का मिजार्ज गर्म कर दिया है। बुधवार को फिर धूप की तल्खी बढ़ गई। नतीजतन अधिकतम तापमान सामान्य से 2.0 डिग्री ज्यादा 41.1 दर्ज किया गया।

राजस्थान के रेतीले इलाकों से हो कर आ रही गर्म दक्षिण पश्चिमी हवा और चिलचिलाती धूप ने शहर के मौसम का मिजार्ज गर्म कर दिया है। बुधवार को फिर धूप की तल्खी बढ़ गई। नतीजतन अधिकतम तापमान सामान्य से 2.0 डिग्री ज्यादा 41.1 दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान भी सामान्य से 2.3 डिग्री अधिक 24.5 रहा। मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को दिन का पारा 43 डिग्री के पार जा सकता है।
धूप के तेवर बुधवार सुबह से ही तल्ख रहे। अमौसी स्थित मौसम मुख्यालय के अनुसार महाराष्ट्र के ऊपर प्रति चक्रवात की स्थिति ने पछुआ का रुख बदला हुआ है। हवा की गति तेज है लेकिन यह गर्म है। इसी वजह से गर्मी से राहत नहीं मिल रही है। 26 अप्रैल को प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, हालांकि यह कमजोर है लेकिन बादलों की आवाजाही से असर पड़ेगा।
सुलतानपुर, वाराणसी में 50 डिग्री तक महसूस हुई गर्मी
सूबे के आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, सुलतानपुर समेत कुल 13 जिलों में हीट इंडेक्स यानी ताप सूचकांक 40 से 50 डिग्री रहा। यानी दर्ज किए गए तापमान से अधिक गर्मी लोगों ने महसूस की। वहीं, 43.7 डिग्री के साथ प्रयागराज प्रदेश के सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान वाला जिला रहा। इसके अलावा बांदा में 43.8, सुलतानपुर में 43.3 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने बांदा, चित्रकूट समेत 22 जिलों के लिए हीट वेव यानी लू का यलो अलर्ट जारी किया है।
अवंतीबाई महिला अस्पताल (डफरिन) के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान खान का कहना है कि गर्मी में तापमान बढ़ने से नवजात से लेकर 14 वर्ष तक के बच्चे अधिक बीमार हो रहे हैं। इस मौसम में बच्चों में संक्रमण का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। बैक्टीरियल संक्रमण से पेट की सेहत बिगड़ रही है। ओपीडी में रोजाना औसतन 100 बच्चे आ रहे हैं। इनमें आधे से अधिक बच्चे शरीर में पानी की कमी से पेट में दर्द, दस्त के साथ बुखार के होते हैं। उल्टी, दस्त से शिथिल होने वाले नवजात को भर्ती करना पड़ रहा है।
24 घंटे के भीतर औसतन 25 रोगी अस्पताल पहुंचे
लोक बंधु अस्पताल के एमएस डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी का कहना है कि गर्मी और उमस में अधिक पसीना निकलने से लोग डिहाइड्रेशन की चपेट में आ रहे हैं। गर्मी बढ़ने पर चार दिन से शरीर में पानी की कमी, उल्टी, दस्त, बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ी है। इमरजेंसी में 24 घंटे के भीतर औसतन 25 रोगी गर्मी से बीमार होकर आ रहे हैं। कुछ को भर्ती कर इलाज मुहैया कराया जा रहा है। बच्चों की संख्या ज्यादा है।




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