UP SIR Strange anomalies in voter list 7.2 million voters are 15 years younger than or the same age as their parents यूपी एसआईआर; नोबल विजेता अमर्त्य सेन जैसे 72 लाख मामले, साफ्टवेयर ने पकड़ी गड़बड़ी, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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यूपी एसआईआर; नोबल विजेता अमर्त्य सेन जैसे 72 लाख मामले, साफ्टवेयर ने पकड़ी गड़बड़ी

पश्चिम बंगाल में नोबल पुरस्कार विजेता व अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन की उम्र और उनकी मां की आयु में 15 साल से भी कम अंतर होने पर नोटिस जारी किया गया। उसके बाद ऐसी विसंगतियों पर देश भर में चर्चा छिड़ गई है। यूपी में ऐसे 72 लाख वोटर मिले हैं।

Wed, 21 Jan 2026 06:38 AMYogesh Yadav आशीष त्रिवेदी, लखनऊ
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यूपी एसआईआर; नोबल विजेता अमर्त्य सेन जैसे 72 लाख मामले, साफ्टवेयर ने पकड़ी गड़बड़ी

यूपी की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 72 लाख ऐसे मतदाता हैं, जिनकी आयु में अपने माता-पिता से 15 साल व उससे भी कम का अंतर है। जबकि शादी की न्यूनतम आयु लड़की की 18 साल व लड़के की 21 वर्ष है। ऐसे में मतदाता सूची में माता-पिता की आयु से उनके बच्चों के इस अजब-गजब अंतर से सभी हैरान हैं। हाल ही में पश्चिम बंगाल में नोबल पुरस्कार विजेता व अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन की उम्र और उनकी मां की आयु में 15 साल से भी कम अंतर होने पर नोटिस जारी किया गया। उसके बाद ऐसी विसंगतियों पर देश भर में चर्चा भी छिड़ गई है। सॉफ्टवेयर की मदद से ऐसी गड़बड़ियां पकड़ी गईं, जिसमें आयु का अंतर बहुत कम आया है। इसे तार्किक विसंगति (लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी) की श्रेणी माना जा रहा है। इस श्रेणी में यूपी में कुल 2.22 करोड़ मतदाता आते हैं।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत ऐसे लोगों को चिह्नित किया गया है। शादी के लिए लड़के की आयु 21 वर्ष व लड़की की आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। अब इससे कम उम्र में शायद ही किसी की शादी होती हो। कुछ एक अपवाद छोड़ भी दें तो कम से माता-पिता से पुत्र व पुत्री की आयु में 10 से 15 साल जितना कम अंतर हो ही नहीं सकता। माता-पिता की उम्र से कम से कम एक साल अधिक का अंतर तो होगा ही। ऐसे में न्यूनतम आयु सीमा पर विवाह होने पर भी 19 व 22 वर्ष का अंतर तो माता-पिता की उम्र से बच्चे की उम्र के बीच होगा ही।

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यही कारण है कि इसे तार्किक विसंगतियों की श्रेणी में रखे गए हैं। यही नहीं बाबा-दादी की उम्र व पौत्र-पौत्री की उम्र में 50 साल से कम अंतर वाले भी कई मतदाता हैं। वर्तमान में जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची व वर्ष 2003 की मतदाता सूची से यह भिन्नता पकड़ी गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय की ओर से 83 लाख ऐसे मतदाता चिह्नित किए गए हैं, जिनके खुद के नाम व पिता के नाम इस मतदाता सूची और वर्ष 2003 की मतदाता सूची से भिन्न हैं। ऐसे में अब इन्हें दूसरे चरण में नोटिस दी जाएगी।

यह मतदाता तार्किक विसंगति की श्रेणी में

-ऐसे मतदाता जिनके पिता का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा रहा है।

-ऐसे मतदाताओं के नाम जिनके छह या उससे अधिक बेटे हैं।

-ऐसे मतदाता जिनकी आयु में 15 साल व उससे कम का अंतर है। जिनके बाबा-दादी की उम्र में पौत्र-पौत्री से 50 साल से कम अंतर है।

-ऐसे मतदाता जिनकी आयु 45 साल या उससे अधिक है और वर्ष 2003 की मतदाता सूची में उनका नाम नहीं है।

फरवरी में ऐसे लोगों को दिया जाएगा नोटिस

यूपी में पहले चरण में 1.04 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनके खुद के नाम, माता-पिता, बाबा-दादी व नाना-नानी के नाम से वर्ष 2003 की सूची से मिलान नहीं हो पाया है। अब दूसरी श्रेणी में ऐसे मतदाता हैं, जिन्हें तार्किक विसंगति की श्रेणी में रखा गया है। अब इन्हें दूसरे चरण में फरवरी में नोटिस देकर दस्तावेज दिखाने को बुलाया जाने की तैयारी है। आगे भारत निर्वाचन आयोग की ओर से दिशा-निर्देश मिलने पर आगे की कार्रवाई होगी।

छिटपुट गलती वालों को दे सकते हैं राहत

ऐसे मतदाता जिनके पिता के नाम में भिन्नता है या फिर खुद उनके नाम की स्पेलिंग में कोई छिटपुट त्रुटि है तो उन्हें राहत मिल सकती है। ऐसे मतदाताओं को नोटिस न देकर उनके घर बीएलओ जाकर प्रमाण पत्र देखकर उसे एप पर ही ठीक कर देंगे।

तार्किक विसंगति वाले कुल मतदाता- 2.22 करोड़

माता-पिता की आयु से सिर्फ 15 साल छोटे मतदाता- 72 लाख

पुरानी सूची से पिता व खुद का नाम भिन्न होने वाले मतदाता- 83 लाख

45 साल की आयु के बावजूद पुरानी सूची में नाम नहीं व अन्य श्रेणी वाले - 67 लाख

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