UP Prayagraj North Tech Symposium Defense State Minister Sanjay Seth Said 50 percent Private sector in Defense प्रयागराज में संजय सेठ ने बताया- रक्षा क्षेत्र में निजी सेक्टर की भागीदारी 50 प्रतिशत होगी, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
More

प्रयागराज में संजय सेठ ने बताया- रक्षा क्षेत्र में निजी सेक्टर की भागीदारी 50 प्रतिशत होगी

प्रयागराज में आयोजित नॉर्थ टेक सिम्पोजियम में दूसरे दिन रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ शामिल हुए। उन्होंने कहा कि देश का रक्षा क्षेत्र प्राइवेट सेक्टर की मदद से आत्मनिर्भर बन रहा है। रक्षा के क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी 23 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की योजना है।

Wed, 6 May 2026 07:57 AMSrishti Kunj प्रमुख संवाददाता, प्रयागराज
share
प्रयागराज में संजय सेठ ने बताया- रक्षा क्षेत्र में निजी सेक्टर की भागीदारी 50 प्रतिशत होगी

प्रयागराज में आयोजित नॉर्थ टेक सिम्पोजियम में दूसरे दिन रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ शामिल हुए। उन्होंने कहा कि देश का रक्षा क्षेत्र प्राइवेट सेक्टर की मदद से आत्मनिर्भर बन रहा है। रक्षा के क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी 23 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की योजना है। न्यू कैंट स्थित कोबरा ऑडिटोरियम में भारतीय सेना की उत्तरी एवं मध्य कमान तथा भारतीय रक्षा निर्माता सोसाइटी की ओर से ‘रक्षा त्रिवेणी संगम-प्रौद्योगिकी, उद्योग और सैन्य कौशल का संगम’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत रक्षा क्षेत्र में आयातक नहीं बल्कि निर्यातक बनेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाने के पक्षधर हैं। सैन्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से प्रयागराज में सिम्पोजियम का आयोजन किया जा रहा है। नवाचार के माध्यम से डिफेंस सेक्टर को मजबूत करना है और आत्मनिर्भर बनाना है। इस काम में एमएसएमई, स्टार्टअप समेत अन्य कंपनियों को मदद करनी होगी। सरकार रक्षा उत्पादन करने वाली कंपनियों की आर्थिक मदद कर रही है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:स्मार्ट मीटर पर फंसा पावर कॉरपोरेशन, नियामक आयोग को जवाब के लिए कल तक की डेडलाइन

उत्पादन का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ रहा है। आज हमें टेक्नोलॉजी के आयात का इंतजार नहीं करना है, हम अपने लिए टेक्नोलॉजी खुद तैयार कर सकते हैं। कंपनियों का नवाचार सैनिकों का हौसला बढ़ाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की बात को दोहराते हुए मंत्री संजय सेठ ने कहा कि कंपनियों को निरंतर प्रयोग करते रहना होगा। पुरानी तकनीक पर अधिक दिन निर्भर नहीं रह सकते। देश में सात करोड़ एमएसएमई और 10 लाख स्टार्टअप हैं। 16 हजार एमएसएमई रक्षा के क्षेत्र में काम कर रही हैं और भी एमएसएमई और स्टार्टअप को इस क्षेत्र में आना होगा।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा उद्योग का हौसला बढ़ा

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने रक्षा उत्पाद बनाने वाली कंपनी के प्रतिनिधियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि ये कंपनियां सरहद पर तैनात सैनिक के पीछे खड़े योद्धा की तरह काम कर रही हैं। देवताओं को जब शक्ति की आवश्यकता थी तो भगवान विश्वकर्मा ने उन्हें चमत्कारिक शस्त्र दिए, इसी तरह हमारी रक्षा कंपनियां अब अलग-अलग आधुनिक तकनीक और हथियार सेना को दे रही हैं। कारखाने में पसीना अधिक बहाया जाता है, इसलिए सीमा पर खून कम बहता है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:योगी कैबिनेट विस्तार की तैयारियां तेज, यह नाम सबसे आगे, संघ की शरण में कई मंत्री

ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि एक साल पहले पूरी दुनिया ने भारत की वीरता और पराक्रम को देखा। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद देश के 140 करोड़ लोग बदला चाहते थे। आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर भारत की सेना ने कुछ घंटों में पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश के रक्षा उद्योग का हौसला बढ़ा है। कंपनियां अब नए जोश से काम कर रही हैं। राष्ट्रपति ने कहा था, न आंख दिखाना है, न आंख चुराना है। वही अब कर रहे हैं। 10 साल पहले सरहद का गांव अंतिम गांव होता था। अब सीमा का गांव पहला गांव है।

अब स्वदेशी गन से होगी देश की सुरक्षा

सेना और उत्तर प्रदेश पुलिस के जवान अब स्वदेशी आधुनिक गन से देश की सुरक्षा करेंगे। बेंगलुरू की कंपनी ट्रिपलएस में निर्मित अलग-अलग तरह की गन सेना को देने की तैयारी है। खास गन उत्तर प्रदेश पुलिस को दी गई है। अर्द्धसैनिक बल के पास भी यह गन पहुंच गई है। अर्द्धसैनिक बल की एक इकाई जर्मनी में बनी गन की जगह स्वदेशी बंदूक इस्तेमाल करने जा रही है। पूरी तरह स्वदेशी गन बनाने वाली कंपनी ट्रिपलएस के प्रतिनिधि कर्नल राजवीर सिंह ने आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि सेना में इसका ट्रायल हो गया है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:BJP के दो विधायकों में जमीन कब्जे पर छिड़ी रार, गालीगलौज-हाथापाई तक पहुंचा मामला

अभी तक सेना, अर्द्धसैनिक बल और प्रदेश पुलिस जिस गन का इस्तेमाल करती रही, उसकी रेंज 1400 मीटर थी। कंपनी में निर्मित गन 1800 मीटर दूरी तक मार कर सकती है। कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि पहली बार देश में बनी गन की मांग विदेशों में हो रही है। कंपनी की गन आर्मेनिया निर्यात की गई है। नेपाल की सरकार ने भी इस गन को मांगा है। और भी देशों से गन की मांग हो रही है। कंपनी के अन्य प्रतिनिधि ने बताया कि सरहद पर अब गन से युद्ध नहीं होता, लेकिन देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बहुत ही कारगर है। सरहद पर तैनात सेना के जवान भी घुसपैठ रोकने के लिए गन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

मंत्री ने रक्षा उत्पादों की प्रदर्शनी देखी

कार्यक्रम में उत्तरी कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, प्रथम कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल वी हरिहरन, सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) के अध्यक्ष अरुण टी रामचंदानी, उद्योग जगत के दिग्गजों, नवप्रवर्तकों, स्टार्ट-अप और शिक्षा जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। रक्षा कंपनियों के प्रतिनिधियों को संबोधित करने के बाद मंत्री ने पास में लगी रक्षा उत्पादों की प्रदर्शनी देखी। इसके बाद खुले आसमान के नीचे सेना का हिस्सा बनने के लिए तैयार सामानों का जीवंत प्रदर्शन भी देखा। मंत्री ने संबोधन में पिछले साल आयोजित महाकुम्भ का भी जिक्र किया।

लेटेस्ट Hindi News, Lucknow News, Meerut News, Ghaziabad News, Agra News, Kanpur News , Pareet Yadav Death Live और UP News अपडेट हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।