यूपी में बिजली संकट; उपलब्धता से ज्यादा आपूर्ति की चुनौती, कम क्षमता के कारण हो रहा ब्रेकडाउन
यूपी में बिजली उपभोक्ताओं ने करीब 8 करोड़ 57 लाख किलोवॉट का लोड स्वीकृत कराया हुआ है। दूसरी तरफ 132 केवी ट्रांसफॉर्मर की कुल क्षमता 6 करोड़ 25 लाख 76 हजार किलोवॉट ही है। ग्राहक स्वीकृत लोड से ज्यादा बिजली इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे ही ब्रेकडाउन हो रहे हैं।

UP News: उत्तर प्रदेश में बिजली संकट की बड़ी वजह बिजली की उपलब्धता के बजाय आपूर्ति की चुनौती से जुड़ी है। प्रदेश के कुल बिजली उपभोक्ताओं ने जो लोड स्वीकृत करवाया है, वह आपूर्ति क्षमता से लगभग दो करोड़ किलोवॉट ज्यादा है। ऐसे में बढ़ती गर्मी में जब उपभोक्ता अपने स्वीकृत लोड के बराबर भी बिजली चाह रहे हैं तो कम क्षमता की वजह से ब्रेकडाउन की संख्या में इजाफा हो रहा है।
प्रदेश में लगभग 3 करोड़ 73 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं का कुल संयोजन भार करीब 8 करोड़ 57 लाख किलोवॉट है। वहीं, दूसरी तरफ 132 केवी ट्रांसफॉर्मर की कुल क्षमता 6 करोड़ 25 लाख 76 हजार किलोवॉट है। चिलचिलाती गर्मी में बिजली की मांग बढ़ रही है और तमाम उपभोक्ता अपने स्वीकृत लोड से ज्यादा बिजली इस्तेमाल कर रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, जिन फीडरों पर क्षमता से ज्यादा मांग बढ़ रही है, वहां ब्रेकडाउन हो रहे हैं।
क्षमता के अलावा फॉल्ट दूर करने वाली टीम की संख्या में हुई कटौती ने भी बिजली संकट बढ़ा दिया है। हर उपकेंद्र पर एक समय में एक ही टीम मरम्मत के लिए है। उपकेंद्रों पर तीन या इससे ज्यादा फीडर हैं। कई उपकेंद्रों पर फीडर की संख्या सात-आठ भी है। ऐसे में अगर किसी उपकेंद्र के एक से ज्यादा फीडर पर एक समय में फॉल्ट आए तो बारी-बारी उन्हें ठीक किया जाएगा और जब तक एक जगह काम चल रहा होगा, तब तक दूसरी जगह का उपभोक्ता बिजली न आने से परेशान रहने को मजबूर है।
पीक मांग के वक्त 2336 मेगावॉट बिजली खरीदी एक्सचेंज से
रविवार रात को बिजली की अधिकतम मांग का नया रिकॉर्ड (31,804 मेगावॉट) दर्ज किया गया। इस दरम्यान पावर कॉरपोरेशन को बिजली एक्चेंज से 2336 मेगावॉट बिजली खरीदनी पड़ी। वहीं, राज्य विद्युत उत्पादन निगम का अपने स्रोतों से उत्सर्जन 7106 मेगावॉट था जबकि उसकी क्षमता 9220 मेगावॉट है। निर्धारित आयात स्रोतों से 10,718 मेगावॉट बिजली ली गई। उत्पादन निगम ने जल विद्युत से 273 मेगावॉट बिजली उत्सर्जित की। जाहिर है कि अपने स्रोतों और अनुबंध के आधार पर पावर कॉरपोरेशन बिजली की व्यवस्था तो कर ले रहा है। बड़ी दिक्कत इनकी आपूर्ति में आ रही है।
जनता को रिकॉर्ड नहीं राहत चाहिए : उपभोक्ता परिषद
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कहा कि जनता को रिकॉर्ड नहीं बल्कि राहत चाहिए। बार-बार आपूर्ति बाधित होने की वजह से उसे परेशानी झेलनी पड़ रही है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने अधिकतम मांग के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस समय पावर कॉरपोरेशन के पास जितनी बिजली है, उतनी ही अधिकतम मांग हो जा रही है।
रविवार को दक्षित भारत के मौसम में बदलाव हुआ। बारिश हुई तो एक्सचेंज पर बिजली ज्यादा आ गई तो उसकी आपूर्ति करके रिकॉर्ड बताया जा रहा है। कुल विद्युत संयोजन के लोड के आधार पर अगर बिजली उपलब्ध होती तो मांग 35 हजार मेगावॉट तक पहुंच सकती थी। उन्होंने कहा कि फॉल्ट दूर करने वाली टीम की संख्या बढ़ाने, आपूर्ति में वर्टिकल व्यवस्था खत्म करने और आपूर्ति ढांचे को मजबूत करने के बाद ही स्थितियां सामान्य हो सकती हैं।




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