UP police officers cannot resign without two months notice important order allahabad High Court दो महीने की नोटिस के बिना इस्तीफा नहीं दे सकते यूपी पुलिस के अधिकारी, हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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दो महीने की नोटिस के बिना इस्तीफा नहीं दे सकते यूपी पुलिस के अधिकारी, हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश में कहा है कि यूपी पुलिस का कोई अधिकारी इस्तीफा देना चाहता है तो उसे पुलिस अधिनियम 1961 के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस विनियमावली के विनियम 505 के तहत अनिवार्य दो महीने का नोटिस विभाग को देना होगा।

Thu, 13 Nov 2025 09:38 PMDinesh Rathour प्रयागराज, विधि संवाददाता
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दो महीने की नोटिस के बिना इस्तीफा नहीं दे सकते यूपी पुलिस के अधिकारी, हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश

पुलिस अधिकारियों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश में कहा है कि यूपी पुलिस का कोई अधिकारी इस्तीफा देना चाहता है तो उसे पुलिस अधिनियम 1961 के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस विनियमावली के विनियम 505 के तहत अनिवार्य दो महीने का नोटिस विभाग को देना होगा। इस प्रावधान का पालन न करने पर इस्तीफा दोषपूर्ण हो जाएगा। यह आदेश न्यायमूर्ति विकास बुधवार ने दिया है।

याची अजीत सिंह को 2010 में दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल और बाद में 2017 में उत्तर प्रदेश पुलिस में सबइंस्पेक्टर के पद पर नियुक्त किया गया था। इसके बाद उसने दिल्ली पुलिस में पुनः शामिल होने के लिए चिकित्सा आधार पर कार्यमुक्ति का अनुरोध किया। उसका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया और प्रशिक्षण अवधि व्यय की वसूली शुरू कर दी गई। इसके बाद याची ने यह तर्क देते हुए इस्तीफा वापस लेने की मांग की कि अनिवार्य नोटिस अवधि के अभाव में उसका आवेदन त्रुटिपूर्ण होगा और इस्तीफा अमान्य हो जाएगा। उसका यह अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया और इस अस्वीकृति आदेश को याचिका में चुनौती दी गई।

इस्तीफा देने की वजह बताने तक पद से नहीं हट सकता पुलिस अधिकारी

कोर्ट ने माना कि पुलिस अधिनियम की धारा 9 और उत्तर प्रदेश पुलिस विनियमावली की धारा 505 के संयुक्त अध्ययन के आधार पर कोई भी अधिकारी जिला पुलिस अधीक्षक की स्पष्ट अनुमति के बिना अपने पद से तब तक नहीं हट सकता, जब तक उसने अपने वरिष्ठ अधिकारी को लिखित रूप में त्यागपत्र देने का इरादा न बता दिया हो। कोर्ट ने आगे कहा कि इन प्रावधानों के तहत संबंधित अधिकारी का यह कर्तव्य है कि वह अपने त्यागपत्र देने के इरादे से दो महीने पहले सूचना दे। न्यायमूर्ति विकास बुधवार ने कहा कि जब नोटिस दोषपूर्ण था और पुलिस अधिनियम की धारा 9 के तहत निहित प्रावधानों के अनुरूप नहीं था तो पुलिस विनियमन के विनियमन 505 के साथ पढ़ा जाए, इस पर ध्यान नहीं दिया जा सकता था। कोर्ट ने दिनेश कुमार बनाम कमांडेंट 15वीं वाहिनी पीएसी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया और कहा कि दो महीने की नोटिस अवधि का उद्देश्य दोहरा है।

पहला नियोक्ता को वैकल्पिक व्यवस्था करने का समय देना और दूसरा कर्मचारी को अपने इस्तीफे पर पुनर्विचार करने का अवसर प्रदान करना है। इसके अलावा पुलिस विनियमन के विनियमन 505 का पहला प्रावधान यह भी स्पष्ट करता है कि इस्तीफा प्राधिकारी द्वारा केवल नोटिस की समाप्ति तिथि के बाद की तिथि से ही स्वीकार किया जा सकता है, उससे पहले नहीं। इसका अर्थ यह है कि इस्तीफा चाहने वाले पुलिसकर्मी को दो महीने पहले नोटिस देना होगा। इसके अलावा पुलिस विनियमन का विनियमन 505 एक और पहलू जोड़ता है कि उसका इस्तीफा तब तक स्वीकार नहीं किया जा सकता, जब तक कि वह अपना ऋण पूरी तरह से चुका न दे। कोर्ट ने माना कि इस मामले में याची का इस्तीफा भी सशर्त था। 28 दिसंबर 2018 के पत्र के माध्यम से याची ने इस्तीफा देकर दिल्ली पुलिस में वापसी की मांग की थी। यह माना गया कि ऐसा इस्तीफा पुलिस अधिनियम की धारा 9 या संबंधित विनियमों के दायरे में नहीं आता। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी द्वारा इस्तीफा केवल नोटिस अवधि की समाप्ति की तारीख के बाद की तारीख को ही स्वीकार किया जा सकता है, उससे पहले नहीं। यह पाते हुए कि इस मामले में उक्त बातों को पूरा नहीं किया गया है, कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली।

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