हाईकोर्ट का संज्ञान, डीजीपी का अभियान: दो साल से लापता 88000 लोगों को 15 दिन में मिल गए
उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुमशुदा लोगों की तलाश में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। डीजीपी राजीव कृष्ण के नेतृत्व में चलाए गए विशेष अभियान के तहत महज 15 दिनों के भीतर 88 हजार से अधिक लापता लोगों को ट्रेस कर लिया गया है।

उत्तर प्रदेश में गुमशुदा व्यक्तियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षित बरामदगी को लेकर चलाए गए विशेष पुलिस अभियान के चौंकाने वाले और सुखद परिणाम सामने आए हैं। हाईकोर्ट का स्वतः संज्ञान के बाद सख्ती और पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण के कड़े निर्देशों के बाद पुलिस ने मात्र 15 दिनों के भीतर 88,022 गुमशुदा लोगों को ट्रेस करने में सफलता प्राप्त की है। हालांकि इनमें ज्यादातर वह लोग हैं जो पुलिस की फाइल में तो लापता थे लेकिन अपनों को मिल चुके थे। अब पुलिस ने डिजिटल डेटा को भी दुरुस्त किया है।
क्या थी पृष्ठभूमि?
आंकड़ों के अनुसार, 01 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच प्रदेश में गुमशुदगी के कुल 1,08,372 मामले दर्ज थे। जांच में यह गंभीर तथ्य सामने आया कि बड़ी संख्या में लोग वास्तव में अपने घर लौट चुके थे, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में उनकी बरामदगी दर्ज नहीं थी। डिजिटल अभिलेख (CCTNS) अपडेट न होने के कारण कागजों पर बरामदगी दर बेहद कम दिख रही थी। इसका संज्ञान लेते हुए डीजीपी ने पूरे प्रदेश में युद्ध स्तर पर अभियान चलाने का आदेश दिया।
अभियान की कार्यवाही और पुलिस की सक्रियता
डीजीपी के निर्देश पर हर जिले और थाने में विशेष टीमें गठित की गईं। इन टीमों ने लापता लोगों के परिजनों से सीधा संपर्क किया, संभावित ठिकानों पर छापेमारी की और दूसरे राज्यों की पुलिस से समन्वय स्थापित किया।
जांच में पाया गया कि कई लोग स्वेच्छा से कहीं और रह रहे थे, कुछ का निधन हो चुका था, जबकि एक बड़ा हिस्सा ऐसा था जो वापस तो आ गया था, लेकिन परिजनों ने पुलिस को सूचित करना जरूरी नहीं समझा। इन सभी 88,022 लोगों का विवरण अब CCTNS प्रणाली में अपडेट कर दिया गया है, जिससे बरामदगी का प्रतिशत उछलकर 81.22% पर पहुंच गया है।
भविष्य की रणनीति: 'यक्ष ऐप' और 'मिशन वात्सल्य'
भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए डीजीपी राजीव कृष्ण ने 14 फरवरी 2026 को एक विस्तृत परिपत्र जारी किया है। अब हर महीने एसपी और एसएसपी स्तर पर बरामदगी के लिए विशेष अभियान चलेंगे। अब लापता बच्चों का विवरण भारत सरकार के "मिशन वात्सल्य पोर्टल" पर अपलोड किया जाएगा।
बीट स्तर के सिपाहियों को 'यक्ष ऐप' के माध्यम से गुमशुदा लोगों की जानकारी तुरंत उनके मोबाइल पर मिलेगी, जिससे त्वरित कार्यवाही संभव होगी। डीजीपी ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी गुमशुदगी के पीछे संगठित गिरोह या मानव तस्करी का साक्ष्य मिलता है, तो मामला तुरंत 'एण्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट' (AHTC) को सौंपा जाएगा। जोन और रेंज स्तर के अधिकारी हर तीन महीने में इन मामलों की समीक्षा करेंगे।




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