'मुझसे मिल लो दो मिनट में चार्जशीट लग जाएगी', रेप पीड़िता से इंस्पेक्टर ने की अश्लील बातें, ऑडियो वायरल
यूपी के बलिया इंस्पेक्टर ने दुष्कर्म पीड़िता से अश्लील बातें करने और मिलने के लिए दबाव बनाने का मामला सामने आया है। इंस्पेक्टर ने पीड़िता से चार्जशीट लगाने के बदले अश्लील मांगें कीं। इसका ऑडियो वायरल होने के बाद एसपी ने इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया है।

UP News: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में खाकी एक बार फिर दागदार हुई है। एक तरफ जहां सरकार और प्रशासन महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के बड़े-बड़े दावे करते हैं, वहीं दूसरी ओर सिस्टम में बैठे कुछ जिम्मेदार अधिकारी ही पीड़िताओं का मानसिक और भावनात्मक शोषण करने में जुटे हैं। ताजा मामला उभांव थाने का है, जहां 'इंस्पेक्टर क्राइम' नरेश मलिक ने एक दुष्कर्म पीड़िता की मजबूरी का फायदा उठाने का प्रयास किया। पुलिस अधीक्षक (एसपी) ओमवीर सिंह ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी इंस्पेक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
रसड़ा कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने उभांव थाने में तैनात एक वन दारोगा के खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी दारोगा को जेल भी भेज दिया था। इस मुकदमे की विवेचना और चार्जशीट लगाने की प्रक्रिया के दौरान 'इंस्पेक्टर क्राइम' नरेश मलिक ने पीड़िता से संपर्क बढ़ाया। आरोप है कि इंस्पेक्टर ने अपनी मर्यादा लांघते हुए पीड़िता से फोन पर अश्लील बातें करना शुरू कर दिया।
ऑडियो ने खोली पोल: 'दो मिनट में लग जाएगी चार्जशीट'
पीड़िता ने पुलिस के उच्चाधिकारियों को बताया कि इंस्पेक्टर नरेश मलिक उसे फोन कर मिलने के लिए दबाव डालता था। वायरल ऑडियो और शिकायत के मुताबिक, इंस्पेक्टर ने पीड़िता से कहा, "मुझसे मिल लो, दो मिनट में चार्जशीट लग जाएगी।" वह मुकदमे को जल्द निपटाने और चार्जशीट फाइल करने के नाम पर अश्लील सौदेबाजी की कोशिश कर रहा था। पीड़िता ने हार मानने के बजाय हिम्मत दिखाई और इंस्पेक्टर की अश्लील बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड कर लिया। इसके बाद पीड़िता ने यह ऑडियो डीआईजी आजमगढ़ को भेजकर अपनी सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई।
जांच रिपोर्ट और एसपी की सख्त कार्रवाई
मामले के तूल पकड़ते ही एसपी बलिया ने तत्परता दिखाई। शुरुआती तौर पर एक अप्रैल को इंस्पेक्टर नरेश मलिक को उभांव थाने से हटाकर साइबर सेल में स्थानांतरित कर दिया गया था, ताकि वह विवेचना को प्रभावित न कर सके। मामले की विभागीय जांच क्षेत्राधिकारी (सीओ) रसड़ा आलोक गुप्ता को सौंपी गई थी। सीओ की विस्तृत जांच रिपोर्ट में इंस्पेक्टर पर लगे आरोपों और ऑडियो की सत्यता की पुष्टि हुई।
रिपोर्ट आने के बाद एसपी ओमवीर सिंह ने इंस्पेक्टर नरेश मलिक को निलंबित करते हुए विभागीय जांच के कड़े आदेश दिए हैं। अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) दिनेश कुमार शुक्ल ने बताया कि पुलिस महकमे में ऐसे आचरण के लिए कोई स्थान नहीं है और जांच के बाद नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रणाली पर सवाल: रक्षक ही जब बन जाएं भक्षक
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली और पीड़िताओं के प्रति उनके व्यवहार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला जो पहले से ही शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का शिकार है, वह जब न्याय के लिए थाने पहुंचती है, तो वहां मौजूद अधिकारी उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं। फिलहाल, इंस्पेक्टर के निलंबन के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और इस मामले को अन्य पुलिसकर्मियों के लिए एक सबक के तौर पर देखा जा रहा है।




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