यूपी में 250 करोड़ टैक्स हड़पने वाले गिरोह की कहानी भी बड़ी दिलचस्प, 3 लड़के कैसे करते थे पूरा खेल?
यूपी के कानपुर जिले में 250 करोड़ टैक्स हड़पने वाले गिरोह के खुलासे की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। गिरफ्तार आरोपी कपिल मिश्रा और राज उर्फ अमर दीप कौशिक के अलावा मास्टरमांइड ऋषभ तीनों मिलकर पूरा खेल करते थे।

यूपी के कानपुर में 38 फर्जी फर्में खोलकर करीब 250 करोड़ की आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) हड़पने वाले गिरोह के खुलासे की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। गिरफ्तार आरोपी कपिल मिश्रा और राज उर्फ अमर दीप कौशिक के अलावा मास्टरमांइड ऋषभ तीनों मिलकर पूरा खेल करते थे। दरअसल, नजीराबाद के आरके नगर के रहने वाले अनुराग वर्मा को बहन की शादी के लिए एक लाख लोन चाहिए था। 19 दिसंबर 2025 को उसकी मुलाकात कपिल मिश्रा और राज उर्फ अमरदीप से हुई। दोनों ने लोन दिलाने का झांसा देकर पैन कार्ड, आधार कार्ड, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, डीएल, बिजली का बिल समेत उसके अन्य दस्तावेज ले लिए।
अनुराग को 30 जनवरी को गोविंदनगर की एक बैंक में फोटो खिंचाने के लिए भेजा गया। वहां उसका बैंक खाता खुला। लोन के रुपये न आने पर युवक ने बैंक में जाकर पता लगाया तो उसके नाम से रुद्रा इंटरप्राइजेज फर्म बनने और उसमें 60 लाख रुपये होने की जानकारी मिली। साइबर अपराध की आशंका पर अनुराग ने 22 फरवरी को नजीराबाद थाने व साइबर क्राइम ब्रांच को सूचना दी। जांच के दौरान ही उसके खाते में 90 लाख रुपये और आ गए। इसके बाद पुलिस ने करोड़ों की टैक्स चोरी का खुलासा कर दिया। पुलिस जांच में सामने आया है कि इन कंपनियों से ही उज्जवल के नाम पर खोली गई पार्वती इंटरप्राइजेज के खाते में करोड़ों रुपये भेजे गए। इसके साथ ही 12 ऐसी कंपनियां भी सामने आई हैं, जो सही हैं।
पकड़े गए आरोपी कपिल मिश्रा और राज उर्फ अमर दीप कौशिक ने बताया कि वह दोनों उन्नाव निवासी ऋषभ पांडेय के लिए काम करते हैं। ऋषभ गिरफ्तार आरोपी कपिल के मामा का बेटा है। वह 20 हजार रुपये की नौकरी करता है। राज को भी 15 हजार रुपये मिलते हैं। इनका काम लोगों को लोन दिलाने के नाम पर दस्तावेज लेना और ऋषभ को मुहैया कराना था। इसके बाद सारा काम वहीं देखता था। वही इस पूरे खेल का मास्टर माइंड बताया जा रहा है। पुलिस की जांच में ऋषभ नाम के तीन लोग सामने आए हैं। ऋषभ पांडेय, ऋषभ शुक्ला और ऋषभ पटेल। यह तीनों एक हैं या अलग-अलग, पुलिस इसकी जांच कर रही है।
इन तीनों के साथ ही प्रथम, रजत और साहिल की भी पुलिस को तलाश है। पकड़े गए कपिल और राज ने बताया कि वह लोन के नाम पर अक्सर गरीब लोगों, मजदूरों या बेरोजगार युवाओं को थोड़े पैसों का लालच देकर उनके पैन, आधार और बैंक विवरण ले लेते हैं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी पोर्टल पर कागजी कंपनियां (शेल कंपनीज) का रजिस्ट्रेशन कराते हैं। जिनका वास्तव में कोई अस्तित्व नहीं होता। पंजीकरण के लिए फर्जी किरायानामा या बिजली बिल का उपयोग करते थे। इसी आधार पर फर्जी कंपनियां खड़ी करते थे।
इस तरह फर्जी कंपनियों के खुलने और आईटीसी में फर्जीवाड़े से जीएसटी की ऑनलाइन व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। पुलिस आयुक्त ने बताया कि टैक्स चोरी का खुलासा करने वाली टीम को 50 हजार रुपये नकद दिया जाएगा।
ऐसे तैयार होता है फर्जी बिल
पुलिस के मुताबिक फर्में बिना किसी वास्तविक माल या सेवा की सप्लाई किए केवल कागजी बिल (इनवॉइज) जारी करती हैं। माल की आवाजाही दिखाने के लिए फर्जी ई-वे बिल जनरेट किए जाते हैं। यह सब कुछ कागजों पर ही चलता है।
बैंक कर्मियों की भूमिका पर सवाल
पुलिस आयुक्त ने बताया कि इस पूरे खेल में बैंक कर्मियों की भूमिका संदिग्ध मिली है। बिना किसी के मिलीभगत इतनी बड़ी धनराशि निकाली नहीं जा सकती है। ऐसे में जांच की जा रही है। इसके लिए बैंक से भी जानकरी मांगी गई है।
बेरोजगार छात्र करोड़पति
पुलिस आयुक्त ने बताया कि जांच के दौरान भी अनुराग के खाते में रुपये आते रहे। चूंकि पुलिस ने खाता फ्रीज कर दिया था इसलिए रुपये आने में कोई समस्या नहीं बल्कि धनराशि निकाली नहीं जा सकती थी। जांच के दौरान 90 लाख रुपये उसके खाते में आए जो वर्तमान में करीब डेढ़ करोड़ हो गए है। इसी तरह उज्जवल के खाते में भी 116.77 करोड़ में 86.69 करोड़ रुपये नकद निकाले जा चुके हैं। शेष राशि फ्रीज की गई है।
इनपुट टैक्स क्रेडिट का खेल
पुलिस आयुक्त ने बताया कि फर्जी फर्म (ए) दूसरी फर्म (बी) को बिल जारी करती है। फर्म बी इस बिल के आधार पर सरकार से उस टैक्स का क्रेडिट (आईटीसी) मांगती है जो वास्तव में कभी चुकाया ही नहीं गया। कई फर्में आपस में ही यह बिल घुमाती रहती हैं ताकि उनका टर्नओवर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा सके और भारी मात्रा में आईटीसी क्लेम करके सरकार का करोड़ों रुपये का जीएसटी हड़पा जा सके।
बड़ी संख्या में मिले बोर्ड
पुलिस को आरोपियों से 12 अलग-अलग फर्मों के साइन बोर्ड बरामद हुए हैं। यह वहीं कंपनियां है जिनसे कागजों पर व्यापार दिखाकर फर्जी तरीके से आईटीसी क्लेम लिया गया है। इसके साथ ही आरोपियों के पास से 30 मोबाइल बरामद हुए हैं जिसमें अधिकर की-पैड मोबाइल हैं।
आरोपियों से मिले 30 मोबाइल
आरोपितों के पास से 30 मोबाइल फोन, फर्जी सिम कार्ड, 52 चाबियां, 12 फर्मों के साइन बोर्ड, तीन डायरियां, कई फर्मों के बैंकिग दस्तावेज, 15 खातों की चेकबुक, दो मोहर एवं तीन इंक पैड, तीन सिग्नेचर चेक, दो स्कूटी, पांच एटीएम कार्ड, किरायानाम, फर्म पंजीकरण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण।
ऑनलाइन पंजीकरण का उठाते थे लाभ
पुलिस आयुक्त ने बताया कि यह लोग किराये पर दुकान आदि लेते थे और एग्रीमेंट के आधार पर जीएसटी में फर्म का पंजीकरण कराते थे। सीमेंट की बोरियां रखकर फोटो निकालकर पंजीकरण के लिए लगाते थे। ऑनलाइन जीएसटी पंजीकरण की सुविधा का यह लोग फायदा उठाते थे। पार्वती इंटरप्राइजेज भी इसी तरह यशोदा नगर में एक दुकान का एग्रीमेंट कराकर खोली गई थी। जीएसटी पंजीकरण का साइन बोर्ड भी यह लोग बनाकर लगाते थे ताकि किसी को कोई शक न हो। यहां यह लोग फर्म खोलते समय दस्तावेज दूसरे के नाम के लगाते थे लेकिन मोबाइल नंबर अपना दर्ज करते थे। इससे खाते का संचालन भी खुद ही करते थे। रुपये आने पर कैश निकाल लिया जाता था।
लखनऊ की शिवांस समेत 12 फर्मों का नाम आया
पुलिस आयुक्त ने बताया कि जांच के दौरान लखनऊ की शिवांस इंटरप्राइजेज का नाम सामने आया है। यह फर्म सीमेंट का कारोबार करती है। शिवांस की फर्म के खाते में 1.55 करोड़ रुपये पार्वती इंटरप्राइजेज से भेजे गए थे। अन्य 11 कंपनियों से करीब 100 करोड़ से ज्यादा की रकम पार्वती इंटरप्राइजेज में भेजी गई।
ये 38 फर्में मिलीं, चल रही जांच
पुलिस को जांच में कानपुर और उन्नाव में खोली गईं 38 बोगस फर्में मिली हैं जो गौरव ट्रेडर्स, पूर्ति ट्रेडिंग, ओमकार कम्युनिकेशन, शिव शक्ति ट्रेडिंग, कामायनी कम्युनिकेशन, वैष्णवी ट्रेडिंग कम्पनी, मां कंसारी ट्रेडर्स, श्रीराम ट्रेडर्स, मां इंटरप्राइजेज, लाइटिंग इंटरप्राइजेज, बिहारी ट्रेडर्स, दाल ट्रेडर्स, एसके इंटरप्राइजेज, के-एन ट्रेडिंग, एनएस ट्रेडिंग, शिवाय कम्युनिकेशन, श्री श्याम ट्रेडर्स, मां वैष्णों ट्रेडर्स, पार्वती ट्रेडर्स, शंकर इंटरप्राइजेज, श्री दुर्गा स्टोर, मोहन इंटरप्राइजेज, यश बाबा इंटरप्राइजेज, दिव्य ट्रेडिंग कंपनी, अन्नपूर्णा ट्रेडर्स, गौरी इंटरप्राइजेज, गुप्ता इंटरप्राइजेज, आर्यन ट्रेडर्स, श्री श्याम इंटरप्राइजेज, गणेश ट्रेडर्स, श्याम ट्रेडर्स, मन ट्रेडर्स, अनिल का इंटरप्राइजेज, देव इंटरप्राइजेज, नीलम ट्रेडर्स, मां काली इंटरप्राइजेज, वंदना ट्रेडर्स, दुर्गा ट्रेडर्स हैं।




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