यूपी सरकार का बड़ा फैसला, वीआईपी सुरक्षा के लिए बनेगी स्पेशल फोर्स, मेघालय में होगी हाई टेक ट्रेनिंग
सीएम सहित अन्य वीआईपी की सुरक्षा में हाल ही में आई चूक को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए पुलिस की विशेष टीम तैयार की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

सीएम सहित अन्य वीआईपी की सुरक्षा में हाल ही में आई चूक को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब वीआईपी सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए पुलिस की विशेष टीम तैयार की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इस विशेष टीम को अत्याधुनिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जो इसी महीने मेघालय में आयोजित होगा।
जानकारी के मुताबिक, वीआईपी सुरक्षा में अब किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी को ध्यान में रखते हुए एडिशनल एसपी स्तर से लेकर दारोगा (उप निरीक्षक) स्तर तक के पुलिस अधिकारियों और कर्मियों से आवेदन मांगे गए हैं। चयनित पुलिसकर्मियों को विशेष सुरक्षा मानकों, वीआईपी मूवमेंट, काफिले की व्यवस्था, खतरे की पहचान, भीड़ नियंत्रण और आपातस्थिति से निपटने का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बताया गया है कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर पहले ही गोरखपुर में एक विशेष टीम गठित की जा चुकी है। इस टीम ने कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में अपनी जिम्मेदारी निभाई है। अब इसी मॉडल पर प्रदेश के हर जिले में एक-एक विशेष वीआईपी सुरक्षा टीम बनाई जाएगी। ये टीमें जिले में आने वाले मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों, न्यायिक अधिकारियों और अन्य विशिष्ट अतिथियों की सुरक्षा संभालेंगी। सरकार का मानना है कि अलग से प्रशिक्षित टीम होने से सुरक्षा व्यवस्था अधिक पेशेवर और प्रभावी होगी। मेघालय में होने वाली ट्रेनिंग के दौरान पुलिसकर्मियों को आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल, क्लोज प्रोटेक्शन तकनीक, इंटेलिजेंस इनपुट पर काम करने और संभावित हमलों को पहले ही निष्क्रिय करने की रणनीति सिखेंगे।
सामान्य ड्यूटी से अलग रखा जाएगा
इसके अलावा मनोवैज्ञानिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि तनावपूर्ण हालात में भी वे सही निर्णय ले सकें। पुलिस विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, ट्रेनिंग पूरी करने के बाद इन पुलिसकर्मियों को सामान्य ड्यूटी से अलग रखा जाएगा और केवल वीआईपी सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इससे सुरक्षा व्यवस्था में निरंतरता बनी रहेगी और हर कार्यक्रम के लिए अलग-अलग स्टाफ लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।




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