लखनऊ की चाट और रेवड़ी में नंबर वन की रेस, योगी सरकार की ओडीओडी पर मांगे गए प्रस्ताव
लखनऊ में एक जिला एक व्यंजन (ओडीओडी) में सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धा रेवड़ी और चाट के बीच में है। अभी तीन व्यंजनों को प्रमुखता दी गई है। इसमें चयन होना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 के दौरान सिडनी में कहा था कि, जब खाने की बात चली है और चाट की बात चली है, तो लखनऊ का नाम आना भी स्वाभाविक ही है। उन्होंने सिडनी के पास स्थित ‘लखनऊ’ नाम की जगह का ज़िक्र करते हुए मज़ाक में पूछा था कि क्या वहां भी वैसी ही चाट मिलती है जैसी हमारे लखनऊ में मिलती है। अब लखनऊ की यह चाट जिले के मुख्य व्यंजन की प्रतिस्पर्धा में रेवड़ी को टक्कर दे रही है। हाल ही में हुई घोषणा के बाद एक जिला एक व्यंजन (ओडीओडी) में सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धा रेवड़ी और चाट के बीच में है। अभी तीन व्यंजनों को प्रमुखता दी गई है। इसमें चयन होना है। कई संगठनों से प्रस्ताव भी आमंत्रित किए जाएंगे। इसके बाद लखनऊ का मुख्य व्यंजन कौन सा होगा, इसका नाम तय करने के बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
वैश्विक स्तर पर ब्रांडिंग
जिला उद्योग विभाग ने ऐसे व्यंजनों को चुना है जिनसे बड़ी संख्या में रोजगार सृजन हो। उत्पाद की वैश्विक मंच पर ब्रांडिंग कराई जा सके। 24 जनवरी को राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर गृह मंत्री अमित शाह ने एक जिला एक व्यंजन योजना की घोषणा की थी। जिला उद्योग के उपायुक्त एमके चौरसिया के अनुसार लखनऊ में रेवड़ी कारोबार से 20 हजार लोग जुड़े हैं। लखनऊ की सदियों पुरानी अवधी खानपान परंपरा, लजीज कबाब, बिरयानी को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए अक्टूबर 2025 में यूनेस्को ने लखनऊ को 'क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी' घोषित किया है।
परंपरा और स्वाद का द्वंद्व
दिलचस्प बात यह है कि जहाँ रेवड़ी लखनऊ की सर्दियों की पहचान और एक टिकाऊ 'गिफ्ट आइटम' के रूप में देश-दुनिया में भेजी जाती है, वहीं चाट यहाँ की शामों की रूह मानी जाती है। रेवड़ी उद्योग जहाँ संगठित होकर हज़ारों परिवारों की आजीविका चला रहा है, वहीं गोमती के दोनों किनारों पर सजने वाले चाट के स्टॉल 'स्ट्रीट फूड कल्चर' को वैश्विक पहचान दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 'एक जिला एक व्यंजन' का खिताब उसी के सिर सजेगा, जो स्वाद के साथ-साथ आर्थिक पैमाने और सांस्कृतिक विरासत के संतुलन पर खरा उतरेगा। फिलहाल, यूनेस्को की मुहर लगने के बाद लखनऊ की गलियों में यह चर्चा तेज़ है कि 'नवाबों के शहर' का आधिकारिक स्वाद मीठा (रेवड़ी) होगा या चटपटा (चाट)।
क्या है 'एक जिला एक व्यंजन' योजना?
दरअसल, 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) की अपार सफलता के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने अब 'एक जिला एक व्यंजन' (One District One Dish) योजना के जरिए स्थानीय जायके को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य हर जिले के एक विशिष्ट पारंपरिक व्यंजन को चिन्हित कर उसे वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करना है। इसके तहत न केवल उस व्यंजन से जुड़े कारीगरों और व्यवसायियों को सरकारी सहायता, ट्रेनिंग और बेहतर मार्केटिंग की सुविधा मिलेगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। लखनऊ जैसे शहर में, जहाँ खान-पान की सदियों पुरानी विरासत है, इस योजना के लागू होने से स्थानीय फूड चेन और छोटे विक्रेताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के दरवाजे खुलेंगे।




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