यूपी में भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट, तेजी से फुंकने लगे ट्रांसफार्मर, योगी से मिले मंत्री असीम अरुण
उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और लू के प्रकोप के बीच बिजली संकट गहरा गया है, जिससे राजधानी लखनऊ सहित पूरे प्रदेश में हाहाकार मचा हुआ है। कन्नौज में भारी कटौती को लेकर कैबिनेट मंत्री असीम अरुण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर हस्तक्षेप की मांग की है।

UP News: यूपी में भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट ने लोगों को परेशान कर दिया है। राजधानी लखनऊ में भी बिजली कटौती से परेशान लोग सड़कों पर उतर गए हैं। मंत्री असीम अरुण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर अपने जिले कन्नौज में बिजली कटौती का मुद्दा उठाया है। दिन और रात के तापमान में ज्यादा अंतर न होने की वजह से बिजली की मांग का दबाव लगातार पूरे दिन बना हुआ है। बढ़ती मांग से ट्रांसफार्मर ओवरलोड हो रहे हैं। एरियल बंच कंडक्टर (एबीसी) जल रहे हैं और ट्रांसफार्मरों के फुंकने की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। लोकल फॉल्ट बढ़ रहे हैं। इसकी वजह से घोषित कटौती न होने के बाद भी क्षेत्रों में इन वजहों से सप्लाई बाधित हो रही है और जनता परेशान है। इन दिनों प्रदेश भर में औसतन 700 से ज्यादा ट्रांसफार्मर रोज फुंक रहे हैं।
भीषण गर्मी और उमस के बीच बिजली संकट ने विकराल रूप धारण कर लिया है। लखनऊ शहर में बिजली की खपत 1853 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है, इससे लेसा का सिस्टम हांफने लगा है। नतीजतन शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती और लो-वोल्टेज से बेहाल जनता के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। सोमवार रात भर कई इलाकों में बवाल हुआ। इसके बाद मंगलवार को भी शहर के कई इलाकों में भारी बवाल, मारपीट और चक्काजाम की स्थिति देखने को मिली। इनमें आरडीएसओ, राजाजीपुरम, एफसीआई, उतरेठिया, अहिबरनपुर, फैजुल्लागंज, दाऊदनगर, चौक, कमता, चौक नादरगंज उपकेंद्र से जुड़े इलाकों के परेशान लोगों ने सड़क पर उतर कर नाराजगी जताई।
मौसम में लगातार तपिश बनी हुई है। लू चल रही है। ऐसे में बिजली की अधिकतम मांग में तो इजाफा है, लेकिन न्यूनतम मांग का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। 15 मई को अधिकतम मांग 27,032 मेगावॉट थी, जबकि न्यूनतम मांग 16,869 मेगावॉट थी। वहीं, 16 मई को अधिकतम मांग 27,776 मेगावॉट और न्यूनतम मांग 18,467 मेगावॉट हो गई। 17 मई को अधिकतम मांग का आंकड़ा 28,904 मेगावॉट पहुंच गया तो न्यूनतम मांग भी 19,847 मेगावॉट तक आ गई है, 18 मई के आंकड़ों के मुताबिक अधिकतम मांग 29,330 मेगावॉट जबकि न्यूनतम मांग 20,482 मेगावॉट दर्ज की गई।
मांग में और बढ़ोतरी की आशंका
आने वाले दिनों में भी दिन और रात के तापमान में अंतर ज्यादा न रहने का अनुमान है। ऐसे में बिजली की औसत अधिकतम मांग में बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। 18 मई को इस साल की अधिकतम औसत मांग का दिन दर्ज किया गया। 18 मई को 617.1 मिलियन यूनिट बिजली की सप्लाई हुई। 2025 में एक दिन में अधिकतम 655.9 मिलियन यूनिट और 2024 में एक दिन में अधिकतम आपूर्ति 659.5 मिलियन यूनिट थी। हालांकि, वर्ष 2024 व 2025 में यह अधिकतम मांग जून की उमस में पहुंची थी, जबकि इस साल उसी आंकड़े के आसपास आपूर्ति मई में ही आ पहुंची है। वहीं, इस साल एक दिन में न्यूनतम आपूर्ति का आंकड़ा बीते वर्षों की न्यूनतम आपूर्ति को पहले ही पीछे छोड़ चुका है।
एबीसी जलना ही ट्रांसफॉर्मर फुंकने की बड़ी वजह
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा कहते हैं कि हर साल अप्रैल, मई और जून में ट्रांसफार्मर औसतन ज्यादा फुंकते हैं। इस बार का आंकड़ा अभी बीते वर्षों की तुलना में कम है। वह कहते हैं कि अभी जो घटनाएं हो रही हैं, उनमें से ज्यादातर का कारण एबीसी जलना है। जब एबीसी जलते हैं तो उसके बाद शॉर्ट सर्किट हो रहा है और उससे ट्रांसफॉर्मर फुंक रहे हैं। अवधेश एबीसी की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाते हैं। वह कहते हैं कि ज्यादातर जगहों पर ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद उसे बदलने में कोताही की जा रही है। अविकसित कॉलोनियों और बहुमंजिला इमारतों में तो इसका खर्च उपभोक्ताओं से वहन करने का दबाव डाला जा रहा है। वहीं, विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर कहते हैं कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ट्रांसफॉर्मर अपनी आयु पूरी कर चुके हैं। इनकी संख्या 25 फीसदी से ज्यादा है। मरम्मत करने की अधिकतम सीमा भी काफी ट्रांसफार्मर पूरी कर चुके हैं।




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