यूपी के कॉलेजों में तैयार होंगे युवा कल्चरल एंबेसडर, क्लब बनाने का काम शुरू
यूपी के कॉलेजों में युवा कल्चरल एंबेसडर तैयार होंगे। इसकी पहल शुरू हो गई है। प्रदेश के 250 राजकीय व सहायता प्राप्त कॉलेजों में कल्चरल क्लब बनाने का काम शुरू किया गया है।

UP News: उत्तर प्रदेश के कॉलेजों में अब युवा कल्चरल एंबेसडर तैयार होंगे। इसकी पहल शुरू हो गई है। प्रदेश के 250 राजकीय व सहायता प्राप्त कॉलेजों में कल्चरल क्लब बनाने का काम शुरू किया गया है। पढ़ाई को सिर्फ किताबों और परीक्षाओं तक सीमित न रखते हुए युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़कर उन्हें कल के कल्चरल एंबेसडर के रूप में तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया गया है। इस पहल को मजबूती देने के लिए 117 राजकीय और 145 एडेड कॉलेजों को करीब 1.25 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है।
संस्कृति विभाग ने युवाओं के लिए नई पहल की है। इन कल्चरल क्लब के माध्यम से युवाओं को आधुनिकता के साथ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने की शिक्षा दी जाएगी। साथ ही उन्हें स्क्रीन टाइम घटाने और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।
हर हुनर को मंच देने की कोशिश
कल्चरल क्लब छात्रों के लिए प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच होंगे। यहां वाद-विवाद, भाषण, कविता पाठ और कहानी लेखन जैसी साहित्यिक गतिविधियों के साथ-साथ नृत्य-संगीत में एकल व समूह गायन, लोकनृत्य और शास्त्रीय प्रस्तुतियां का आयोजन शुरू किया गया है। कला और शिल्प के तहत रंगोली, मेहंदी, पोस्टर, स्लोगन और पेंटिंग जैसे कार्यक्रम भी हो रहे हैं।
संस्कृति के साथ टीम वर्क व प्रबंधन भी सीखेंगे
इन क्लबों का उद्देश्य अलग-अलग पृष्ठभूमि के छात्रों को एक मंच पर लाकर आपसी जुड़ाव और समझ को बढ़ाना है। इससे कैंपस में रचनात्मकता बढ़ेगी। कल्चरल क्लब छात्रों के व्यक्तित्व विकास का माध्यम भी बनेंगे। इन गतिविधियों के जरिए उनका आत्मविश्वास बढ़ने के साथ टीमवर्क और समय प्रबंधन की समझ भी विकसित होगी। उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और मूल्यों से जोड़ने पर खास जोर है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि युवाओं को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें अपनी जड़ों से भी जुड़ना होगा। ‘कल्चरल क्लब’ इसी सोच का परिणाम है। यह मंच छात्रों को अपनी पहचान समझने, अपनी कला को अभिव्यक्त करने और दूसरों की संस्कृति का सम्मान करना सिखाता है। जब युवा अपनी परंपराओं से जुड़ते हैं, तो उनमें आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और समाज के प्रति संवेदनशीलता स्वतः विकसित होती है।




साइन इन