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यूपी: शिक्षा विभाग के भ्रष्टाचार से तंग शिक्षक की खुदकुशी मामले में ऐक्शन शुरू, DM ने दौड़ाए अफसर

सुसाइड नोट में शिक्षक ने देवरिया के शिक्षा विभाग के एक लिपिक पर प्रताड़ित करने और 16 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया था। कुशीनगर के कुबेरस्थान क्षेत्र के हरैया गांव निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में शिक्षक थे।

Sun, 22 Feb 2026 10:48 PMAjay Singh संवाददाता, देवरिया
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यूपी: शिक्षा विभाग के भ्रष्टाचार से तंग शिक्षक की खुदकुशी मामले में ऐक्शन शुरू, DM ने दौड़ाए अफसर

यूपी के देवरिया में तैनात सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में रविवार को गुलरिहा पुलिस ने देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और एक अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। शिक्षक की पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर केस दर्ज किया गया है। वहीं देवरिया की डीएम ने बीएसए कार्यालय के लिपिक को निलंबित करते हुए सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है।

मूल रूप से कुशीनगर के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह की देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती हुई थी। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। उनकी पत्नी गुड़िया सिंह द्वारा गुलरिहा थाने में दी गई तहरीर के मुताबिक गत 20 फरवरी को उनके कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय में बुलाकर अपमानित किया गया और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटने पर उन्होंने पूरी घटना बताई। वह अत्यंत व्यथित दिखाई दिए। उसी रात उन्होंने घर के निचले कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। सुबह जब वह कमरे में पहुंचीं तो उन्हें फांसी पर लटकते हुए पाया। मोहन सिंह की जेब से चार पेज का सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे।

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सीओ गोरखनाथ रवि सिंह ने बताया कि गुड़िया सिंह की तहरीर पर देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और एक अन्य के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। इस मामले में देवरिया की डीएम दिव्या मित्तल ने बीएसए कार्यालय में तैनात बाबू संजीव सिंह को निलंबित कर दिया है। साथ ही सीडीओ राजेश सिंह के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। इसमें ज्वाइंट मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा और डीआईओएस शिवनारायन सिंह को शामिल किया गया है। कमेटी से एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी गई है।

रुपये लेने के बाद भी नहीं हुई सेवा बहाली

गुड़िया सिंह ने तहरीर में कहा है कि उनके पति कृष्ण मोहन सिंह की नियुक्ति एक जुलाई 2016 को देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक पद पर हुई थी। बेसिक शिक्षा अधिकारी देवरिया की संस्तुति पर नियुक्ति की गई थी। वर्ष 2023 में आरोपों के आधार पर कृष्ण मोहन और दो अन्य सहायक अध्यापकों ओंकार सिंह और अपर्णा तिवारी की नियुक्ति समाप्त कर दी गई। इसके खिलाफ कृष्ण मोहन सिंह और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। चार अप्रैल 2022 को न्यायालय ने उनके पक्ष में आदेश पारित किया।

इसके बावजूद 24 मार्च 2023 और एक अप्रैल 2023 को पुनः उनके आवेदन निरस्त कर दिए गए। इसके विरुद्ध पुनः याचिका दाखिल की गई, जिस पर 13 फरवरी 2025 को हाईकोर्ट ने पूर्व आदेशों को निरस्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया। कोर्ट के आदेश के अनुपालन के दौरान बेसिक शिक्षा अधिकारी देवरिया कार्यालय में तैनात बाबू संजीव सिंह ने तीनों शिक्षकों से 20-20 लाख रुपये की मांग की। बाद में 16-16 लाख रुपये पर सहमति बनी। लिपिक ने यह भी कहा कि रकम न देने पर पुनः प्रतिकूल आदेश पारित कर दिए जाएंगे। कृष्ण मोहन सिंह समेत अन्य शिक्षकों ने कर्ज लेकर रकम दी, इसके बावजूद भुगतान और सेवा बहाली की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।

क्या बोलीं डीएम

देवरिया के डीएम दिव्या मित्तल ने बताया कि प्रथमदृष्टया दोषी पाए गए लिपिक संजीव सिंह को निलंबित कर दिया गया है। प्रकरण की जांच के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्ध है।

सुसाइड नोट में लिखा-‘मरना नहीं, पत्नी और बच्चों के लिए जीना चाहता था मैं’

शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित चार पेज के सुसाइड नोट में देवरिया के बेसिक शिक्षा विभाग के एक बाबू पर 48 लाख रुपये घूस लेने का गंभीर आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा है कि वह मरना नहीं चाहते थे। पत्नी और बच्चों के लिए जीना चाहते थे। लेकिन उन्हें मरने के लिए मजबूर कर दिया गया। सुसाइड नोट में उनके अलावा दो अन्य शिक्षकों से भी 16-16 लाख रुपये लिए जाने का जिक्र किया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।

सुसाइड नोट के अनुसार तीनों शिक्षक कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, गौरी बाजार (देवरिया) में कार्यरत थे। वर्ष 2021 में नियुक्ति संबंधी जांच के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी और मामला हाईकोर्ट तक लंबित रहा। आरोप है कि बाद में बीएसए कार्यालय के बाबू ने मामले में राहत दिलाने के नाम पर प्रति व्यक्ति 20 लाख रुपये की मांग की थी, जिसे बाद में 16 लाख रुपये प्रति व्यक्ति तय किया गया। नोट में लिखा है कि 27 जुलाई को देवरिया में बीएसए कार्यालय के पास पौधशाला के निकट घूस की पहली किस्त दी गई। शेष रकम अलग-अलग तिथियों में दी गई। आरोप है कि रुपये की व्यवस्था करने के लिए पत्नी के गहने गिरवी रखे गए, जमीन रेहन रखी गई और बैंक से कर्ज लिया गया। कृष्ण मोहन सिंह ने 17 नवंबर को बैंक शाखा पादरी बाजार से सात लाख रुपये निकालने का भी उल्लेख किया है। शिक्षक ने अपने पूर्व प्रधानाध्यापक पर भी आरोप लगाया है कि उन्होंने बीएसए कार्यालय में संपर्क कराया। नोट में विद्यालय को विवादित बताते हुए उसकी जांच की मांग की है।

भइया... मेरे परिवार का ध्यान रखना

मैं जीना चाहता था लेकिन इन लोगों ने ऐसी परिस्थिति बना दी है कि अब जान दे रहा हूं। भइया मुझे माफ करना, मैं अपनी पत्नी और बच्चों का भी गुनहगार हूं उनका ध्यान रखना। बेटी आस्था के नाम से हाटा एसबीआई ब्रांच में सुकन्या समृद्धि खाता है जिसमें तीन-चार लाख रुपये हैं, वहां हमारे नाम से 2-3 पालिसियां भी हैं। आप सभी लोग मुझे माफ कर दीजिएगा।

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अपमान और कर्ज के बोझ से टूट चुके थे कृष्ण मोहन

शिक्षक ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि कर्ज के बोझ और अपमान से वह टूट चुके थे। उनकी आत्महत्या के जिम्मेदार संबंधित अधिकारी हैं। लिखा है कि शुक्रवार को मुझे बीएसए ऑफिस बुलाकर जलील किया गया है जिसे मैं बर्दाश्त नहीं कर पाया और मैं आत्महत्या के लिए मजबूर हो गया। उन्होंने अपने परिवार को परेशान न करने की अपील करते हुए अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपों की सत्यता की पड़ताल के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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