योगी अपने हैं, UGC नियम उन्हें हराने की साजिश; इस्तीफा दे चुके अलंकार अग्निहोत्री का नया दावा
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि UGC रेग्यूलेशन 2026 को भारत सरकार के गजट में जारी किया गया है, जो मोदी और शाह ने सोची-समझी साजिश है। वे इस गजट के जरिए जनरल और ओबीसी को आपस में लड़वाना चाहते हैं, ताकि वर्ष 2027 में यूपी विधानसभा चुनाव को प्रभावित किया जा सके।

यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने शनिवार को कानपुर में बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि यूजीसी के नए नियमों को उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने के लाया गया। उन्होंने कहा सीएम योगी अपने हैं, उनसे किसी तरह की कोई शिकायत नहीं है। सीएम योगी को हराने के लिए ही ये काला कानून लाया गया। अलंकार ने कहा कि यूजीसी रेग्यूलेशन 2026 को भारत सरकार के गजट में जारी किया गया है, जो मोदी और शाह ने सोची-समझी साजिश है। वे इस गजट के जरिए जनरल और ओबीसी को आपस में लड़वाना चाहते हैं, ताकि वर्ष 2027 में यूपी विधानसभा चुनाव को प्रभावित किया जा सके। हालांकि बजरंग बली का आशाीर्वाद उनके साथ है, जो समय पर इसका विरोध किया गया और सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और बटुकों के अपमान को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि प्रशासन ने उनके साथ गलत गलत व्यवहार किया। हालांकि अब जानकारी मिली है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने कमेटी बनाकर जांच के आदेश दिए हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से भी सरकार की वार्ता जारी है।
इस्तीफे के बाद हुआ व्यापक विरोध प्रदर्शन
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि यूजीसी का काला कानून आने के बाद देश भर में विरोध शुरू हो गया, हालांकि उसके श्वर सरकार के कानों तक नहीं पहुंच रहे थे। अपने लोगों को यह अहसास दिलाने के लिए कि सब एक हैं, इस लिए इस्तीफा दिया, इसका असर यह हुआ कि विरोध व्यापक स्तर पर पहुंच गया। बड़े-बड़े सेलिब्रिटी भी सोशल मीडिया के जरिए विरोध करने लगे। अंतत: सुप्रीम कोर्ट ने काले कानून पर रोक लगा दी।
मंत्री-विधायक के बीच विवाद कमीशनखोरी का
महोबा में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और विधायक बृजभूषण राजपूत के बीच हुए विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि दोनों के बीच विवाद कमीशनखोरी का है। देश में काम इसलिए नहीं हो पा रहा, क्योंकि हर स्तर पर कमीशनखोरी हावी है। उन्होंने दावा किया कि कई राज्यों के विधायक और सांसद खुलकर बोलना चाहते हैं, लेकिन आयकर, ईडी और सीबीआई के डर से चुप हैं। जैसे ही कोई आवाज उठाता है, उसे नोटिस थमाकर दबा दिया जाता है। उन्हाेंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक कानून के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई है। इस संघर्ष में मैं अकेला नहीं हूं। अब जनता भी उनके साथ खड़ी है।




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