26 साल चला मुकदमा, सजा सिर्फ साढ़े चार घंटे; चाचा-चाची को कोर्ट ने सुनाया अनोखा फैसला
कानपुर में कोर्ट ने करीब 26 साल चले मारपीट के मुकदमे में दंपति को साढ़े चार घंट की सजा सुनाई गई है। साथ ही 3500 रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि अदा करने पर दोनों को रिहा कर दिया गया। दरअसल, दंपति के भतीजे ने 1998 में केस दर्ज कराया था।

यूपी के कानपुर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां सीजेएम कोर्ट में करीब 26 साल चले मारपीट के मुकदमे में दंपति को साढ़े चार घंटे (कोर्ट बैठने तक) की सजा सुनाई गई है। साथ ही 3500 रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि अदा करने पर दोनों को रिहा कर दिया गया। दरअसल, दंपति के भतीजे ने कल्याणपुर थाने में 1998 में मारपीट, धमकी और धारदार हथियार से हमले के आरोप में दोनों पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 1999 से मामले की सुनवाई चल रही थी।
वादी संतोष कुमार ने कल्याणपुर थाने में तहरीर दी थी कि दो मार्च 1998 की शाम सात बजे वह घर के बाहर खड़ा था। तभी उनके चाचा-चाची ने सरिया से हमला कर दिया। पुलिस ने मेडिकल कराने के बाद मारपीट, धमकी और धारदार हथियार से हमला करने में केस दर्ज किया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने दंपति कन्हई लाल और उर्मिला देवी के खिलाफ चार्जशीट लगाई थी। अधिवक्ता अनंत शर्मा ने बताया कि साल 1999 से इस मामले में सुनवाई चल रही थी। 21 नवंबर 2025 को पति-पत्नी ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए एसीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कोर्ट ने उन्हें दोषी करार देते हुए न्यायिक हिरासत में ले लिया और दोनों को कोर्ट में बैठने तक की सजा सुनाई।
एक ही गवाह की हो सकी गवाही
मारपीट और धमकी के इस मामले में वादी और अभियुक्त दोनों पक्ष आपस में रिश्तेदार हैं। वादी भतीजा है जबकि आरोपी दंपति उनके चाचा-चाची। पारिवारिक विवाद में यह मारपीट हुई थी। अधिवक्ता के मुताबिक मुकदमे की खास बात है कि अभियोजन अभी तक एक ही गवाह की गवाही करा सका है। अधिवक्ता बताते हैं कि पुराने मुकदमों को जल्द से जल्द निस्तारित करने का आदेश है। इसी के चलते पुराने मुकदमों को निस्तारित किया जा रहा है।
दोनों के खिलाफ जारी था वारंट
अधिवक्ता ने बताया कि दोनों के खिलाफ वारंट जारी था। इसी के चलते दंपत्ति ने सुबह करीब साढ़े 10 बजे होने वाली सुनवाई के दौरान कोर्ट में सरेंडर किया था। साढ़े 12 बजे दोनों को हिरासत में लिया गया। न्यायालय ने कहा कि चूंकि प्रत्रावली अति प्राचीन है और उच्चतम न्यायालय द्वारा आच्छादित एक्शन प्लान की परिधि में आती है। अत: ऐसी परिस्थिति को देखते हुए दोनों को दोषसिद्ध किया जाता है। न्यायालय ने लंच के बाद सजा के बिंदु पर निर्णय सुनाने के आदेश दिए। इसके बाद न्यायालय ने अदालत बैठे रहने तक (शाम पांच बजे तक) की सजा से दंडित किया।




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