दरोगा की आंखों से बहने लगे आंसू, 10 साल और 5 महीने बाद मिली वर्दी; जानें पूरा मामला
प्रयागराज में सीजेएम कोर्ट के पास उनकी अधिवक्ता नबी अहमद से बहस हुई थी। इसके बाद गोली चली थी। इसमें नबी अहमद की मौत हो गई। हत्या में दरोगा को जेल भेजा गया था। कोई अधिवक्ता उनका केस लड़ने को तैयार नहीं था। परिवारवालों की मांग पर केस रायबरेली कोर्ट में ट्रांसफर हुआ था।

प्रयागराज कोर्ट में 11 मार्च 2015 को अधिवक्ता नबी अहमद की गोली लगने से मौत हुई थी। हत्या के आरोप में दरोगा शैलेंद्र सिंह को सितंबर 2022 में रायबरेली कोर्ट ने आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। डबल बेंच ने उनकी सजा पर रोक लगा दी। बहाली के बाद दरोगा को पहली तैनाती आगरा में मिली है। 10 साल पांच माह बाद दरोगा ने वर्दी पहनी तो आंखों में आंसू आ गए।
घटना के समय शैलेंद्र सिंह प्रयागराज में शंकरगढ़ की नारीबारी चौकी पर तैनात थे। प्रयागराज में सीजेएम कोर्ट के पास उनकी अधिवक्ता नबी अहमद से बहस हुई थी। इसके बाद गोली चली थी। जिसमें अधिवक्ता नबी अहमद की मौत हो गई थी। हत्या में दरोगा को जेल भेजा गया था। कोई अधिवक्ता उनका केस लड़ने को तैयार नहीं था। परिजनों की मांग पर केस रायबरेली कोर्ट में ट्रांसफर हुआ था। 23 सितंबर 2022 को रायबरेली कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दिसंबर 2023 में दरोगा शैलेंद्र सिंह को हाईकोर्ट से जमानत मिली।
पुलिस आयुक्त दीपक कुमार के अनुसार डबल बेंच ने शैलेंद्र सिंह की सजा पर रोक लगा दी। बहाली के बाद शैलेंद्र सिंह को पहली तैनाती आगरा कमिश्नरेट में मिली है। शैलेंद्र सिंह मूलत: आंबेडकर नगर में राजे सुल्तानपुर के गांव तिहाड़तपुर के निवासी हैं। आगरा आकर उन्होंने वर्दी पहनी। वर्दी पहनते ही आंखों से आंसू छलकने लगे। शैलेंद्र सिंह का वर्दी वाला वीडियो वायरल हो रहा है।
पुलिस आयुक्त ने दिया साथ
पुलिस आयुक्त दीपक कुमार घटना के समय प्रयागराज में एसएसपी थे। अधिवक्ता की हत्या के कुछ दिन बाद उनका स्थानांतरण हो गया था। न्यायिक जांच हुई थी। उन्हें भी उस जांच का सामना करना पड़ा था। अधिवक्ता की मौत के बाद बवाल हुआ था। पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। दीपक कुमार प्रयागराज से हटने के बाद भी दरोगा के परिजनों के संपर्क में थे। न्याय की लड़ाई में उसके परिवार की हर संभव मदद की। बहाली के बाद दरोगा पुलिस आयुक्त के सामने पेश हुआ और बोला जिंदगी में यह दिन वापस आएगा कभी सोचा नहीं था। अपने साथ छोड़ गए थे। उन्होंने साथ नहीं छोड़ा।




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