शिक्षक सुसाइड केस में ऐक्शन से खलबली, BSA को 4 जिलों में तलाश रही पुलिस; मोबाइल हुए बंद
कुशीनगर के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक थे। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। 20 फरवरी की रात गले में फंदा लगा कर उन्होंने जान दे दी थी।

UP News: देवरिया शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह खुदकुशी प्रकरण में बीएसए के निलंबन और पूर्व प्रधानाचार्य की गिरफ्तारी के बाद बीएसए कार्यालय में खलबली मची है। गोरखपुर पुलिस देवरिया में प्रकरण की जांच को डेरा डाले हुए है। पुलिस सूत्रों की मानें तो प्रकरण में विवेचना के दौरान आरोपियों की संख्या और बढ़ सकती है। इसके साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह समेत कई लोगों के मोबाइल नंबर बंद होने के चलते पुलिस को सटीक लोकेशन नहीं मिल पा रहा है। पुलिस की चार टीमें बीएसए और लिपिक को चार जिलों में ढूंढ रही हैं। पुलिस जल्द ही अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी कर लेने का दावा कर रही है।
कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक थे। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। 20 फरवरी की रात उन्होंने फंदा लगा कर जान दे दी थी। आत्महत्या से पूर्व उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए सुसाइट नोट व वीडियो भी जारी किया था। जांच में दोषी मिली बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को एक दिन पहले शासन ने निलंबित कर दिया, जबकि लिपिक संजीव सिंह पहले ही निलंबित हो चुका है। वहीं बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले पूर्व प्रधानाचार्य को गोरखपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस मामले में रुपये लेने की बात सामने आने के बाद भ्रष्टाचार की धारा बढ़ी दी गई है। इसलिए अब मामले की विवेचना सीओ को सौंप दी गई है।
सीओ भी अब अपनी जांच पड़ताल तेज कर दिए हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पूर्व प्रधानाचार्य ने कुछ और लोगों के नाम भी बताया है, उन्हें भी इस मामले में आरोपियों बनाया जा सकता है। पुलिस उनको आरोपी बनाने के लिए साक्ष्य एकत्रित कर रही है। साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस उनकी भी गिरफ्तारी जल्द ही कर सकती है। उधर निलंबित लिपिक केस दर्ज होने के बाद से फरार हो गया है। साथ ही उसके मोबाइल नंबर बंद चल रहे हैं। वे अपने लोगों से संपर्क करने के लिए इलेक्ट्रानिक उपकरण का प्रयोग नहीं कर रहा है। जिसके चलते पुलिस को उसका लोकेशन नहीं मिल पा रहा है। उधर बिचौलिए की गिरफ्तारी के बाद बीएसए कार्यालय के कुछ कर्मचारी व बिचौलिए भयभीत नजर आ रहे हैं। वह इसलिए भयभीत हैं कि जांच की आंच कहीं उनके गले तक नहीं पहुंच जाए। फिलहाल जांच ठीक से हुई तो बीएसए कार्यालय में दबे कई और राज भी बाहर आएंगे।
अब वेतन और अन्य कार्य में आई तेजी
बीएसए शालिनी श्रीवास्तव 23 फरवरी से ही जिले से बाहर थी। इसलिए वेतन व अन्य कार्य प्रभावित होने लगे थे। एक दिन पहले बीएसए को शासन ने निलंबित कर दिया। साथ ही डायट प्राचार्य अनिल कुमार को बीएसए का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। अतिरिक्त कार्यभार मिलने के बाद बीएसए कार्यालय में लंबित फाइलें निस्तारित होने लगी हैं और वेतन समेत अन्य कार्य में तेजी आ गई है।
बीएसए कार्यालय में नहीं दिखी चहलकदमी
होली के पहले हुई इस घटना ने बीएसए कार्यालय के सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया है। उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने के लिए 16-16 लाख लिए गए, फिर भी आदेश को एक वर्ष तक कूड़े की ढेर में रखा गया। शिक्षक की मौत के बाद जिले में उच्च न्यायालय से जुड़े हर आदेश को तेजी से देखा जाने लगा है और उनके निस्तारण की रफ्तार अब तेज कर दी गई है। डीएम ने खुद ही इसको लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है। ऐसे तो बीएसए कार्यालय में शिक्षक के आत्महत्या करने के बाद से ही चहलकदमी बहुत कम दिख रही है।
बढ़ता जा रहा शिकायतों का पुलिंदा
शिक्षक आत्महत्या के बाद शासन सख्त हो गया। बीएसए शालिनी श्रीवास्तव व लिपिक के निलंबन के बाद बीएसए कार्यालय में शिकायतों का पुलिंदा बढ़ता जा रहा है। डीएम व सीडीओ तक आए दिन लोग बीएसए कार्यालय से जुड़े शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। वर्षों से दबे मामले भी बीएसए कार्यालय तक पहुंचने लगे हैं। सीडीओ ने कुछ मामलो को खुद ही संज्ञान ले लिया है और प्रकरण की जांच कराने का लोगों को आश्वासन दिया है। अगर सभी मामलों की जांच हुई तो बीएसए कार्यालय में तैनात कुछ और भी कर्मियों पर कार्रवाई हो सकती है।




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