Taking aim at UP sarkar Avimukteshwaranand Today king does not consider cow as his mother hence necessary challenge आज का राजा गाय को माता नहीं मान रहा, इसलिए उसे ललकारना जरूरी: अविमुक्तेश्वरानंद, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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आज का राजा गाय को माता नहीं मान रहा, इसलिए उसे ललकारना जरूरी: अविमुक्तेश्वरानंद

शंकराचार्य ने कहा कि जौनपुर की यह धरती महर्षि यमदग्नि और भगवान परशुराम की तपोभूमि रही है। गोमती नदी के किनारे ही गाय की सेवा और संरक्षण की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि जमैथा गांव में गोमती नदी के तट पर महर्षि यमदग्नि ने गाय की सेवा की थी।

Sat, 7 March 2026 05:58 PMDinesh Rathour जौनपुर, भाषा
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आज का राजा गाय को माता नहीं मान रहा, इसलिए उसे ललकारना जरूरी: अविमुक्तेश्वरानंद

ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यूपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज का राजा गाय को माता नहीं मान रहा है, बल्कि उसे संपत्ति के रूप में देखने लगा है, ऐसे में उसे ललकारना आवश्यक हो गया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शनिवार को सूनह के जौनपुर पहुंचे और यहां उन्होंने गोमती नदी तट पर स्थित जमैथा गांव में महर्षि यमदग्नि मुनि के आश्रम में दर्शन-पूजन किया।

शंकराचार्य ने कहा कि जौनपुर की यह धरती महर्षि यमदग्नि और भगवान परशुराम की तपोभूमि रही है। गोमती नदी के किनारे ही गाय की सेवा और संरक्षण की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि जमैथा गांव में गोमती नदी के तट पर महर्षि यमदग्नि ने गाय की सेवा की थी। उस समय के राजा ने जबरन उनकी गाय छीन ली थी। जब यह बात उनके पुत्र भगवान परशुराम को पता चली तो उन्होंने अन्याय के खिलाफ खड़े होकर राजा और उसकी सेना का वध कर गाय को वापस लिया था।

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समाज और धर्म की रक्षा के लिए सच बोलें

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में माता के समान मानी जाती है, यदि शासन व्यवस्था उसे केवल संपत्ति मानकर देखेगी तो यह परंपरा और आस्था का अपमान है। इसलिए संत समाज इस विषय पर आवाज उठाने को बाध्य है। उन्होंने कहा कि जौनपुर आकर महर्षि यमदग्नि का आशीर्वाद लेकर वह अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने का संकल्प लेकर निकले हैं। उन्होंने कहा कि संत समाज का दायित्व है कि वह समाज और धर्म की रक्षा के लिए समय-समय पर सच बोले और अन्याय का विरोध करे। इस दौरान आश्रम में बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु मौजूद रहे। शंकराचार्य ने आश्रम में पूजा-अर्चना कर देश और समाज के कल्याण की कामना भी की।

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11 मार्च को लखनऊ से धर्मयुद्ध का शंखनाद करेंगे अविमुक्तेश्वरानंद

गोरक्षा कानून बनाने की मांग को लेकर हो रहे आंदोलन के बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी ने कहा कि इस मुद्दे को उठाने पर उन्हें विभिन्न प्रकार की यातनाएं झेलनी पड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि गोरक्षा हमारा धर्म और कर्तव्य है, इसलिए इसे बचाने और इसके लिए सख्त कानून बनवाने के लिए सभी को एकजुट होना होगा। लंभुआ में उनके स्वागत के बाद हनुमान जी के दर्शन-पूजन करने के उपरांत शंकराचार्य ने कहा कि गोरक्षा के लिए चल रही इस मुहिम में हर व्यक्ति को भागीदारी निभानी चाहिए।

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गोरक्षा मुद्दे को मजबूती से नहीं उठाती हैं सरकारें

उन्होंने सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो सरकारें गोरक्षा के नाम पर सत्ता में आईं, वही आज गायों के संरक्षण में विफल साबित हो रही हैं। उन्होंनेआगे कहा कि जनता अपने जनप्रतिनिधियों को वोट देकर सदन में भेजती है, लेकिन वे वहां जनता की भावनाओं के अनुरूप गोरक्षा का मुद्दा मजबूती से नहीं उठाते। परिणामस्वरूप गायों की हत्या रुक नहीं पा रही है। शंकराचार्य ने कहा कि गाय माता की रक्षा के लिए अब धर्मयुद्ध का आरंभ हो चुका है और 11 मार्च को लखनऊ में इस आंदोलन का शंखनाद किया जाएगा।

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