पूरे प्रकरण की एसआईटी जांच हो्; सस्पेंड सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की पीएम मोदी से मांग
सस्पेंड सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की पीएम मोदी से एसआईटी जांच की मांग की है। डीएम आवास पर बंधक बनाए जाने के अपने आरोप दोहराए और पूरे प्रकरण की प्रधानमंत्री से एसआईटी जांच कराने की मांग की।

निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री मंगलवार सुबह एक बार फिर अपने आवास पर मीडिया के सामने आए। इस दौरान उन्होंने सोमवार रात अपने लिए फोन पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने पर नाराजगी जताई। डीएम आवास पर बंधक बनाए जाने के अपने आरोप दोहराए और पूरे प्रकरण की प्रधानमंत्री से एसआईटी जांच कराने की मांग की। उन्होंने प्रदेश में लोकतंत्र समाप्त होने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की भी बात कही।
मीडिया से बातचीत में निलंबन के सवाल पर अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि वह पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं, इसलिए निलंबन से उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि सोमवार रात डीएम आवास पर उनसे यह लिखवाने का प्रयास किया गया कि उन्होंने एसईआर के दबाव में यह कदम उठाया है और यह भी दर्शाने की कोशिश की गई कि उन्होंने तनाव या अवसाद में आकर इस्तीफा दिया है, जबकि इसका शंकराचार्य प्रकरण या यूजीसी एक्ट से कोई संबंध नहीं है।
लखनऊ से आई कथित कॉल का लगाया आरोप
निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट ने दावा किया कि सोमवार शाम करीब 7:40 बजे डीएम के पास लखनऊ से एक फोन कॉल आई थी, जिसमें ब्राह्मण समाज को लेकर अपशब्द कहे गए और उन्हें रातभर डीएम आवास से बाहर न जाने देने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्होंने बरेली बार एसोसिएशन के सचिव दीपक पांडे को फोन किया, जो उनके साथ डीएम आवास पहुंचे। अलंकार का कहना है कि वह अपनी जान बचाकर वहां से निकल पाए।
जान का खतरा बताकर आवास खाली किया
मीडिया के सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें बरेली में जान का खतरा है, इसलिए वह अपना सरकारी आवास खाली कर रहे हैं। सोमवार रात ही आनन-फानन में ट्रक लगाकर उनका सामान लोड किया जाने लगा। कुछ सामान लखनऊ स्थित आवास पर भेजा गया। जबकि कुछ सामान उनके आवास परिसर में खड़े ट्रक में पड़ा हुआ है।




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