son turned out to be executioner shot his father stuffed half body into a drum and threw the other half in lucknow बेटा निकला जल्लाद, बाप को गोली से उड़ाया; आधी लाश ड्रम में भरी; आधी लखनऊ में फेंक आया, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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बेटा निकला जल्लाद, बाप को गोली से उड़ाया; आधी लाश ड्रम में भरी; आधी लखनऊ में फेंक आया

Lucknow Son Killed Father: दिल दहला देने वाली ये घटना, लखनऊ के आशियाना सेक्टर-एल की है। सोमवार को शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की हत्या का खुलासा हुआ तो हर कोई हैरान रह गया। पिता-पुत्र के बीच 20 फरवरी को तीखी कहासुनी हुई थी। इसी दौरान अक्षय प्रताप सिंह ने पिता के सीने में दो गोलियां दाग दीं।

Tue, 24 Feb 2026 07:33 AMAjay Singh प्रमुख संवाददाता, लखनऊ
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बेटा निकला जल्लाद, बाप को गोली से उड़ाया; आधी लाश ड्रम में भरी; आधी लखनऊ में फेंक आया

Lucknow Son Killed Father: जिसे पाल पोस कर बड़ा किया, जिसकी एक मुस्कान के लिए सब कुछ न्यौच्छावर करता रहा, वही बेटा पिता के लिए जल्लाद बन गया। यूपी की राजधानी लखनऊ में सामने आए इस वीभत्स हत्याकांड को जिसने भी सुना उसके रोंगटे खड़े हो गए। लोगों को यकीन ही नहीं आ रहा था कि किसी पिता के लिए उसका अपना ही खून इतना खूंखार हो सकता है। इस बेटे ने पहले पिता के लाइसेंसी असलहे से पिता को ही गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। फिर हाथ-पैर काटकर उनकी आधी लाश को ड्रम में भर दिया। बाकी की आधी लाश वह कहीं फेंक आया। आरोपी बेटे को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस लाश के उस हिस्से को तलाश कर रही है।

दिल दहला देने वाली ये घटना, लखनऊ के आशियाना सेक्टर-एल की है। सोमवार को शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह (उम्र-45 वर्ष) की हत्या का खुलासा हुआ तो हर कोई हैरान रह गया। बताया जा रहा है कि पिता-पुत्र के बीच 20 फरवरी को तीखी कहासुनी हुई थी। इसी कहासुनी के दौरान गुस्से में आकर अक्षय प्रताप सिंह ने सामने से पिता के सीने में दो गोलियां दाग दीं। मानवेंद्र सिंह की बेटी ने पड़ोसियों को बताया कि उसके भाई ने ही पिता को सामने से गोली मारी। किसी को घटना के बारे में ना बताने के लिए धमकाया भी था। बेटी पड़ोसी धर्मेंद्र सिंह के घर में है।

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तलाश में जुटे थे रिश्तेदार और मोहल्लेवाले

मानवेंद्र सिंह की हत्या हो चुकी थी लेकिन इस बारे में जमाने को खबर सोमवार को हुई। उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। रिश्तेदारों और मोहल्ले वालों ने मानवेंद्र की तलाश के लिए दिन-रात एक कर दिया था। सोमवार को जब उनकी लाश उन्हीं के घर में छुपी मिली तो हर कोई दंग रह गया। मानवेंद्र की तलाश के दौरान हर कदम साथ रहने वाले बेटे का असली चेहरा सामने आया तो लोगों को एकबारगी अपनी आंखों और कानों पर भी विश्वास नहीं हुआ।

पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते थे मानवेंद्र के

मानवेंद्र सिंह को 20 फरवरी के बाद उन्हें किसी ने नहीं देखा। पड़ोसियों से उनके मधुर संबंध थे। दो दिन तक न दिखने पर लोगों ने बेटे अक्षय प्रताप सिंह से पूछताछ की, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मानवेंद्र के करीबी मित्र और पड़ोसी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने ही अक्षय के साथ मिलकर “मानवेंद्र सिंह मिसिंग” नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया। ग्रुप में रिश्तेदार, मित्र और मोहल्ले के लोग जुड़े और लगातार अपडेट साझा किए जाने लगे। विडंबना यह रही कि आरोपी बेटा भी उसी ग्रुप में खुद को परेशान बताकर संदेश लिख रहा था। लोगों का कहना है कि अक्षय अपनी ब्रेजा कार से इधर-उधर जाता दिखता था। आशंका जताई जा रही है कि वह कार से शव के हिस्से ठिकाने लगाने की कोशिश में था। मोहल्ले वालों ने कई बार पुलिस से गुहार लगाई, लेकिन शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। इस बीच मानवेंद्र की शराब दुकानों पर स्टॉक खत्म होने लगा था। कारोबारी सहयोगी भी उनकी तलाश में थे, क्योंकि भुगतान और लाइसेंस नवीनीकरण का मामला अटका था।

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आशियाना में है तीन मंजिला मकान

मूल रूप से जालौन कोतवाली क्षेत्र के उदयपुरा के रहने वाले मानवेंद्र सिंह आशियाना सेक्टर एल स्थित तीन मंजिला मकान में परिवार के साथ रहते थे। आशियाना और कानपुर रोड बाराबिरवा चौराहे पर भी उनकी शराब की दुकान है। इसके अलावा सालेहनगर और बुद्धेश्वर में पैथोलॉजी सेंटर हैं। मानवेंद्र की पत्नी की 2017 में मौत हो चुकी है। घर में दूसरे और तीसरे फ्लोर पर बेटे अक्षय प्रताप सिंह (उम्र 20 साल) और बेटी कृति (उम्र 17 साल) के साथ रहते थे। अक्षय बीकॉम का छात्र है और कृति 11 वीं में पढ़ती है। ग्राउंड फ्लोर मेहमानों के लिए था। पहली मंजिल पर छोटे भाई पुलिस इंस्पेक्टर एसएस राजावत, दूसरे और तीसरे तल खुद रहते थे। राजावत सचिवालय सुरक्षा में तैनात हैं। वह इन दिनों गांव गए हुए थे।

पिता के लिए कत्ल के बाद खुद ही दी गुमशुदगी की तहरीर

लखनऊ के डीसीपी सेंट्रल विक्रांत वीर ने बताया कि सोमवार की सुबह सात बजे के आसपास अक्षय प्रताप खुद ही आशियाना कोतवाली पहुंचा था। उसने तहरीर दी जिसमें लिखा था कि उसके पिता 20 फरवरी की सुबह छह बजे दिल्ली जाने के लिए निकले थे। 21 फरवरी तक लौटने वाले थे लेकिन अभी तक नहीं आए हैं। उनके तीनों मोबाइल नंबर भी बंद हैं। उसकी इस तहरीर पर पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की थी। थाने से लौटने के बाद अक्षय ने मानवेंद्र के मित्र सोनू गुप्ता से बताया कि पिता ने खुदकुशी कर ली है। उधर, गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस भी सक्रिय हुई। सोनू और अन्य पड़ोसी भी घर पहुंचे और कड़ाई से पूछताछ की। तब खुलासा हुआ कि 20 फरवरी को अक्षय ने गोली मारकर मानवेंद्र की हत्या कर दी। पिता की हत्या के बाद उसने शव को काट दिया और आधे शव को ड्रम में छिपा दिया और बाकी हिस्सा फेंक आया।

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