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स्मार्ट मीटर पर मिलेगी राहत? उर्जा विभाग और पावर कारपोरेशन पर उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल

स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर लोगों को राहत के लिए उपभोक्ता परिषद ने एक बार फिर आवाज उठाई है। उत्तर प्रदेश उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर ऊर्जा विभाग और पावर कॉरपोरेशन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

Mon, 4 May 2026 07:12 AMYogesh Yadav लखनऊ, विशेष संवाददाता
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स्मार्ट मीटर पर मिलेगी राहत? उर्जा विभाग और पावर कारपोरेशन पर उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल

UP News: स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामले पर नियामक आयोग की नोटिस के आगे कोई कार्रवाई न होने पर उपभोक्ता परिषद ने सवाल उठाए हैं। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन और विद्युत नियामक आयोग के संज्ञान में पूरा मामला होने के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इससे यह स्पष्ट है कि प्रशासनिक स्तर पर निर्णयहीनता की स्थिति है। इससे उपभोक्ताओं का हक मारा जा रहा है। उन्हें जो राहत मिलनी चाहिए नहीं मिल पा रही है।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के बयान ने साफ कर दिया है कि प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनना उपभोक्ताओं का अधिकार है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) भी अधिसूचना में यह साफ कर चुका है। बावजूद इसके नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को नोटिस जारी कर मामले की इतिश्री कर ली। नोटिस का जवाब देने का वक्त बीत चुका है, बावजूद इसके आयोग कॉरपोरेशन पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।

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प्रदेश में 77,15,951 उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिसमें से 75,05,244 के मीटर बिना उनकी सहमति के प्रीपेड किए जा चुके हैं। उपभोक्ता परिषद ने मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि नए कनेक्शन पर प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त की जाए।

बिना कनेक्शन बिल दिया शुल्क जमा फिर भी अंधेरे में

लखनऊ। लेसा में बिजली कनेक्शन देने में घोर लापरवाही बरती जा रही है। आलम यह है कि कहीं बिना बिजली के तार जुड़े ही आवेदकों को हजारों रुपये का बिल थमाया जा रहा है, तो कहीं महीनों पहले फीस जमा करने के बावजूद लोग कनेक्शन के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। मोहनलालगंज के रकीबाबाद निवासी अजीत कुमार ने अपने घर के लिए बिजली कनेक्शन का आवेदन किया था।

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आवेदन के बाद जब विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने भवन निर्माण अधूरा होने का हवाला देते हुए कनेक्शन देने से साफ इनकार कर दिया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उनके मोबाइल पर (खाता संख्या 3008940823) के विरुद्ध लगभग एक हजार रुपये का बिजली बिल पहुंच गया।

हैरानी की बात यह है कि जिस घर में अभी तक एक बल्ब भी नहीं जला, वहां विभाग ने कागजों पर बिल जनरेट कर दिया। पीड़ित अजीत कुमार ने इसकी लिखित शिकायत इंद्रलोक हाईडिल कॉलोनी स्थित हेल्प डेस्क पर भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

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