वाराणसी में बजा सायरन, रेलवे स्टेशन पर NSG कमांडो ने संभाला मोर्चा, मॉक ड्रिल से परखी तैयारी
वाराणसी में शुक्रवार को आतंकी हमले से निबटने के लिए एनएसजी और पुलिस ने संयुक्त अभ्यास का आयोजन किया। वाराणसी के दोनों प्रमुख रेलवे स्टेशन और विश्वनाथ मंदिर में मॉक ड्रिल के से सतर्कता आंकी गई। इसे सारनाथ और संकटमोचन मंदिर पर भी किया जाएगा।

वाराणसी में शुक्रवार की सुबह सायरन बजा तो सनसनी फैल गई। तत्काल राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के कमांडो और स्थानीय पुलिस के साथ अन्य सुरक्षा एजेंसियों के जवानों ने पोजिशन संभाल लिया। ऑपरेशन गांडीव के तहत आतंकी घटना से निपटने के लिए प्रमुख स्थलों पर व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। बनारस रेलवे स्टेशन, वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस स्टैंड जैसे संवेदनशील स्थानों पर यह ड्रिल आयोजित की गई। इसमें जवानों ने त्वरित कार्रवाई, बचाव अभियान और आम नागरिकों को सुरक्षित निकालने का अभ्यास किया।
शुक्रवार की सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई इस मॉक ड्रिल में एनएसजी की विशेष इकाई और वाराणसी पुलिस की संयुक्त टीमों ने सायरन बजाकर पहले अलर्ट जारी किया। बनारस रेलवे स्टेशन पर सबसे पहले ड्रिल का केंद्र बिंदु बनाया गया। यहां यात्रियों को सुरक्षित निकालने, संदिग्ध वस्तुओं की जांच और काल्पनिक बम डिस्पोजल का अभ्यास किया गया। कैंट क्षेत्र में सड़क पर वाहनों की तलाशी, पैदल मार्च और घेराबंदी का डेमो चलाया गया। रोडवेज बस स्टैंड पर भीड़भाड़ वाली स्थिति में बचाव अभियान का रिहर्सल हुआ।
ड्रिल के दौरान जवानों ने काला मास्क, हेलमेट और हथियारों से लैस होकर तेजी से एक्शन लिया। एक काल्पनिक परिदृश्य में स्टेशन पर 'आतंकी हमले' की सूचना पर 2 मिनट के अंदर पूरा क्षेत्र सील कर दिया गया। एनएसजी कमांडो ने स्निफर डॉग्स और ड्रोन का उपयोग कर 'संदिग्ध वस्तुओं ' को निष्क्रिय करने का अभ्यास किया। स्थानीय लोगों को भी जागरूक किया गया कि सायरन बजने पर तुरंत शरण स्थल की ओर बढ़ें और फोन पर अफवाह न फैलाएं।

यह ड्रिल केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित की गई ताकि किसी भी संभावित खतरे से निपटने की क्षमता बढ़ाई जा सके। एनएसजी की टीम ने ड्रिल के बाद फीडबैक सेशन में कमजोरियों पर चर्चा की और अगले चरण में साइबर थ्रेट और केमिकल अटैक का सिमुलेशन जोड़ने का प्लान बनाया। जिला प्रशासन ने भी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को शामिल किया जो आपदा प्रबंधन के लिए तैयार रहेंगी।
इससे पहले पुलिस अधिकारियों और प्रशासन ने आमजन से पहले ही अपील की थी कि यह एक वार्षिक सुरक्षा एवं आपातकालीन तैयारी का अभ्यास है। इस अभ्यास के दौरान नकली बम व फायरिंग के माध्यम से मॉक ड्रिल किया जायेगा। अभ्यास के दौरान किसी भी परिस्थिति में घबराएं नहीं, इसे सुरक्षा अभ्यास का हिस्सा मानते हुए सहयोग प्रदान करें।
बताया गया कि यह अभ्यास पूरे देश में एक साथ चार राज्यों में होगा। वाराणसी को उसके धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन महत्व को देखते हुए इस वार्षिक अभ्यास के लिए चयनित किया गया है।
इस कमांडो ड्रिल/मॉक एक्सरसाइज में NSG सहित कमिश्नरेट पुलिस, आरपीएफ, जिला प्रशासन, जीआरपी, यूपी एटीएस, अग्निशमन सेवा, सीआरपीएफ, पीएसी, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ, पर्यटन विभाग, जल पुलिस, एलआईयू शामिल हो रही है। इसमें किसी को बंधक बनाने की दिशा में उसे मुक्त कराने, बम ब्लास्ट, एंटी-आईईडी ऑपरेशन, वीवीआईपी अपहरण एवं बचाव अभियान का अभ्यास किया जा रहा है।
काशी विश्वनाथ मंदिर में बंधक मुक्ति अभ्यास, संकट मोचन मंदिर में केमिकल बम विस्फोटक, वाराणसी जंक्शन रेलवे स्टेशन एलईडी ब्लास्ट, बनारस रेलवे स्टेशन (मंडुआडीह) - ग्रेनेड अटैक, चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय बस स्टेशन - एलईडी ब्लास्ट, सारनाथ बौद्ध स्थल एसीपी सारनाथ कार्यालय पर केमिकल बम विस्फोटक, आतंकी हमला एवं बंधक मुक्ति अभ्यास, रविदास घाट (क्रूज लाइन) क्रूज़ के भीतर आतंकियों की घुसपैठ व बंधक मुक्ति अभ्यास, ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर, शिवपुर- टीएफसी पर आतंकियों के अटैक को लेकर अभ्यास होगा।




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