खामेनेई की मौत पर पुराने लखनऊ में बंद जैसे हालात! शियाओं का प्रदर्शन, यूएस-इजरायल के खिलाफ नारेबाजी
लखनऊ में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद शिया समुदाय में गहरा शोक और प्रदर्शन हुआ। हुसैनाबाद और इमामबाड़ों में दुकानें बंद, लोग मातम कर रहे हैं। तीन दिवसीय शोक में काले झंडे और कपड़े अपनाए जाएंगे। आज रात छोटा इमामबाड़ा में शोकसभा और कैंडल मार्च होगा।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर से शनिवार को भारी शोक की लहर दौड़ गई। ईरानी राज्य मीडिया ने पुष्टि की कि अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हवाई हमलों में तेहरान में उनके कार्यालय पर हमला हुआ, जिसमें 86 वर्षीय खामेनेई शहीद हो गए। इस घटना के विरोध में पुराने लखनऊ की शिया बहुल्य आबादी ने स्वतःस्फूर्त बंद का ऐलान किया। हुसैनाबाद के शाही गेट से लेकर बड़े इमामबाड़े तक सभी दुकानें पूरी तरह बंद रहीं, शटर नीचे गिरे हुए थे। मेडिकल स्टोर सहित आवश्यक सेवाओं की दुकानें भी बंद कर दी गईं।
खामेनेई की मौत के विरोध में शियाओं का प्रदर्शन
स्थानीय शिया मोहल्लों से लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर छोटे इमामबाड़े और बड़े इमामबाड़े की ओर जा रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने "खामेनेई अमर रहे" के नारे लगाए, साथ ही अमेरिका और इजराइल विरोधी नारे भी गूंजे, साथ ही अमेरिका मुर्दाबाद, इजराइल मुर्दाबाद के नारे लगते रहे। शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद रविवार को रात 8 बजे छोटे इमामबाड़े पर मजलिस और विरोध प्रदर्शन बुलाया है।
कल्बे जवाद ने 3 दिन के शोक की घोषणा की
इस मौके पर कैंडल मार्च भी निकाला जाएगा। मौलाना जवाद ने तीन दिन के शोक की घोषणा भी की है। पुराने लखनऊ में हो रहा विरोध प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और अब तक कोई हिंसा या झड़प की खबर नहीं है। इलाके में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ा दी गई है ताकि शांति बनी रहे।
ईरान ने की खामेनेई की मौत की पुष्टि
आपको बता दें ईरान की 'सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल' ने एक आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की है कि देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई शनिवार सुबह तेहरान स्थित अपने कार्यालय में मारे गए। इस हमले में IRGC चीफ मेजर जनरल मोहम्मद पाकपुर और अयातुल्ला खामेनेई के सीनियर सलाहकार अली शमखानी मारे गए हैं। इजरायल के पूर्व प्रेसिडेंट अहमदीनेजाद के मुताबिक, ईरान की सीक्रेट सर्विस ने ईरान के अंदर मोसाद एजेंट्स को टारगेट करने के लिए एक यूनिट बनाई थी। लेकिन इस यूनिट का हेड खुद मोसाद का एक ऑपरेटिव निकला, साथ में 20 और एजेंट्स भी थे।
ईरान में अस्थिरता का माहौल
सरकारी टेलीविजन पर एक न्यूज एंकर ने रुंधे हुए गले और आंखों में आंसू लिए देश को सूचित किया कि ईरान अब 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक में प्रवेश करेगा। इस हमले ने न केवल ईरान की सत्ता को हिला दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र को एक भीषण युद्ध की आग में झोंक दिया है। जिस समय इजरायल ने उन्हें मार गिराया, उस समय वह अपने दफ्तर में दैनिक काम कर रहे थे।
खामेनेई के निधन से देश की आंतरिक और बाहरी नीतियों में बड़े बदलाव की संभावना है। शिया धर्मगुरुओं और राजनीतिक नेताओं ने देशवासियों से संयम बनाए रखने और शांति बनाए रखने की अपील की है। ईरान में खामनेई का निधन न केवल धार्मिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटना है, बल्कि इसे मध्य पूर्व की राजनीतिक दिशा और वैश्विक कूटनीति पर भी असर डालने वाला माना जा रहा है।




साइन इन