दशहरा पर शंकरगढ़ में सजेगा राजदरबार, राजा महेंद्र प्रताप सिंह को नजराने भेंट करेगी प्रजा
प्रयागराज में शंकरगढ़ कसौटा राजपरिवार के नामधारी राजा (Titular King) महेंद्र प्रताप सिंह दशहरा पर राजदरबार सजाएंगे। सदियों पुरानी परंपरा में राजा शस्त्र पूजन के अलावा जनता से संवाद करते हैं। राजा को तोहफे भी मिलते हैं।

प्रयागराज में विजय दशमी पर शंकरगढ़ का राजमहल सैकड़ों वर्षों से चली आ रही राजदरबार की परंपरा का गवाह बनेगा। शंकरगढ़ के कसौटा राजघराने के 36वें उत्तराधिकारी व नामधारी राजा (Titular King) महेंद्र प्रताप सिंह का शाही दरबार 2 अक्टूबर को सजाया जाएगा, जिसमें शंकरगढ़ क्षेत्र के 365 गांवों के अलावा आस-पास के जिलों से लोग शामिल होगे। राजदरबार में राजा और प्रजा एक-दूसरे का अभिवादन करते हैं। प्रजा राजा की लंबी उम्र और कुशलता की मंगलकामना करती हैं। सैकड़ों सालों से चली आ रही परंपरा का पालन करते हुए लोग नजराने के रूप में राजा महेंद्र प्रताप सिंह को उपहार भी भेंट करेंगे।
स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि दरबार की यह परंपरा पिछले कई सदी से निभाई जा रही है। दशहरे की दसवीं तिथि को ही शंकरगढ़ राजपरिवार का यह विशेष आयोजन होता है, जिसमें व्याघ्र वंश के राजाओं की गद्दी पर आसीन उत्तराधिकारी दरबार लगाते हैं। राजदरबार को संबोधित करते हुए राजा महेंद्र प्रताप सिंह लोगों से अपने सुख-दुख एवं अच्छे-बुरे कार्यों की चर्चा करते हैं और जनमानस के सुख-दु:ख के बारे में भी पूछते हैं। देर रात तक चलने वाले राजदरबार का समापन भोज के साथ होता है।
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शंकरगढ़ के समाजसेवी सूर्यनिधान पांडे बताते हैं कि राजदरबार की परंपरा हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। उन्हें गर्व है कि लोग आज भी इस परंपरा को उसी श्रद्धा से निभा रहे हैं। 90 साल के गोपाल दास गुप्ता कहते हैं कि राजदरबार केवल एक रस्म नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक है, जो समाज को एकता और भाईचारे का संदेश देता है। पूर्व प्राचार्य गुलाब सिंह ने इसे ऐतिहासिक विरासत बताया और कहा कि दशहरे के दिन यह दरबार गौरवशाली अतीत की याद दिलाता है और नई पीढ़ी को प्रेरणा देता है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष अरविंद केसरवानी के अनुसार राजा और प्रजा का यह संबंध आज भी उतना ही गहरा है, जितना अतीत में था।
विजयदशमी पर शस्त्र पूजन की भी परंपरा
राजदरबार में विजयदशमी पर परंपरागत रूप से शस्त्र पूजन होता है। पुरोहित वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राजपरिवार के समक्ष रखे गए शस्त्रों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराएंगे। पूजन के उपरांत शस्त्रों को पुनः बड़ी सावधानी और सुरक्षित ढंग से उनके निर्धारित स्थान पर रखा जाता है। शस्त्र पूजन केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है बल्कि शंकरगढ़ राजपरिवार की परंपरा का हिस्सा है जो लोगों को इतिहास और संस्कृति से जोड़ता है।
वर्षों से चली आ रही है राजा को नजराना देने की परंपरा
जानकारों के अनुसार गुजरात के महाराज (पहले सोलंकी लेकिन अब बघेल राजा नाम से जाने जाते हैं) के पांच पुत्रों में से करण देव ने रीवा खानदान को संभाला, जबकि कन्धर देव ने कसौटा राज्य की स्थापना की और देवरा (वर्तमान शंकरगढ़) को राजधानी बनाया। लगभग एक हज़ार वर्ष पूर्व स्थापित राज्य में शुरुआत से ही नजराने की परंपरा रही है।
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वर्तमान में राजपरिवार की 36वीं पीढ़ी के राजा महेंद्र प्रताप सिंह पोते त्रयंबकेश्वर प्रताप सिंह के साथ दरबार में बैठेंगे और नजराने की परंपरा में शामिल होंगे। राजमहल प्रबंधक अमरेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि 1872 में राजा वंशपति सिंह ने शंकरगढ़ नगर की स्थापना की थी। भोले बाबा के अनन्य भक्त रहे राजा वंशपति सिंह ने भगवान के नाम पर यहां का नाम शंकरगढ़ रखा था।





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