मौनी अमावस्या पर बिना स्नान लौटे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, पालकी रोकने पर बवाल
सूचना पर मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। उन्होंने शंकराचार्य को मनाने की कोशिश की लेकिन शंकराचार्य पैदल जाने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद पुलिस ने समर्थकों को वहां से हटा दिया। शंकराचार्य की पालकी वहीं रह गई। फिर शंकरचार्य बिना स्नन किए वहां से चले गए।

मौनी अमावस्या पर एक तरफ जहां प्रयागराज संगम तट पर आस्था का सैलाब उमड़ा हुआ है। दोपहर साढ़े 12 बजे तक करीब 3.15 करोड़ श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगा चुके थे। वहीं ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद लंबी खींचतान के बाद बिना स्नान किए वापस लौट गए। उन्होंने पुलिस पर शिष्यों से बदसलूकी और मारपीट करने का आरोप लगाया। इसके पहले शंकराचार्य के रथ और काफिले को लेकर हालात तनावपूर्ण हो गए थे। पुलिस ने भारी भीड़ और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए रथ से संगम नोज की ओर बढ़ रहे शंकराचार्य को रोक दिया था। अधिकारियों ने शंकराचार्य से पालकी से उतरकर पैदल जाने का आग्रह किया लेकर शंकराचार्य और उनके समर्थक इसके लिए राजी नहीं हुए। समर्थक आगे बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई।
सूचना पर मौके पर पहुंचे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। उन्होंने शंकराचार्य को मनाने की कोशिश की लेकिन शंकराचार्य पैदल जाने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद पुलिस ने समर्थकों को वहां से हटा दिया। शंकराचार्य की पालकी वहीं रह गई। फिर शंकरचार्य बिना स्नन किए वहां से चले गए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें स्नान नहीं करने दिया इसलिए वह वापस जा रहे हैं। जबकि पुलिस-प्रशासन का कहना है कि माघ मेले में मौनी अमावस्या पर्व स्नान के कारण संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। इसी वजह से शंकराचार्य के रथ को रोककर पैदल तट तक जाने का आग्रह किया गया।
क्या बोले शंकराचार्य
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि 40 साल से हम स्नान कर रहे हैं अभी तक तो कुछ नहीं हुआ। पैदल जाने में समस्या ये है कि लोगों को जैसे पता चलता है कि शंकराचार्य जी आए हैं तो चारों तरफ से बड़ी संख्या में लोग पास आ जाते हैं, भगदड़ जैसी स्थिति हो जाती है इसीलिए तीन साल से हम पालकी से आने लगे। पालकी में आते हैं, ऊपर रहते हैं तो दूर से लोग दर्शन कर लेते हैं, कोई भगदड़ नहीं मचती। पैदल चलने में हमें कोई दिक्कत नहीं है। मैंने यह बात अधिकारियों को बताई लेकिन वे मानने को तैयार नहीं हैं। शंकराचार्य ने समर्थकों द्वारा बैरियर तोड़े जाने के आरोपों से इनकार किया।
प्लीज, प्लीज, प्लीज ऐसा न करे, पुलिस कमिश्नर ने यूं की अपील
माघ मेला में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोके जाने के बाद समर्थकों के गुस्से के बीच प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर जोगिन्दर कुमार ने लाउस्पीकर पर साधु-संतों से पैदल ही स्नान के लिए जाने की अपील की। उन्होंने तीन बार प्लीज, प्लीज, प्लीज कहा और कहा कि साधु भेष में होकर पुलिस के साथ प्लीज अराजकता न करें। घाट पर तिल रखने की जगह नहीं है। महिलाएं वहां नहा रही हैं, कपड़े बदल रही हैं, श्रद्धालु बच्चों के साथ आए हैं। उनके लिए प्लीज एक-एक करके स्नान करने जाएं। भीड़ में सबकी जान की कीमत बराबर है। स्नान भी सबके लिए बराबर है। हम सभी अधिकारी आपकी वजह से दो घंटे से यहां खड़े हैं। बाद में मीडिया से बातचीत में पुलिस कमिश्नर ने कहा कि वापसी मार्ग को उन लोगों ने अवरुद्ध कर रखा था। इसकी वजह से कोई घटना घटित हो सकती थी। अनुरोध करने पर भी माने नहीं। इन लोगों ने हमारे बैरियर को तोड़ा और हमारे पुलिसवालों के साथ धक्का मुक्की भी की। हम लोग सीसीटीवी देख रहे हैं। उन्होंने पुलिस के साथ धक्का-मुक्की करके बैरियर गिराया है, सीसीटीवी देखकर इसकी जांच की जाएगी। उन्होंने कहा की दो सौ लोगों के साथ जाने से कोई भी अराजकता फैल सकती है इसीलिए किसी को अनुमति नहीं दी गई।
क्या बोलीं मंडलायुक्त
प्रयागराज की मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि वह (शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद) बिना किसी इजाजत के अपने रथ (पालकी) पर सवार होकर अपने करीब दो सौ अनुयायियों के यहां आए थे। यहां करोड़ों की भीड़ थी। बैरियर तोड़कर वह आए और करीब तीन घंटे तक वापसी मार्ग को अवरुद्ध किया। इससे जन सामान्य को बड़ी असुविधा हुई और कोई भी घटना घट सकती थी।




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