wave of faith descended on sangam on mauni amavasya ruckus after police stopped shankaracharya avimukteshwarananda rath मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का रथ रोकने पर हंगामा; बैरियर टूटा, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का रथ रोकने पर हंगामा; बैरियर टूटा

संगम पर हंगामे के चलते पुलिस ने पब्लिक को डायवर्ट भी किया है। आरएएफ ने कतार लगाकर भीड़ को डायवर्ट किया। पुलिस और शंकराचार्य के समर्थकों के बीच बहस की सूचना पर कई अधिकारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे।अधिकारियों की ओर से कहा गया कि जुलूस के साथ संगम तट पर जाने की अनुमति नहीं है। 

Sun, 18 Jan 2026 12:23 PMAjay Singh संवाददाता, प्रयागराज
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मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का रथ रोकने पर हंगामा; बैरियर टूटा

Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर संगम तट पर लगे माघ मेला-2026 में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। सुबह 9 बजे तक ही करीब डेढ़ करोड़ श्रद्धालुओं ने मौनी स्नान पर्व पर आस्था की डुबकी लगा ली थी। श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश भी की गई। इस बीच मौनी अमावस्या पर राजसी स्नान की तरह जुलूस निकालने पर पुलिस ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के रथ को संगम के पहले रोक दिया। प्रशासन ने 17/18 जनवरी की रात 12 बजे मेला क्षेत्र को नो व्हीकल जोन घोषित कर रखा है। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि रथ की अनुमति नहीं ली गई थी। उधर, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पुलिस पर संतों से मारपीट का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पैदल जाने का अनुरोध किया था लेकिन लोग दर्शन के लिए टूट पड़ते हैं, इससे भगदड़ की स्थिति हो जाती है। रथ रोके जाने पर शंकराचार्य समर्थकों और पुलिस-प्रशासन के बीच तीखी नोंकझोंक होने लगी। इसी दौरान सूचना आई कि पुल नंबर चार का बैरियर टूट गया है। कहा गया कि शंकराचार्य के समर्थकों ने इसे तोड़ा है। हालांकि शंकराचार्य ने समर्थकों द्वारा बैरियर तोड़े जाने के आरोपों को निराधार बताया है।

संगम पर हंगामे के चलते पुलिस ने पब्लिक को डायवर्ट भी किया है। आरएएफ ने कतार लगाकर भीड़ को डायवर्ट किया। पुलिस और शंकराचार्य के समर्थकों के बीच बहस की सूचना पर बड़ी संख्या में अधिकारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार, मेलाधिकारी ऋषिराज सहित कई वरिष्ठ अधिकारी वहां पहुंचे। अधिकारियों की ओर से कहा गया कि जुलूस के साथ संगम तट पर जाने की अनुमति नहीं है। पांच लोगों के साथ जाकर स्नान करें। इस पर शंकराचार्य ने आपत्ति की और पुलिस प्रशासन पर मनमानीपूर्ण रवैए का आरोप लगाया। काफी देर तक चली खींचतान के बाद पुलिस ने समर्थकों को वहां से खदेड़ दिया। रथ अकेला रह गया तो पुलिसकर्मी खुद बाहर ले गए।

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तड़के चार बजे से चल रहा है स्नान

माघ मेले का तीसरा और सबसे बड़ा स्नान पर्व मौनी अमावस्या आज है। इस मौके पर प्रयागराज के संगम स्थल पर भारी संख्या में श्रद्धालु जुटे हैं। ब्रह्म मुहूर्त में तड़के चार बजे से स्नान शुरू हुआ जो दिन भर चलता रहेगा। स्थानीय प्रशासन के अनुमान के मुताबिक इस साल तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालु मौनी अमावस्या के स्नान के लिए संगम क्षेत्र में पहुंचेगे।

एक दिन पहले से ही उमड़ने लगे थे श्रद्धालु

इस स्नान के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम एक दिन पहले ही संगमनगरी में पहुंच गया। अलसुबह से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हुआ जो दोपहर बाद काफी बढ़ गया। शाम को तो स्थिति यह हो गई थी कि लग रहा था मानो शनिवार को ही मौनी अमावस्या हो। सिर पर गठरी लादे हुए लोग मेले के भीतर प्रवेश करते हुए दिखाई दिए। प्रशासनिक अफसरों का अनुमान है कि रविवार को स्नान के लिए साढ़े तीन से चार करोड़ श्रद्धालु आएंगे। वहीं, अफसरों का यह भी दावा है कि मौनी अमावस्या से एक दिन पहले शनिवार शाम छह बजे तक 1.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई है।

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मेला क्ष्रेत्र में भीड़ बढ़ने पर लागू किए गए प्रतिबंध

शनिवार को दोपहर बाद जब मेला क्षेत्र में भीड़ बढ़ने लगी तो पुलिस और मेला प्रशासन ने उन प्रतिबंधों को लागू कर दिया, जो भीड़ नियंत्रण के लिए बनाए गए हैं। जीटी जवाहर और तिकोनिया चौराहे से ही वाहनों का प्रवेश रोका गया। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार, डीएम मनीष कुमार वर्मा, मेलाधिकारी ऋषिराज व एसपी मेला नीरज पांडेय दोपहर 12:30 बजे संगम वॉच टावर पहुंचे और भीड़ का आकलन करते हुए दिखाई दिए। दिनभर संगम पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा और स्नान का क्रम भी जारी रहा। रविवार की भीड़ से बचने के लिए श्रद्धालुओं ने पर्व से एक दिन शनिवार को ही स्नान कर लिया। दोपहर एक बजे पांटून पुल पर इतने श्रद्धालु हो गए थे कि बहुत धीरे-धीरे चलना पड़ रहा था। पांटून पुल दो से संगम आने और तीन से झूंसी जाने वाले पुलों पर केवल पैदल श्रद्धालु ही दिख रहे थे।

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